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बाल कहानी- चुन्नू और गन्नू

चुन्नू खरगोश की यह बात सुन गन्नू चूहा मन मसोस कर रहा जाता। कभी-कभी चुन्नू खरगोश उसे भूरिया-भूरिया कह कर भी चिढ़ाता।

Author Published on: June 25, 2017 7:03 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

रोचिका शर्मा

जं गल में सभी जानवर हिलमिल कर रहते थे। रोज सुबह बोलू मुर्गा कुकडू-कूं की बांग लगा कर सारे जानवरों को जगा देता। उसकी बांग के साथ ही सभी जानवर सैर सपाटा करने और भोजन की तलाश में निकल पड़ते। वे सबसे पहले पहाड़ी झरने के पास जा कर पानी पीते और फिर हरी-भरी पत्तियां और घास चरने लगते। जंबो हाथी धम्म-धम्म कर अपनी मस्त चाल में चल कर आता और पेड़ों की डालियों को अपनी सूंड़ से तोड़ मुंह में डाल लेता। रानी शेरनी भी शिकार को निकल पड़ती ताकि वह अपने शावकों और शेर को भोजन लाकर दे और उनका पेट भर सके। वहीं चुन्नू खरगोश इधर-उधर कुलाचें मारता हुआ और जमीन से गाजरें उखाड़ कर खाता हुआ नजर आता।
उधर गन्नू चूहा छुप-छुप कर इधर-उधर ताकते हुए और डरते हुए बिल से बाहर निकलता कि कहीं किट्टी बिल्ली उसे दबोच न ले। वह भी आस-पास के खेतों और खलिहानों में जा कर किसानों का अनाज चोरी छुपे खा कर अपना पेट भर लेता।
चुन्नू खरगोश को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था। वह गन्नू चूहे को बहुत चिढ़ाता और कहता-देखो देखो, मेरे पूरे शरीर पर सफेद रुई से बाल कितने सुंदर दिखते हैं और जरा छू कर देखो मेरे बाल कितने नरम हैं। सभी बच्चे मुझ से खेलना भी पसंद करते हैं और तुम! अपने आप को देखो कितने छोटे से, और इतनी लंबी पूंछ और ऊपर से तुम्हारा काला-भूरा रंग ! छी,तुम कितने भद्दे दिखते हो।

चुन्नू खरगोश की यह बात सुन गन्नू चूहा मन मसोस कर रहा जाता। कभी-कभी चुन्नू खरगोश उसे भूरिया-भूरिया कह कर भी चिढ़ाता। पर गन्नू चूहा कुछ न कर पाता और बहुत उदास हो जाता। उसे उदास देख खरगोश बहुत ठहाके लगा कर हंसता।
जब जंगल के अन्य जानवरों को चुन्नू खरगोश की हरकतों के बारे में मालूम हुआ उन्हें बहुत बुरा लगा। उन्होंने सभा बुलाई और तय किया कि चुन्नू खरगोश को समझाना चाहिए। सभी मिल कर चुन्नू के पास गए, सबसे पहले रानी शेरनी ने भारी आवाज में कहा-देखो चुन्नू हमें मालूम हुआ है कि तुम गन्नू को बहुत चिढ़ाते हो उसे भूरिया-भूरिया नाम से पुकारते हो यह ठीक नहीं।
जंबो हाथी अपनी सूंड़ को ऊंची करते हुए बोला देखो चुन्नू यह शरीर सभी को भगवान ने दिया है, हमें उसका मान करना चाहिए न कि उसमें कमियां निकाल दूसरों को चिढ़ाना चाहिए ।

तभी बोलू मुर्गा बोला और हां, यह रंग भी हर प्राणी को भगवान की ही देन है। हमें उसकी खातिर किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। आज हम तुमको समझाने आए हैं और आगे से आशा करते हैं कि तुम गन्नू को परेशान नहीं करोगे। चुन्नू सब की बातें गौर से सुन रहा था और जब सब चुप हो गए तो जोर से खीखीखी-खीखीखी कर हंसने लगा। और उन्हें नजरअंदाज करते हुए वहां से चला गया। सभी जानवर चुन्नू की इस बात से बड़े नाराज हुए।

