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भोर का तारा

तारे को उसकी मां ने यह बात बताई। वह खुशी के मारे उछल पड़ा। वह रंग-बिरंगे पंख लगा कर, सज संवर कर सौतसैकी के पास गया।

Author January 29, 2017 2:09 AM
सूरज। (रॉयटर्स फोटो)

शिखर चंद जैन

सुबह होने वाली थी। नए दिन का सूरज पहाड़ों के पीछे से उदय होने की तैयारी कर रहा था। तभी भोर के तारे ने अपने पिता सूरज से कहा, ‘मैं आजकल बहुत अकेलापन महसूस करने लगा हूं। मैं शादी करना चाहता हूं।’ सूरज ने प्यार से पूछा, ‘क्या तुमने लड़की पसंद कर ली है? तारे ने कहा, ‘हां, मैंने पृथ्वी की झांकते समय एक बस्ती में सुंदर लड़की को देखा है। उसका नाम सौतसेकी है। वह मुझे पसंद है।’ सूरज नाराज हो गया। उसने कहा,-तुम किसी पृथ्वीवासी से शादी नहीं करोगे। तुम्हें आकाश में हमारे राज्य से ही अपनी दुल्हन पसंद करनी होगी।’ पर भोर के तारे ने जिद पकड़ ली। वह उदास और गुमसुम रहने लगा। उसकी उदासी उसकी मां चांद से देखी नहीं गई। उसने अपने पति को समझाया कि वह जिद छोड़ दें। हमें अपने लाडले की खुशी के बारे में सोचना चाहिए।  समझाने बुझाने पर सूरज मान गया। पर उसने एक शर्त रखी और कहा-ठीक है, पर शादी के बाद सौतसैकी कभी पृथ्वी की ओर झांक कर अपने परिवार के सदस्यों को नहीं देखेगी। इसी शर्त पर मैं विवाह की अनुमति दे रहा हूं।

तारे को उसकी मां ने यह बात बताई। वह खुशी के मारे उछल पड़ा। वह रंग-बिरंगे पंख लगा कर, सज संवर कर सौतसैकी के पास गया। उसने उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, तो इतने सजीले युवक को देख कर सौतसैकी मना नहीं कर सकी। तारे के े पिता की शर्त के बारे में भी उसे बता दिया। सौतसैकी ने शर्त मान ली। सौतसैकी तारे के साथ आसमान में चली गई। दोनों की धूमधाम से शादी हो गई। एक साल बाद उनके पुत्र हुआ। सौतसैकी ने उसका नाम ‘लिटिल स्टार’ रखा। एक दिन सौतसैकी अपनी सास के साथ बैठकर अपने पुत्र को दूध पिला रही थी। तभी उसने कमरे में बीचोबीच रखे एक बर्तन की ओर इशारा करते हुए पूछा-मां, इस बर्तन में रखा पानी हमेशा उबलता ही क्यों रहता है, जबकि इसके बीच या आसपास आग का नामोनिशान तक नहीं? चंदा ने कहा-बेटी, यह ऊर्जा का जादुई स्रोत है। तुम कभी इस बर्तन को हटाने की भूल मत कर बैठना। सौतसैकी ने कहा-जी। पर, उसकी उत्सुकता बढ़ती गई। एक दिन सब सो रहे थे तो सौतसेकी ने बर्तन के भीतर झांक कर देखा। वह चकित रह गई। बर्तन के बीच एक छेद था, जिसमें से धरती दिख रही थी। उसके मायके का तंबू भी दिख रहा था। मायके का तंबू देखते ही सौतसैकी अपने माता-पिता से मिलने के लिए बेचैन हो उठी।

अगले दिन उसने अपने पति से कहा-सिर्फ एक बार…अपने माता-पिता से मिल आने दो।
तारे ने कहा-क्या तुम्हें यहां कोई तकलीफ है?
-तकलीफ की बात नहीं…बस मैं एक बार उन्हें देखना चाहती हूं…।

