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बाल कहानी- पंख

पीकू मोर बहुत बुद्धिमान और मेहनती था। वह हमेशा दूसरों का भला सोचता था और हर किसी की मदद के लिए तैयार रहता था।

Author April 30, 2017 5:04 AM
मोर।

 रेनू सैनी

अंबर वन में सभी पशु-पक्षी मिल जुलकर रहते थे। वहां पर सभी ने पीकू मोर को जंगल का राजा बनाया हुआ था। पीकू मोर बहुत बुद्धिमान और मेहनती था। वह हमेशा दूसरों का भला सोचता था और हर किसी की मदद के लिए तैयार रहता था। पूरे जंगल के प्राणियों को पीकू की यह आदत बहुत पसंद थी। अंबर वन में सुख-सुविधाओं की कमी न थी लेकिन आज के समय के मुताबिक वहां पर शिक्षा प्रणाली बहुत कमजोर थी । पशु-पक्षी अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे। स्कूल खाली पड़े रहते थे और शिक्षक केवल दो चार बच्चों को ही पढ़ाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझते थे। शिक्षा के कारण लोगों में जागरूकता की कमी थी, वे अधंविश्वासी थे इसलिए स्वच्छता और सकारात्मक विचारों का महत्त्व भी नहीं जानते थे। पीकू मोर ने मनोविज्ञान में पीएच.डी. की हुई थी, इसलिए वह जीव-जंतुओं के मनोविज्ञान को समझ कर उनके साथ वैसा ही व्यवहार करता था। यही कारण था कि सभी पशु-पक्षियों को पीकू बेहद प्रिय था।

आसमान में काले-काले मेघ छाए हुए थे, बिजली कड़क रही थी। जब आसमान में बिजली चमकती तो अंबर वन में उसकी चमक पड़ती। पीकू वर्षा ऋतु में अपने पूरे पंख खोलकर नाचता था और गुनगुनाता था। वह नाचने के लिए स्वयं को तैयार कर रहा था। तभी तेज बिजली आवाज के साथ चमकी और मीनू हिरनी ने डर कर अपने बच्चे पिंटू को गले से लगा लिया। वह बोली-लगता है, हमारे पूर्वज नाराज हो गए हैं जो वे ऊपर आसमान से चमक कर अपना गुस्सा दिखा रहे हैं। मीनू हिरनी की अंधविश्वासी बात सुनकर पीकू दंग रह गया। कुछ और आगे बढ़ा तो देखा कि वहां पर कल्लू कौव्वा नीली कौवी से कह रहा था-कल ही टीलू लोमड़ से एक धागा बनवाकर लाऊंगा। उस धागे से आसमान में चमक रही रोशनी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। अंबर वन के पशु-पक्षियों की ऐसी बातों ने पीकू को बहुत दुखी कर दिया। उसे इस बात का अहसास हो गया कि इस जंगल के प्राणियों को जल्दी से जल्दी जागरूक और शिक्षित करने की आवश्यकता है। तभी झमाझम बारिश होने लगी। पीकू के आकर्षक और सुंदर पंख स्वयं खुलते चले गए और वह नाचने लगा। नाचते-नाचते उसने संकल्प ले लिया कि वह अपने वन को शिक्षा की रोशनी से नहलाएगा, जिससे कि अंबर वन आदर्श वन कहलाएगा।

सुबह बारिश की बंूदों से पत्ते धुल गए थे। हर ओर सूरज की किरणों से प्रकृति हरी-भरी, धुली-धुली और नई सी नजर आ रही थी। पीकू वन का जायजा लेने के लिए बाहर आया। उसे वहां पर अपना गिरा एक पंख नजर आया। वह पंख नृत्य करने के कारण झड़ गया था। पीकू ने अपने पंख को उठाया। वह उसे ध्यान से घुमा-फिरा कर देखता रहा। अचानक उसकी आंखों में चमक आ गई। लोगों को शिक्षा का संदेश देने के लिए उसके पास एक बहुत अच्छी योजना आ गई थी। पीकू ने अन्य मोर-मोरनियों को बुलाया और सबसे अपने एक-एक पंख देने के लिए कहा। सबने खुशी-खुशी अपने पंख पीकू को दे दिए। झीनी मोरनी बोली-महाराज, इतने सारे मोर-पंखों का आप क्या करेंगे? पीकू बोला-पंख को हम अंग्रेजी में कैसे लिखेंगे? झीनी बोली-पंख की स्पेलिंग होगी पी ए एन के एच। शाबास झीनी। पीकू बोला। स्पेलिंग तुमने बता दी। अब इसकी पूरी फॉर्म मैं बताता हूं- पढ़ना अब नहीं कठिन है। तुम सभी को यह ज्ञात है कि अंबर वन में जीव-जंतु पढ़े-लिखे नहीं हैं। उन्हें पढ़ाई कठिन लगती है। इसी कारण वे अंधविश्वासी हैं और जागरूकता से दूर हैं। हम यह पंख अंबर वन के हर पशु-पक्षी को बांट कर कहेंगे कि इसे वे अपने पास रखें। पंख का तो अर्थ ही है कि पढ़ना अब नहीं कठिन है । जब यह पंख उनके पास रहेगा तो उनके दिमाग में यह धारणा प्रबल होती जाएगी कि इस पंख के कारण वह सरलता से पढ़-लिख पाएंगे। झीनी बोली-पर कई पशु-पक्षी यह पूछेंगे कि ‘पंख’ का भला इस बात से क्या वास्ता कि पढ़ना अब नहीं कठिन है।

पीकू बोला-उस प्रश्न का हल मैंने तुम्हारे प्रश्न के साथ ही सोच लिया था। हमारे अंबर वन में सोने पर सुहागा यह है कि मोर जाति यहां सबसे अधिक पढ़ी-लिखी है। यह देख कर वह पंख को इस बात से जोड़ पाएंगे और पढ़ने के लिए उनके कदम खुद ब खुद स्कूलों की ओर मुड़ जाएंगे । चिनी मोरनी बीए में पढ़ रही थी। वह बोली-महाराज, अगर हम ‘पंख’ नाम से एक पत्रिका निकालें और उसे स्कूलों के साथ-साथ हर जीव-जंतु को बांटे तो इससे शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। हम उसे सरल भाषा में आकर्षक चित्रों के साथ बनाएंगे और शीर्षक ‘पंख’ के साथ नीचे लिखा देंगे कि ‘पढ़ना अब नहीं कठिन है।’यह सुनकर पीकू वाह-वाह कर उठा। वह बोला-वाकई मोर जाति बल्कि हमारी मोरिनयां बहुत समझदार हैं। मुझे बेहद गर्व है तुम सब पर। इसी बात पर आज शाम की पार्टी करेंगे और सभी जीव-जंतुओं को बुलाकर पंख देंगे और ‘पंख’ पत्रिका का आगाज करेंगे। यह सुनकर सभी खुशी से उछल पड़े। अब पीकू मोर को अहसास हो गया था कि ‘पंख’ के माध्यम से हर प्राणी शिक्षा की जोत जलाएगा और कहीं न अशिक्षा का अंधकार कायम रह पाएगा। १

 

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