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सेहत- बच्चों का खानपान

स्कूली बच्चों में आजकल तमाम ऐसी बीमारियां देखने को मिल रही हैं, जो पहले बड़ी उम्र के लोगों को हुआ करती थीं।

Author November 5, 2017 01:34 am
खानपान, पौष्टिकता, ऊर्जा ये सब ऐसे जरूरी पहलू हैं जिनके बारे में सबको पता होना चाहिए, तभी बच्चों का मनपसंद खाना-नाश्ता अच्छा बन सकता है।

स्कूली बच्चों में आजकल तमाम ऐसी बीमारियां देखने को मिल रही हैं, जो पहले बड़ी उम्र के लोगों को हुआ करती थीं। आज ज्यादातर बच्चे मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं। तनाव, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, नींद की कमी जैसे रोगों ने बच्चों को अपना शिकार बना लिया है। इसी का नतीजा है कि बच्चे कम उम्र में ही डिप्रैशन के शिकार हो रहे हैं। यह सब बच्चों की दिनचर्या और खानपान से बहुत जुड़ा है। इसलिए अगर बच्चों को बीमारियों से बचाना है तो माता-पिता के लिए सबसे जरूरी है कि वे उनकी दिनचर्या और खानपान का खासतौर से खयाल रखें।  बच्चों की दिनचर्या दरअसल उनके स्कूल जाने से शुरू होती है। सुबह स्कूल जाने के लिए बच्चों को उठना भी जल्दी पड़ता है। जल्दी उठने के लिए नींद भी पूरी होनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों को जल्द सुलाया जाए। वरना बच्चे कक्षा में झपकी लेते हैं। इसके अलावा, क्या खाकर जाएं, क्या टिफिन में ले जाएं और घर लौट कर दिन के भोजन में क्या हो, यह सब देखा जाना चाहिए। खाने में उनकी पसंद और पौष्टिकता का सही तालमेल रखा जाना चाहिए। खानपान, पौष्टिकता, ऊर्जा ये सब ऐसे जरूरी पहलू हैं जिनके बारे में सबको पता होना चाहिए, तभी बच्चों का मनपसंद खाना-नाश्ता अच्छा बन सकता है।

कैलोरी
कैलोरी यानी शरीर को तत्काल ऊर्जा मिलना। पांच साल से ऊपर के बच्चों को भरपूर कैलोरी मिलनी चाहिए, जिससे बच्चा ज्यादा से ज्यादा सक्रिय रह सके। लेकिन हाई कैलोरी देने का मतलब यह भी नहीं कि आप बच्चे को जम कर तला हुआ खाना खिलाएं, बल्कि बच्चे को दूध और अनाजयुक्त खाद्य पदार्थ देने चाहिए।
प्रोटीन
बढ़ते बच्चों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। बच्चों की मांसपेशियों के विकास और हड्डियों में मजबूती लाने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है। इसके लिए बच्चों को दूध, पनीर, चीज जैसे डेयरी उत्पाद, अंडे, मांस, मछली देने चाहिए।
विटामिन और मिनरल
बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें विटामिन और मिनरल भरपूर मिले। बच्चों को ऐसे पौष्टिक पदार्थ देने चाहिए, जिनमें कैल्शियम भरपूर मात्रा में हो। विटामिन और आयरन के लिए फल और हरी पत्तेदार सब्जियां देनी चाहिए। फलों में विटामिन, आयरन और अन्य पौष्टिक तत्त्व पाए जाते हैं। इसलिए फल और फलों का रस सबसे अच्छा रहता है। अगर बच्चा सुबह नाश्ता न करे और दूध न पीये तो फल का रस भी दिया जा सकता है। कोशिश हो कि फलों का रस ताजा निकला हो। डिब्बाबंद रसों में प्रिजर्वेटिव, रंग और चीनी मिली हो सकती है, जो शरीर के लिए हानिकारक है। बेहतर यही है कि बच्चों में फल खाने की आदत डाली जाए। अंगूर, केला, सेब, संतरा, चीकू जैसे फलों का सलाद बनाकर स्कूल के लिए टिफिन में दिया जा सकता है।
अंकुरित चीजें
बच्चों को चना, मूंग, मोठ अंकुरित करके नाश्ते और खाने दोनों में दिया जा सकता है। इसे बच्चे टिफिन में स्कूल भी ले जा सकते हैं। काला चना, साबुत मूंग और मोठ को सुबह भिगो दें। फिर रात को पानी निकाल कर कपड़े में बांध कर रख दें। सुबह तक इनमें अंकुर निकल आएंगे। इसके बाद इन्हें हींग और जीरे में थोड़े से घी से छोंक दें। इसमें थोड़ा सा नींबू का रस और चाट मसाला भी मिला दें। बच्चे इस नाश्ते को बड़े चाव से खाएंगे। यह काफी पौष्टिक नाश्ता है। इसे खाने के साथ भी खाया जा सकता है। ओट में भी काफी फाइबर होता है जो बढ़ते हुए बच्चों के लिए बहुत जरूरी है।
दही
बच्चों के लिए दही एक अच्छा और पौष्टिक खाद्य है। इसमें कैल्शियम काफी होता है। दही पाचन का भी अच्छा काम करता है। गर्मी के दिनों में बच्चों को सुबह नाश्ते में दही और छाछ दी जा सकती है।
अंडे और मछली
अंडे को एक पर्याप्त खाद्य पदार्थ माना जाता है। इसमें प्रोटीन और विटामिन काफी होते हैं जो न केवल शरीर के विकास के लिए, बल्कि दिमाग के लिए भी अच्छे होते हैं। अगर बच्चा सुबह ब्रैड-बटर, दूध-अंडे का नाश्ता करके स्कूल जाता है तो यह काफी पौष्टिक होता है। मछली में विटामिन डी और ओमेगा-3 काफी होता है जो दिमाग को भूलने की बीमारी यानी अलझाइमर से बचाता है। साल्मन और टूना मछली में ये सबसे ज्यादा पाया जाता है।
मेवे
मेवे प्रोटीन से युक्त आहार होते हैं। इनमें फैटी एसिड और मिनरल पाए जाते हैं। इन्हें खिलाने से दिमाग तेज होता है। बच्चों को सुबह दूध के साथ अखरोट और बादाम दिए जा सकते हैं। बादाम को रात में पानी में भिगो दें और सुबह इन्हें छिलका उतार कर बच्चों को दें। साथ में दूध पिलाएं। बादाम, अखरोट, किशमिश टिफिन में भी दिए जा सकते हैं स्कूल ले जाने के लिए। ल्ल

 

 

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