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कविता- खट-पट स्कूटर

जनसत्ता बाल कविता
Author August 13, 2017 02:37 am
प्रतीकात्मक चित्र।

कविता- खट-पट स्कूटर

शिवचरण सरोहा

भट भुट भट भुट
खट खुट खट खुट
पट पट पट पट
खट खट खट खट
तेल खाता धुआं उड़ाता
रफ्तार मंदी शोर मचाता
दौड़े कम हांफे ज्यादा
समझे राजा पर है प्यादा
बिना बात करे टर टर
बूढ़ा हो गया स्कू
शब्द-भेद

कुछ शब्द बोलने में एक जैसे जान पड़ते हैं, इसलिए उन्हें लिखते समय अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। ऐसी गड़बड़ी से बचने के लिए आइए उनके अर्थ समझते हुए उनका अंतर समझते हैं।

ग्रहवह पिंड, जो सूर्य की परिक्रमा करता हो। जैसे पृथ्वी, बुध शुक्र आदि। ग्रह नौ हैं। इसे लेकर कई तरह के मुहावरे हैं, जैसे बुरे ग्रह, ग्रह दशा खराब होना आदि।

दिमागी कसरत

(1)
दो छोटे मुंह
और एक बड़ा
आधा लील ले आदमी
खड़ा खड़ा

(2)
बूझो भइया एक पहेली
जब काटो तब नई नवेली

(3)
एक ऐसी वस्पति का नाम बताओ,
जिसमें न कोई पत्ता होता हो
और न उसकी कोई जड़ होती हो,
बस पौधों का रस पीती हो।
(4)

1- पतलून, 2- पेंसिल, 3- अमरबेल, 4- बछेंद्री पाल

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