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जब गाड़ी की बनावट बदलें

गाड़ियों के हॉर्न और पहिए बदलना तो आम बात है, उनकी मूल संरचना को बदल कर किसी महंगी और विदेशी गाड़ी जैसा रंग-रूप देना, उन पर कलात्मक डिजाइन करवा लेना, उन्हें शिकारी या रेस में हिस्सा लेने वाली गाड़ियों की धज में पेश करना शगल बनता जा रहा है।

Author November 26, 2017 7:01 AM

आजकल युवाओं में मोटरसाइकिलों और कारों की बनावट बदल कर चलाना फैशन का रूप ले चुका है। गाड़ियों के हॉर्न और पहिए बदलना तो आम बात है, उनकी मूल संरचना को बदल कर किसी महंगी और विदेशी गाड़ी जैसा रंग-रूप देना, उन पर कलात्मक डिजाइन करवा लेना, उन्हें शिकारी या रेस में हिस्सा लेने वाली गाड़ियों की धज में पेश करना शगल बनता जा रहा है। मगर किसी भी गाड़ी की मूल बनावट और संरचना के साथ कितना मुफीद हो सकता है, उसके क्या-क्या खतरे हो सकते हैं, बता रहे हैं रवि डे।

सबसे बड़े और स्पोर्ट वाहनों का चलन बढ़ा है, युवाओं में उनके प्रति आकर्षण भी बढ़ा है। मगर बजट में न होने की वजह से बहुत से युवा या उनके परिजन उन्हें खरीद पाने में अक्षम होते हैं। इसलिए सामान्य मोटरसाइकिलों और कारों की बनावट में बदलाव करके बड़े और तेज रफ्तार वाहनों जैसा दिखने लायक बनवा लेते हैं। दिल्ली में दस-बारह हजार रुपए खर्च करके साधारण मोटरसाइकिल को मनचाहे और आकर्षक रंग-रूप में बदला जा सकता है। इसी तरह जीप और कारों की बनावट, पहिए, उनका रंग वगैरह बदल कर कलात्मक और आलीशान रूप दिया जा सकता है।  दिल्ली और दूसरे महानगरों में गाड़ियों की साज-सज्जा बदलने यानी मॉडीफिकेशन करने वाले अनेक जगहों पर मिल जाएंगे। इसके लिए बाजारों में तरह-तरह के साज-सज्जा के सामान उपलब्ध हैं। गाड़ियों में मॉडीफिकेश्न करने वाले अपने ग्राहकों से इस तरह पेश आते हैं, जैसे वे सारा काम कानूनी रूप से कर रहे हैं। वे इंजन और चेसिस को छोड़ कर हर हिस्से में तोड़-फोड़ कर वाहन को आपके मनचाहे आकार और रंग में पेश कर देते हैं।

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बहुत-से लोग पुरानी गाड़ियां खरीद कर उनमें बदलाव करा कर शौकिया सड़कों पर लेकर उतरते हैं। कई लोग नए मॉडल की गाड़ियों को विंटेज कारों जैसा रंग-रूप दे देते हैं, तो कई उन पर कलात्मक चित्रकारी करवा लेते हैं। खासकर युवाओं को ऐसी गाड़ियां चलाने का शौक इसलिए होता है कि वे सड़क पर चलें, तो सबका ध्यान उनकी तरफ जाए। कई अपने दोस्तों को प्रबावित करने की मंशा से भी ऐसा करते हैं। कुछ अमीर दिखने के लिए वाहनों में मॉडीफिकेशन कराना पसंद करते हैं।
मगर वाहनों की बनावट में बदलाव कराते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

गाड़ियों की बनावट
गाड़ियों की बनावट उनके भार वहन की क्षमता और रफ्तार को ध्यान में रख कर तय की जाती है। खासकर कारों पर पड़ने वाले वायुदाब के अनुसार उनके अगले हिस्से की बनावट निर्धारित की जाती है। उसी तरह पहियों और उनमें लगने वाले टायरों का आकार उनके इंजन की क्षमता और गति सीमा का ध्यान में रख कर तय किया जाता है। इंजन की क्षमता के अनुसार ही पहिए का आरपीएम यानी रोटेशन पर मिनट निर्धारित किया जाता है। उससे अधिक रखने पर गाड़ी की रफ्तार तो बढ़ जाएगी, पर उसका संतुलन ठीक नहीं रहेगा, उस पर पड़ने वाला वायुदाब बढ़ जाएगा और इंजन उसे सहन नहीं कर पाएगा। चालक के लिए भी उस पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाएगा।
इसी तरह कार की भीतरी सजावट और वायरिंग वगैरह का ध्यान रखा जाता है। मगर बहुत सारे लोग कार खरीदने के साथ ही पहला काम करते हैं कि उसके डैशबोर्ड पर किसी देवी-देवता की मूर्ति स्थापित करते और उसमें जगमगाती बत्तियां लगवाते हैं। कई लोग कंपनी से लग कर आए हॉर्न की जगह अपनी पसंद का हॉर्न लगवाना पसंद करते हैं, जो तेज आवाज करे और गाड़ी को पीछे करते हुए उसमें से विचित्र ध्वनियां निकलें। ऐसा करने के लिए मैकेनिक कार की वायरिंग को कहीं से काट कर नया तार जोड़ देते हैं। हालांकि ऐसा करना निहायत खतरनाक होता है। मोटरसाइकिलों में आजकल युवा उसका साइलेंसर बदलवाना पसंद करते हैं ताकि उससे तेज आवाज निकल सके। ऐसा करना न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने के लिहाज से खराब है, बल्कि मोटरसाइकिल की माइलेज भी घट जाती है यानी तेल की खपत बढ़ जाती है।
इसलिए कारों और मोटरसाइकिलों की बनावट में बदलाव कराने से पहले उसके हर पहलू का अध्ययन कर लेना जरूरी है।

