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कहानी: चिक्की और नीली

चिक्की नाम की चिड़िया हिंद वन में रहती थी। वह बहुत ही मिलनसार, नेक और मददगार थी।

Author January 15, 2017 3:12 AM
चिड़िया।

चिक्की नाम की चिड़िया हिंद वन में रहती थी। वह बहुत ही मिलनसार, नेक और मददगार थी। पूरा हिंद वन चिक्की को बहुत पसंद करता था। चिक्की हमेशा सबकी मदद के लिए तैयार रहती थी। वह दिन भर अपने खाने की तलाश में निकल जाती और दिन ढलने पर अपने घर लौट आती। कुछ दिनों से वह खाने की तलाश में हिंद वन से काफी दूर सिंद वन जा रही थी। एक दिन जब वह लौट रही थी तो उसने देखा कि एक मछुआरा जाल फैलाए नील सरोवर में रह रही मछलियों को अपने जाल में भर रहा था और मछलियां तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही थीं। इस दृश्य ने उसको बेहद भावुक कर दिया। कुछ ही देर में उसकी नजर कोने में पड़ी एक मछली पर पड़ी जो दम तोड़ने ही वाली थी। चिक्की ने फौरन उस मछली को अपनी चोंच से सरोवर में वापस गिरा दिया । वापस पानी में गिरते ही उस मछली की जान में जान आई और वह पानी की गहराई में चली गई । इसके बाद चिक्की वापस अपने घर चली गई।

एक दिन जब वह नील सरोवर की ओर आई तो उस मछली ने उसे आवाज देकर बुलाया। चिक्की नीचे उतर कर आई तो वह मछली पानी से मुंह निकाल कर बोली, ‘बहन, उस दिन तुमने मेरी जान बचाकर मुझे अपना ऋणी बना लिया है। मेरा नाम नीली है।’ नीली मछली की बात सुनकर चिक्की बोली, ‘वह तो मेरा फर्ज था। जीवन में हम सब एक-दूसरे के काम आते रहें, ऐसे ही तो जीवन आगे बढ़ता है।’ इसके बाद नीली ने उससे कहा कि जब भी कभी उसे उसकी मदद की जरूरत हो तो वह निस्संकोच उसके पास चली आए। इसके बाद नीली ने उसकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया। चिक्की ने नीली की दोस्ती का हाथ थाम लिया और वहां से उड़ चली। रास्ते में उसे वही मछुआरा मिला जो नीली की सहेलियों को पकड़ कर ले गया था।

इस समय वह खतरे में था। एक शेर दहाड़ कर मछुआरे को अपना शिकार बनाने ही वाला था। मछुआरे की जान खतरे में देख कर चिक्की ने अपनी आवाज में अन्य पक्षियों को बुलाया। कुछ ही देर में चिक्की की अन्य सखियां और पंछी वहां एकत्रित हो गए ओर चहुं ओर चीं-चीं का शोर गूंजने लगा। इतने सारे पक्षियों को चीं-चीं करते देख शेर घबरा गया और उसका ध्यान बंट गया। इसी बीच मछुआरे को मौका मिल गया और वह सिर पर पैर रखकर अपनी जान बचाकर भाग गया। शिकारी यह समझ गया था कि पक्षियों ने ही उसकी सहायता करके आज उसकी जान बचाई है। कुछ दिन बाद जब उसकी चिक्की से मुलाकात हुई तो उसने चिक्की को अपनी जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया। मछुआरे की बात सुनकर चिक्की ने कहा कि वह नील सरोवर की मछलियों को न पकड़े। चिक्की की बात पर मछुआरा बोला, ‘मछलियां पकड़ कर बेचना मेरा पेशा है। लेकिन जबसे तुमने मेरी मदद की है तब से मैं यह जान गया हूं कि हर जीव के प्राण एक से होते हैं। उन्हें भी उतना ही दर्द होता है जितना मनुष्यों को। आज से मैं किसी का भी शिकार नहीं करूंगा और पूरी तरह शाकाहारी बनकर मेहनत से अपना काम करूंगा।’ चिक्की उसकी बात सुनकर बहुत खुश हुई और उसे नीली के पास ले गई। सारी बातें जानकर जहां नीली को इस बात की खुशी हुई कि शिकारी अब उनका दोस्त बन गया है। वहीं उसे यह जानकर दुख भी हुआ कि उसने मछलियों के व्यवसाय को बंद करने का फैसला किया है।

नीली मछली सोचती रही कि वह कैसे मछुआरे की मदद कर सकती है। फिर कुछ सोचकर वह शिकारी व चिक्की को वहीं रहने के लिए कह कर तालाब में डुबकी मार कर अंदर चली गई। कुछ देर बाद वह वहां से बाहर आई तो उसके पास कुछ मोती थे। वह उन मोतियों को देते हुए मछुआरे से बोली, ‘यह कुछ सच्चे मोती हैं। इनकी सहायता से तुम अपना नया काम-धंधा खोल सकते हो।’ सच्चे मोती पाकर मछुआरा खुश हो गया और वह बोला कि वह अपनी दोनों दोस्तों से मिलने आता रहेगा। इस प्रकार दिन-प्रतिदिन चिक्की और नीली की दोस्ती गहरी होती गई। एक बार हिंद वन में सूखा पड़ गया। सभी पशु-पक्षी प्यास से मरने लगे। ऐसे में वह नीली के पास गई। नीली ने उसे सांत्वना देते हुए कहा कि वह परेशान न हो। उसके सरोवर में बहुत पानी है और वह उसके वन के सभी पशु-पक्षियों के काम आ सकता है। चंकी बंदर नारियल के खोल में पानी भरकर लाने लगा। इस प्रकार हिंद वन में पशु-पक्षी प्यासे मरने से बच गए। एक दिन जब हिंद वन के अन्य जानवर नील सरोवर में पानी पी रहे थे तो चिक्की एक पेड़ की डाल पर बैठी थी। तभी हवा के झोंके से एक आम टूट कर चिक्की पर गिरा और चिक्की संभलने से पहले सरोवर में जा गिरी। उसने बहुत हाथ-पैर मारे किंतु वह डूबती ही जा रही थी।

यह देखकर सभी शोर मचाने लगे। नीली ने ऐसे में अपनी जान की परवाह न कर तेजी से दौड़कर चिक्की को अपनी पीठ पर बिठाया और पानी की ऊपरी सतह पर आकर उसे किनारे की ओर लाने लगी । उसे किनारे पर छोड़ने की कोशिश में वह स्वयं पानी से बाहर आ गई और बुरी तरह तड़पने लगी। चिक्की की हालत भी खराब थी। अन्य पशु-पक्षियों ने मिल कर नीली को वापस सरोवर में डाल दिया। कुछ समय बाद दोनों की हालत में सुधार आ गया। इस तरह हिंद वन की चिक्की चिड़िया और सिंद वन की नीली मछली की दोस्ती सबके सामने एक मिसाल के रूप में उभरी। ०

 

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