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कविता- टिली लिली

शब्द-भेद

Author Updated: September 10, 2017 2:35 AM
प्रतीकात्मक चित्र।

नागेश पांडेय ेसंजय’

टिली लिली

देर लगी चाची को टिफिन बनाने में,

लेट हो गए चाचा आफिस जाने में।
नहीं हाजिरी लगी लौट कर घर आए,
बेमन लौटे और बहुत ही पछताए।
किसकी किसको सजा मिली,
टिली लिली।

लेट हुआ राजू स्कूल पहुंचने में,
था माहिर वह नए बहाने रचने में।
मगर बहाने नहीं एक भी चल पाए,
खिंचे कान टीचर जी उस पर गुर्राए।
लेट हुआ तो सजा मिली,
टिली लिली।

लेट हुर्इं कल बुआ हमारी, ट्रेन से,
ट्रेन लेट नौ घंटे किसके ब्रेन से?
जन्मदिवस की दावत की मस्ती छूटी,
बुआ लेट आर्इं नन्हीं गुड़िया रूठी।
बिन गलती के सजा मिली,
टिली लिली।

शब्द-भेद

कुछ शब्द बोलने में एक जैसे जान पड़ते हैं, इसलिए उन्हें लिखते समय अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। ऐसी गड़बड़ी से बचने के लिए आइए उनके अर्थ समझते हुए उनका अंतर समझते हैं।

पलाश / पलास

एक प्रसिद्ध पौधा, जिसे टेसू और ढाक भी कहते हैं, पलाश कहलाता है। जबकि लोहे से बने एक औजार को पलास कहते हैं

(1)
सारे जग की करूं मैं सैर
धरती पे रखता नहीं पैर
रात अंधेरी मेरे बगैर
बताओ क्या है मेरा नाम?

(2)
दिन में सोए
रात में रोए
जितना रोए
उतना खोए

(3)
रंग है मेरा काला
उजाले में दिखती हूं
अंधेरे में छिप जाती हू

 

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