मोटरसाइकिल की सज्जा
इन दिनों युवाओं में सबसे अधिक मोटरसाइकिलों में मॉडीफिकेशन यानी बनावट में बदलाव का फैशन है। मगर ध्यान रखें कि मोटरसाइकिल में ज्यादा सजावटी वस्तुएं न लगाएं। उसकी मूल बनावट में ज्यादा बदलाव करने का प्रयास न करें। इससे एक तो जब कभी मोटरसाइकिल की सर्विसिंग करानी होती है तो मैकेनिक को उसके पुर्जे खोलने-लगाने में मुश्किल आती है।
’मूल बनावट में ज्यादा बदलाव करने से मोटरसाइकिल की तेल पीने की दर बढ़ जाती है।
’अतिरिक्त सजावट मोटरसाइकिल पर पड़ने वाले वायुदाब को बढ़ा देते हैं, जिसका असर इंजन पर पड़ता है और इसके चलते तेज रफ्तार में चलने पर संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है।
’बनावट में बदलाव कराते समय इंजन, चेसिस और एग्जास्ट के साथ छेड़छाड़ न कराएं। ऐसा करने से मोटरसाइकिल पर मिलने वाली वारंटी का लाभ नहीं उठा सकते। फिर इंश्योरेंस का लाभ भी न मिल पाने की आशंका रहती है।

कार का सिंगार
आजकल युवाओं में पुरानी कार को किसी विदेशी गाड़ी की तरह रंग-रूप देकर या फिर उनका रंग बदल कर चलाने का फैशन है। इन दिनों पूरी कार पर फिल्म चढ़वा कर उसे मूल रंग से अलग रंग देने का भी खूब चलन है। कार के पहिए, उसका हॉर्न बदलवाना, उसमें तरह-तरह की बत्तियां लगवाना, उन्हें शिकारी गाड़ी या फिर रेसिंग कार की तरह बना देना भी आम है।
अपनी गाड़ी को सुंदर और साफ-सुथरा रखना अच्छी बात है। पर जब भी कार की बनावट को बदलने के बारे में सोचें तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें।
’कभी भी गाड़ी की चेसिस और इंजन के साथ छेड़छाड़ न होने दें। इससे गाड़ी की मूल पहचान खत्म हो जाती है, क्योंकि गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पर चेसिस नंबर भी लिखा होता है।
’इसी तरह रजिस्ट्रेशन पर गाड़ी का रंग भी लिखा हाता है। उसका रंग बदलवाना कानूनी रूप से दंडनीय अपराध माना जा सकता है।
’ऐसा करने से अगर कभी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और आपने अपनी इंश्योरेंस कंपनी से उसका खर्च लेने का दावा पेश किया तो उसके रद्द होने की संभावना हो सकती है।
’अक्सर लोग गाड़ियों के पहिए बदलवा लेते हैं। उनकी धारणा है कि ऐसा करने से गाड़ी का संतुलन बेहतर हो जाएगा और उसे तेज रफ्तार में भगाया जा सकता है। मगर यह धारणा गलत साबित हो सकती है। इसका बुरा नतीजा भी निकल सकता है।
’ हॉर्न और साइलेंसर बदलवाते समय भी विचार कर लें कि उससे फैसले वाले ध्वनि प्रदूषण के जुर्म में जुर्माना हो सकता है। फिर इससे गाड़ी में तेल की खपत बढ़ सकती है।
’गाड़ी की मूल वायरिंग से कभी छेड़छाड़ न करें। खासकर सीएनजी चालित वाहनों में ऐसा करना खतरे को न्योता देना साबित हो सकता है।
विशेषज्ञ की राय लें
अगर आपको सजी-धजी और सबसे अलग दिखने वाली गाड़ी रखने का शौक है तो गाड़ी की मूल बनावट से छेड़छाड़ करने से पहले किसी मोटर वाहन विशेषज्ञ से जानकारी जरूर ले लें। इंश्योरेंस कंपनी से भी जानकारी प्राप्त कर लें कि वह किस प्रकार के बदलाव की छूट देती है। ०

 

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