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चश्मा- कोरा फैशन नहीं है

धूप का चश्मा आंखों को बचाने का सुरक्षित उपाय है, बशर्ते कि चश्मा समुचित रूप से जांचा-परखा गया हो। इससे जहां आंखों को इस भीषण धूप में राहत और ठंडक मिलेगी, वहीं यह आपके व्यक्तित्व में चार चांद भी लगाएगा।

‘काला चश्मा’ गाने से एक सीन

पका चश्मा लगाना कोरा फैशन नहीं है। विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में तेज धूप और धूल से आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा लगाना आवश्यक है। लेकिन चश्मा चुनते वक्त अपने चेहरे का आकार व शरीर की रंगत को ध्यान में रखा जाना जरूरी है। एक उपयुक्त चश्मा जहां आपका व्यक्तित्व निखार सकता है वहीं बेमेल चश्मा आपके व्यक्तित्व को हास्यास्पद भी बना सकता है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, शरीर में शिथिलता आने लगती है। हाल-बेहाल हो जाता है। सारा मेकअप पलभर में मिट जाता है। बाहर सड़क पर आना और चलना मुश्किल हो जाता है। आंखें खोले नहीं खुलतीं। धूप की प्रचंडता का असर ऐसा होता है कि आप ढंग से किसी से बात भी नहीं कर सकते और फिर काम पर तो जाना ही है। आॅफिस भी जाऐंगे, किसी से मिलेंगे भी या शॉपिंग भी करेंगे ही। अब बताइए, अगर आंखों की रक्षा का इंतजाम नहीं किया तो वे बीमार नहीं हो जाएंगी? गरमी में जरूरी है कि किसी तरह से आंखों को ठंडा रखा जाए। गरमी में घर से जहां खाली पेट नहीं निकलना चाहिए, वहीं बगैर धूप का चश्मा लगाए निकलना भी कम खतरनाक नहीं है। धूप का चश्मा आंखों को बचाने का सुरक्षित उपाय है, बशर्ते कि चश्मा समुचित रूप से जांचा-परखा गया हो। इससे जहां आंखों को इस भीषण धूप में राहत और ठंडक मिलेगी, वहीं यह आपके व्यक्तित्व में चार चांद भी लगाएगा। चश्मा लगाने से पहले अपने चेहरे के अनुसार ही उसका फ्रेम देखना न भूलें। कई बार छोटे चेहरे पर बड़े फ्रेम के चश्मे भद्दे तथा हास्यास्पद लगते हैं। इसलिए चेहरे की बनावट के अनुसार ही चश्मा लेना चाहिए। मसलन चौड़े-चौकोर चेहरे पर बड़े फ्रेम का चश्मा व्यक्तित्व को निखार देता है, वहीं गोल-चपटे व कमजोर चेहरे को विद्रूप बना सकता है। पहले दुकान पर भली प्रकार से दर्पण में देखकर जान लें कि धूप का चश्मा आपके ऊपर पर फब रहा है या नहीं ? जहां तक चश्मे के कांच का प्रश्न है, यह भी चेहरे के मुताबिक ही लेना चाहिए। साथ ही इसमें आपकी निजी पसंद भी निर्भर करती है। गहरे, काले, हरे व नीले चश्मों का प्रचलन घट गया है और हल्के रंगीन कांच के चश्मे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।

इसमें से आपकी आंखें भी दिखाई देती हैं तथा किसी से बातचीत करते समय चश्मा उतारने की आवश्यकता भी नहीं रहती है। धूप के चश्मे में जहां फ्रेम की मजबूती व कलात्मकता महत्त्व रखती है, वहीं उसमें कांच की गुणवत्ता को भी नजरअंदाज नहीं किया जाा सकता। सस्ते व हल्के कांच जहां आंखों के लिए हानिप्रद होते हैं, वहीं वे जल्दी टूट व तड़क भी जाते हैं, उनमें से साफ दिखाई भी नहीं पड़ता। इसलिए उत्तम श्रेणी के कांच चश्मे को उम्र देंगे, वहीं आंखों को नुकसान न देकर दूर तक देखने की दृष्टि भी देंगे और आपके व्यतित्व को और अधिक निखारेंगे। इन कांचों के कारण आंखों में शीतलता बनी रहती है और आंखों की बीमारियों से भी बचा जा सकता है। वर्ना धूलकण और धूप की तेजी आंख जैसे कोमल अंग पर बहुत जल्दी अपना दुष्प्रभाव छोड़ देती है। फिर आप चाहे भरी धूप में शॉपिंग को जाएं या किसी से मिलने, कठिनाई होगी।धूप का चश्मा आंखों को ही लाभ नहीं देता, बल्कि कपोलों को भी धूप के दुष्प्रभाव से से भी बचाता है। यह धूप की तीव्रता से चेहरे की त्वचा को बचाता है। अगर आपको पहले ही नजर का चश्मा लगा हुआ है तो आजकल इस पर ही धूप का चश्मा फिट हो जाता है, जो चलते समय लगा लें और काम करते समय इसके ग्लास को ऊपर किया जा सकता है। इससे किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती और आराम से लगाया जा सकता है।

धूप का चश्मा प्रखर धूप की आवश्यकता है, कोई फैशन या दिखावा नहीं है। और फैशन के लिहाज से भी कोई खराब नहीं है। जमाने के साथ कदम मिला कर चलना समय के साथ चलना ही माना जाएगा। इसलिए इस फैशन को अपनाने में कोई गुरेज नहीं होनी चाहिए। धूप के रंगीन चश्मे सस्ते-महंगे दोनों ही प्रकार के मिलते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप कौन-सा खरीदना चाहेंगे। बस खरीदते समय उत्तम गुणवत्ता और चेहरे के अनुकूल चश्मा लेना आपकी खुद की समझदारी पर निर्भर करता है। आमतौर पर रंगीन चश्मों को फैशन से जोड़ कर देखा जाता है। लेकिन चश्मा न सिर्फ आंखों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है, बल्कि यह व्यक्तित्व निखारने में भी सहायक होता है। इस बारे में बता रही हैं चंद्रकांता शर्मा।

 

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