तभी एक दिन जब रोज की तरह सब अपने अपने खाने-चरने में व्यस्त थे वहां एक शिकारी आया। चुन्नू रोज की तरह कुलाचें मारता यहां-वहां भाग रहा था, शिकारी को चुन्नू के सफेद नरम बाल बड़े ही अच्छे लगे और उसने अपना जाल बिछा दिया, उस ने मन ही मन सोचा इस को मार कर मैं इस की खाल बेच दूंगा ताकि फर जैकेट, बैग बनाने वाले मुझे अच्छा पैसा देंगे।
चुन्नू जाल में फंस गया और शिकारी उसे वहां से ले गया। किसी को कानोंकान भी यह खबर नहीं थी कि चुन्नू गायब हो गया है।
शिकारी मन ही मन सोच रहा था और बहुत प्रसन्न भी था कि वह चुन्नू के सफेद नर्म बालों वाला चमड़ा शहर जा कर बेचेगा तो उसे अच्छी रकम मिल जाएगी।

शिकारी थक गया था सो जाल को अपने पास रख एक पेड़ के नीचे औंधी करवट सो गया और उसकी आंख लग गई। चुन्नू खरगोश जाल में फंसा छटपटा रहा था। तभी वहां से गन्नू अपनी पेट भराई कर लौट रहा था, उसने चुन्नू को जाल में छटपटाते हुए देखा और वह उसके पास जा कर इशारे से पूछने लगा-क्या हुआ, यहां कैसे?’ चुन्नू की सूरत बड़ी ही रुआंसी सी बनी हुई थी, गन्नू चूहे ने देखा कि शिकारी तो खर्राटे मार कर सो रहा है उसके खुले मुंह से आवाज आ रही थी खर्रर-खट खर्र्ररर खट। तभी गन्नू ने अपने पैने दांतों से कुट-कुट कर सारा जाल काट डाला और चुन्नू को आजाद करवा दिया। अब चुन्नू ने अपनी पीठ पर गन्नू को बैठाया और दोनों फिर से कुलांचें भरते हुए जंगल में जानवरों के पास गए। चुन्नू खरगोश ने अपने बुरे व्यवहार के लिए सब से माफी मांगी। वह अपने कानों को खड़े कर बोला- आगे से वह किसी के साथ भी अभद्र व्यवहार नहीं करेगा और उसके बाद से चुन्नू और गन्नू पक्के दोस्त बन गए। अब जब बोलू मुर्गा बांग लगाता, चुन्नू जल्दी से उठ गन्नू के बिल के बाहर पहुंच जाता और उसे अपनी पीठ पर बैठा दोनों सैर सपाटे पर निकल पड़ते। १

 

 
गीत

 

चींटी का उपकार

मुरलीधर वैष्णव

आसमान से आग बरसती
वन में हाहाकार मचा
शेर सियार हरिण और भालू
तेज तपन से कौन बचा
एक पेड़ की छांव में बैठे
बैर भाव आपस का भूले
सबके प्राण गले में अटके
बिन पानी अब सांस ही फूले
चींटियां बिल से निकलंी तब
नाच कूद सहगान किया
मत घबराना वन के साथी
बारिश का एलान किया
शेर हुआ खुश ली जम्हाई
हाथी ने सूंड़-सलाम किया
हरिण चौकड़ी भरने दौड़ा
भालू ने करताल किया
तभी उमड़ कर बादल आए
गरजे बरसे चारों ओर
प्यास बुझाने तब सब भागे
नाच उठे जंगल में मोर
चींटी बिल पानी में डूबे
लगी मचाने वह भी शोर
पत्तों की नावें तब आर्इं
ले चली उन्हें पेड़ों की ओर

 

 

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