तारे ने समझाया कि इसके लिए उसे अपने पिता से बात करनी पड़ेगी। पूछने पर सूरज इतना गुस्सा हुआ कि उसने सौतसैकी और उसके बच्चे को उसी वक्त एक चमड़े की रस्सी के सहारे उसे छेद से नीचे उतार दिया। उसने सौतसैकी को दोबारा कभी भोर के तार से न मिलने की चेतावनी दी। नीचे उतरते समय लिटिल स्टार का चेहरा चमड़े की रस्सी से घिस कर कट गया। उदास सौतसैकी अपने माता-पिता के पास पहुंची। उन्होंने उसे शांत कराया और लिटिल स्टार का नया नाम रख दिया-पोइया स्कारफेस। स्कारफेस नाम उसके चेहरे पर हुए धब्बे के कारण रखा गया। कुछ ही सालों में पोइया एक बहादुर और कुशल तीरंदाज युवक बन गया। उसकी मां सौतसैकी का निधन हो गया। पोइया को पड़ोसी गांव के मुखिया की लड़की से प्रेम हो गया। लड़की पोइया की बहादुरी से बहुत प्रभावित थी, पर उसके चेहरे का धब्बा देखकर उदास हो जाती थी। उसने पोइया से विवाह करने से इनकार कर दिया।
उदास पोइया ने अपने दादा सूरज से मिलने का निश्चय किया। वह एक बेहद ऊंचे पहाड़ पर चढ़ गया। पहाड़ की चोटी पर चढ़कर पोइया जोर-जोर से चिल्लाने लगा-दादाजी, सूरज दादाजी। प्लीज मेरे चेहरे के इस धब्बे को मिटा दीजिए मैं स्कारफेस के नाम से पुकारा जाना कतई पसंद नहीं करता।

तीन दिन बाद उसे एक दिव्य रोशनी दिखाई दी। उसी रोशनी के सहारे पोइया आसमान पहुंच गया। ऊपर पहुंचते ही उसे अपने पिता नजर आए। पोइया उनकी तरफ बढ़ने लगा। सात विशालकाय बाज कहीं से आ गए और उन्होंने तारे पर हमला कर दिया। भोर का तारा मदद के लिए पुकारने लगा। कुशल तीरंदाज पोइया ने एक-एक कर सात बाण छोड़े और सातों बाजों को धराशायी कर दिया। भोर का तारे ने अपने पुत्र को पहचान लिया और उसे गले गले लगा लिया और बोला-मेरे बहादुर बेटे, मुझे तुम पर गर्व है। चलो मैं तुम्हें तुम्हारे दादाजी के पास ले चलता हूं, वे तुम्हें देखकर बहुत खुश होंगे। सचमुच उसे देखकर सूरज बहुत खुश हुआ। उसने अपनी दिव्य शक्ति से पोइया के चेहरे का धब्बा मिटा दिया। फिर उसे एक जादुई बांसुरी देते हुए कहा-बेटे, तुम जिस किसी को इसकी धुन सुनाओगे, वह तुम्हारे प्रति सम्मोहित हो जाएगा। और हां.. तुम चाहो तो यहां हमारे साथ आसमान में भी रह सकते हो।
पोइया धरती पर आया। उसने मुखिया की लड़की के घर के सामने जाकर बांसुरी बजाई। मुखिया की बेटी बांसुरी के जादुई स्वर से खिंची चली आई। उसने लिटिल स्टार के चेहरे से धब्बा गायब देखा तो और भी खुश हो गई। उसने लिटिल स्टार से विवाह करना मंजूर कर लिया। दोनों ने विवाह कर लिया। लिटिल स्टार अपनी पत्नी को लेकर आसमान में उड़ चला। सूरज और चंदा अपने पोते और उसकी बहू को देख कर बहुत खुश हुए। सब खुशी-खुशी आसमान में रहने लगे।

 

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