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सम्मान- नोबेल और काजुओ इशिगुरो

काजुओ ने केंट विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक और ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय से रचनात्मक लेखन में परास्नातक किया। परास्नातक के दौरान प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक सर मैलकम स्टेनली ब्रेडबरी और इयान रसेल मैकेवेन उनके मित्र-सहपाठी रहे।
Author October 13, 2017 21:41 pm
नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित काजुओ इशिगुरो।
आनंद कुमार शुक्ल
इस बार स्वीडिश नोबेल समिति ने ब्रिटिश-जापानी लेखक काजुओ इशिगुरो को इस साल का साहित्य में नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की। सम्मान की घोषणा करते हुए नोबेल समिति ने काजुओ के लेखन में उन्नीसवीं सदी के प्रारंभ की प्रसिद्ध अंग्रेजी महिला उपन्यासकार जेन आस्टेन और बीसवीं सदी के प्रारंभ के प्रसिद्ध यहूदी उपन्यासकार फ्रैंज काफ्का का मिश्रण बताया। जिसमें थोड़ा बहुत अक्स फ्रांसीसी उपन्यासकार मार्सेल प्रुस्त का भी मिला हुआ है। जेन आस्टेन स्त्री-पुरुष के प्रेम संबंधों में भावुकता के साथ मधुर व्यंग्य और फ्रैंज काफ्का यथार्थ और फैंटेसी को जोड़ते हुए तीव्र संवेदनशीलता और हास्य के साथ गंभीरता तथा अलग-अलग पात्रों के माध्यम से नौकरशाही के चित्रण के लिए जाने जाते हैं।  अपने पात्रों के संदर्भ में काजुओ कहते हैं कि उनकी रचनाओं में निजी यादों से जूझ रहे ऐसे व्यक्तियों की कहानियां हैं जिन्हें पता भी नहीं होता कि अतीत को छिपाने के लिए उन्होंने कितना बड़ा संकल्प लिया था। स्वीडिश अकादमी की स्थाई सचिव सारा डेनिश ने काजुओ को महान अखंडता का लेखक बताया, ऐसा लेखक जिसने अपने उपन्यासों के द्वारा अत्यधिक भावात्मक तरीके से संसार के साथ हमारे लगाव की झूठी संवेदना के नीचे की खाई को उजागर किया है।
काजुओ का जन्म 1954 ई. में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान नष्ट हो चुके जापान के शहर नागसाकी में हुआ। पिता शिजुओ इशिगुरो को समुद्री अनुसंधान के सिलसिले में पांच साल के काजुओ के साथ इंग्लैंड जाना पड़ा। जिसकी झलक उनके पहले उपन्यास ‘पेल व्यू आॅफ हिल्स’ (1982) में देखने को मिलती है, जिसमें एक अधेड़ जापानी महिला इत्सुको और उसकी बेटी निकी की कहानी है। काजुओ की ‘पेल व्यू आॅफ हिल्स’ रचनात्मक लेखन में उनकी परास्नातक की थीसिस है जिस पर उन्हें रायल सोसाइटी आॅफ लिटरेचर की तरफ से प्रतिष्ठित विनीफ्रेड हाल्टबाइ स्मृति सम्मान भी मिला। इसे ब्रिटिश प्रकाशन फेबर एंड फेबर से प्रकाशित किया। फेबर एंड फेबर से कई नोबेल पुरस्कार प्राप्त लेखक जुड़े रहे और इसी प्रकाशन से काजुओ के अब तक के सभी सातों उपन्यास प्रकाशित भी हुए, जो उनकी लेखन कला की उत्कृष्टता को दर्शाते हैं। अक्सर प्रथम पुरुष में लिखते हुए काजुओ अपने उपन्यासों के द्वारा अविश्वसनीय सत्य का धीरे-धीरे उद्घाटन करते हैं, जो पाठकों को बांधे रखता है। अपने बचपन के दिनों में वे सर आर्थर कानन डायल के काल्पनिक चरित्र शेरलॉक होम्स से प्रेरित थे। बाम्ब पत्रिका के संपादक ग्राहम स्विफ्ट को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने लेखन शैली में दो रूसी साहित्यकार आंतोन चेखव और फ्योदोर दोस्तोवस्की की कसावट पूर्ण शब्द संयोजना से प्रभावित होना बताया है।
