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नन्ही दुनिया- रोटी का गणित

जीव अपने खेतों में पानी दे रहा था। पास ही उसकी गाय चारा खा रही थी। राजीव के पिता चाहते थे कि वह खेती के साथ-साथ पढ़ाई भी करे।
Author August 6, 2017 05:41 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

पारुल शर्मा

जीव अपने खेतों में पानी दे रहा था। पास ही उसकी गाय चारा खा रही थी। राजीव के पिता चाहते थे कि वह खेती के साथ-साथ पढ़ाई भी करे। लेकिन राजीव को तो दोस्तों के साथ मस्ती करना और गायों के साथ खेतों पर जाना अच्छा लगता। वह रोज सुबह अपने पिता के साथ खेतों पर जाता और शाम को घर वापस आता।  एक दिन गांव में पशु चोरी की घटना हो गई। राजीव की मां ने यह बात उसके पिता को बताई- ‘हरिया की गाय और एक भैंस चोर घर के आंगन से खोल कर ले गए।’ राजीव भी पास बैठा मां की बात सुन रहा था। वह यह नहीं समझ पा रहा था कि चोर गाय-भैंस का क्या करेंगे। वह इसी सोच में था कि मां ने उससे कहा, ‘ध्यान रखना तुम्हारी गाय को न कोई चुरा ले जाए।’  राजीव सोच में पड़ गया। उसे गणित नहीं आता था। वह सोचने लगा कि अगर चोर आ गए तो मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरी कितनी गाएं ले गए। तभी उसे एक उपाय सूझा। उसे याद आया कि मां मुझे जब भी रोटी देती है, मेरे और मांगने पर कहती है चार तो खा चुका और कितनी खाएगा। बस इतना याद करते-करते उसे नींद आ गई।

सुबह हो चुकी थी। चिड़ियों की चहचहाहट और पशुओं की हलचल हुई तो राजीव की नींद टूटी। वह गाएं लेकर खेतों की तरफ चल पड़ा। रास्ते में हरिया, रामदीन और कलुआ मिले तो वे भी पशु चोर की ही बातें कर रहे थे। वह सोच में पड़ गया। रोज की तरह उसकी गाएं उसके आगे-आगे चल रही थीं और वह कंधे पर लाठी रखे पीछे-पीछे। उसके पिता बीज और खाद लेने शहर गए हुए थे। राजीव सोच रहा था कि पिताजी भी नहीं हैं और गायों और खेतों की भी रखवाली करनी है। मैं कैसे करूंगा।अपनी गायों को उसने पेड़ से बांधा। लाठी से बंधे रोटी के डिब्बे को नीचे रखा। इतने में हरिया, रामदीन और कलुआ भी आ पहुंचे थे। रामदीन ने कहा, भइया मेरे बापू ने तो मुझे आज दो ही गाएं दी हैं। बाकी घर के आंगन में ही बंधी हैं। इसलिए मैं तो अपनी दोनों गायों को आराम से वापस घर ले जा सकता हूं। इतना कह कर वह पेड़ के नीचे आराम करने लगा। हरिया बोला, मेरे पास दो गाएं और चार भैंसे हैं। मेरे पिताजी ने सभी के सींगों को एक ही रंग से रंग दिया है। अगर चोर मेरे पशुओं को चुरा कर भी ले गए तो फौरन पकड़े जाएंगे। वह भी रामदीन की बगल में बेफ्रिक होकर लेट गया। उनकी बातें सुन कर राजीव ने सोचा, मैं कैसे चोरों से अपने पशुओं को बचाऊं।
इसी बीच रामदीन बोला, अरे आज क्या तरकारी लाया है राजीव। आम का आचार भी दिया होगा तेरी मां ने। चलो सब खाना खाते हैं। राजीव सबके साथ बैठ गया खाना खाने, पर मन में तो चोरों का डर समाया हुआ था। जैसे ही उसने रोटी खानी शुरू की, उसको मां की बात ध्यान आई- चार रोटी वाली बात। बस उसने रोटियों की संख्या के बराबर कपड़े के टुकड़े किए और गायों के गले में बांध आया। उसके साथी कलुआ ने पूछा, ‘यह क्या कर रहा है?’ राजीव ने जवाब दिया, ‘मेरी मां कहती है कि चार रोटी मैं खाता हूं। अब मैंने रोटियों की संख्या के बराबर कपड़े गायों के गले में बांध दिए। मेरे पास चार गाएं हैं। अगर चोर कोई गाय चुरा ले गए, तो मुझे पता चल जाएगा।’ मगर चोर होशियार थे। वे चुपचाप झाड़ियों में छिप कर सबकी बातें सुन रहे थे। उन्होंने सोचा कि बाकी सब तो कुछ न कुछ उपाय करके आए हैं। क्यों न राजीव की एक गाय चुरा ली जाए।
खाना खाकर सभी बच्चे वहीं पेड़ के नीचे लेट गए। चोरों ने मौका देख कर राजीव की एक गाय हांक ली। गाय रंभाने लगी। गाय के रंभाने की आवाज से सभी दोस्तों की नींद टूटी। रामदीन, हरिया और कलुआ ने अपने पशुओं को सुरक्षित देख कर राहत की सांस ली। लेकिन यह क्या, राजीव की एक गाय तो थी ही नहीं। वह घबरा गया। उसने बहुत इधर-उधर खोजा, पर गाय नहीं मिली।

शाम होते ही सब घर लौट आए। राजीव भी भारी मन से घर पहुंचा। उसके पिताजी शहर से आ चुके थे। पशुओं को भीतर लाते हुए वे चौंके, एक गाय कम थी। उन्होंने राजीव से पूछा, तुम कितनी गाएं ले गए थे। अब तो राजीव की सिट्टी-पिट्टी गुम। घबरा कर बोला, ‘गाय चोर ले गए।’ अब राजीव के पिता चोरों को तलाशने निकल पड़े। राजीव के पिता ने गिनती सिखाने का काम उसकी मां को सौंपा। राजीव जब रोटी खाने बैठा तो मां ने एक रोटी कम दी। राजीव का पेट नहीं भरा। उसने मां से एक रोटी और मांगी। मां ने कहा, रोज चार रोटी खाता था, आज मैंने एक कम दी। यानी तुमने तीन रोटी खाई। सुबह तुम चार गाएं लेकर गए, एक गाय घर वापस नहीं आई तो कितनी बची। तीन। मां ने अंगुली के इशारे से समझाया। राजीव को पढ़ाई न करने का अफसोस होने लगा और गाय के चोरी होने से वह बहुत डर भी गया था।

उधर राजीव के पिता गांव वालों को साथ लेकर शहर की तरफ जाने वाली सड़क पर निकले। चोर गाय को हांकते हुए मस्ती से चल रहे थे। गाय के गले में लाल कपड़ा बंधा था। बस, राजीव के पिता श्यामलाल को पक्का भरोसा हो गया कि यही उनकी गाय है। उन्होंने इशारा किया और गांववालों ने चोरों को घेर लिया। अपनी शामत आई देख चोर वहां से भागने लगे। गाय अपने मालिक की आवाज सुन कर रंभाने लगी।सब लोग गाय लेकर घर पहुंचे। श्यामलाल ने बताया कि राजीव ने जो कपड़े का लाल टुकड़ा गाय के गले में बांधा था, उसी के चलते वह मिल पाई। राजीव गाय को देख कर खुशी के मारे उससे लिपट गया और रोने लगा। उसने पिता से कहा, ‘अब मैं कभी गिनती नहीं भूलूंगा। कल से स्कूल जाऊंगा।’ ०

 

 

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