काजुओ ने केंट विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक और ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय से रचनात्मक लेखन में परास्नातक किया। परास्नातक के दौरान प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक सर मैलकम स्टेनली ब्रेडबरी और इयान रसेल मैकेवेन उनके मित्र-सहपाठी रहे। काजुओ ने अपने प्रारंभिक दोनों उपन्यासों की पृष्ठभूमि जापानी रखी। उनका द्वितीय उपन्यास ‘एन आर्टिस्ट आॅफ द फेलोटिंग वर्ल्ड’ (1986) जिस पर उन्हें कोस्टा बुक अवार्ड भी मिला, जापानी समाज में विवाह को लेकर स्त्रियों की बदलती भूमिका पर केंद्रित है। हालांकि सन् 1989 ई. तक वे जापान कभी नहीं गए, फिर भी उन्होंने अपने ऊपर दो प्रसिद्ध जापानी फिल्मकारों यशुजिरो ओजू और मिकिओ नरूसे का प्रभाव स्वीकार किया है।  काजुओ को अपने प्रत्येक उपन्यास पर कोई न कोई सम्मान जरूर मिला है, पर विशेष रूप से उन्हें ‘द रिमेंस आॅफ द डे’ (1989) के लिए जाना जाता है, जिस पर उन्हें उसी साल मैन बुकर पुरस्कार भी मिला था। इसकी कथा को लेखक सलमान रुश्दी ने सुंदर होने के साथ ही साथ क्रूर भी कहा है। इसमें एक बटलर (नौकर) स्टीवंस की कहानी है जो अपनी पूर्व सहकर्मी मिस केंटन के प्रति आकर्षित था। पर उसने प्रेम के बदले अपने मालिक के प्रति पेशेवर प्रतिबद्धता को ज्यादा महत्व दिया। उपन्यास तत्कालीन सामाजिक पहलुओं, जिसमें किसी बटलर के शादी कर लेने पर उसे अपने मालिक के प्रति पूर्ण वफादार नहीं माना जाता था, भी उजागर करता है।
उपन्यास में स्टीवंस के माध्यम से गरिमा, मजाक, वफादारी और राजनीति, सामाजिक बाधाएं, स्मृति और प्रेम संबंधों का अद्भुत मिश्रण है जो उसकी प्रमुख विशेषता है। इसी उपन्यास पर अमेरिकी निर्देशक जेम्स इवोरी के निर्देशन में साल 1993 में फिल्म भी बनाई गई। इसमें स्टीवंस की भूमिका वेल्स अभिनेता एंथोनी होपकिंस और मिस केंटन की भूमिका ब्रिटिश अभिनेत्री एम्मा थांपसन ने निभाई थी। फिल्म आठ एकेडमी अवार्ड के लिए नामित हुई। हालांकि काजुओ ने बाद में कहा कि बुखार होने के कारण सिर्फ चार हफ्तों में यह उपन्यास उन्होंने लिखा था।
इसके अलावा काजुओ ने अन्य उपन्यास ‘द अनकंसोवेड’ (1995), ‘व्हेन वी वेयर आरफंस’ (2000), ‘नेवर लेट मी गो’ (2005) और हाल ही में प्रकाशित और चर्चित उपन्यास ‘द वरीड गेंट’ (2015) लिखे हैं, जिसमें उन्होंने फंतासी की लेखन शैली को अपनाया है। उपन्यास के अलावा काजुओ ने लघुकथा, पटकथा और गीत भी लिखे। हालांकि काजुओ अपने जवानी के दिनों में एक गायक और गीतकार बनना चाहते थे, लेकिन इस क्षेत्र में उन्हें सफलता नहीं मिली।
नोबेल मीडिया के मुख्य अधिकारी एडम स्मिथ को पांच अक्तूबर को दिए इंटरव्यू में काजुओ ने अपना नायक व आदर्श बॉब डिलन को बताया जो उन्हें तेरह साल की उम्र से ही प्रभावित करते रहे हैं। नोबेल पुरस्कार के प्रति सम्मान जताते हुए काजुओ ने कहा- मैं अपने सबसे महान नायकों की श्रेणी में हूं। इतिहास में सबसे महान लेखकों ने इस पुरस्कार को प्राप्त किया है। काजुओ के अलावा ब्रिटिश-भारतीय लेखक सलमान रुश्दी को भी इस पुरस्कार का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।        ०

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