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खेल: तैयारी नई जंग की

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को किनारे लगा दिया है।

Author January 15, 2017 2:48 AM
भारतीय कप्तान विराट कोहली। (पीटीआई फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को किनारे लगा दिया है। खेल के हर प्रारूप-टैस्ट, वन-डे और ट्वेंटी-20 में सबसे सफल भारतीय कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी एकदिनी और टी-20 की कप्तानी छोड़कर खुद किनारे हो लिए। इससे खेल के तीनों प्रारूपों में टीम इंडिया की कमान विराट कोहली के पास आ गई है। टैस्ट क्रिकेट में जबर्दस्त कामयाबी के बाद अब खेल के एकदिनी और बीसम-बीस प्रारूप में भी विराट के कप्तानी कौशल की परीक्षा का समय आ गया है। मुकाबला इंग्लैंड से है। उसी इंग्लैंड टीम के साथ जिसे करीब तीन सप्ताह पहले विराट की टीम ने टैस्ट मैचों में बुरी तरह धुनकर वापस भेजा था। लेकिन अब प्रारूप सीमित ओवरों वाला है। इसके लिए इंग्लैंड टीम का कप्तान नया होगा जो कुछ नए चेहरों के साथ आया है। विराट के लिए यह बड़ी चुनौती है। उन्हें उस राह का अनुसरण करना है जिस पर महेंद्र सिंह धोनी ने पहले ही सफलता के कई मापदंड तय कर रखे हैं। राहत की बात यह है कि सफलता की गाथा लिखने वाला कप्तान फिलहाल कोहली का हमसफर होगा।

मैदान पर कोहली को उनकी सलाह अमूल्य हो सकती है- शुरुआती मैचों में। हालांकि, विराट के लिए धोनी अब भी उनके कैप्टन हैं। दोनों के बीच अच्छी कैमिस्ट्री है और उम्मीद कर सकते हैं कि विराट के नेतृत्व में भी टीम इंडिया सफलता के झंडे गाड़ेगी। सफलता पाने का जज्बा विराट कोहली के नेतृत्व कौशल की खासियत है। फटाफट क्रिकेट और बीसम-बीस जैसे मुकाबलों में आक्रामकता के दर्शन ज्यादा होते हैं। यही आक्रामकता खेल को दिलचस्प बनाती है। विराट ऐसे खिलाड़ी हैं, जो लापरवाह अंदाज में खेलने की बजाय अपनी बल्लेबाजी तकनीक का जलवा दिखाकर रन बटोरते हैं, टीम को मजबूती देते हैं। फिर भी टीम में ऐसे खिलाड़ी जरूरी हैं जिनके पास कम गेंदों पर ज्यादा रन बनाने की चुनौती को अपने विस्फोटक अंदाज से पूरा करने का माद्दा हो।

टीम इंडिया के पास ऐसे अंदाज में खेलने वाले कई बल्लेबाज हैं, पर मध्यम क्रम में एक ऐसे अनुभवी बल्लेबाज की कमी महसूस की जा रही है जो टीम की नैया पार लगा सके। ऐसे में तीन साल बाद वन-डे टीम में युवराज सिंह की वापसी स्वागत वाला कदम है। 2011 क्रिकेट विश्व कप में भारतीय जीत के हीरो रहे युवराज नेचुरल स्ट्रोकप्लेयर हैं। एक उम्दा फील्डर होने के साथ-साथ वह बाएं हाथ के उपयोगी स्पिन गेंदबाज भी हैं। उनकी यही विशेषताएं कप्तान और टीम की ताकत को बढ़ाती हैं। बल्लेबाज तो वह लाजवाब हैं। जब उनके बल्ले से स्ट्रोक निकलने शुरू हो जाते हैं तो फील्डर मैदान में डांस करते रह जाते हैं। कट हो या ड्राइव, पुल हो या फ्लिक, स्ट्रेट ड्राइव हो या लंबे शाट्स, हर तरह से वह गेंदबाज की मुश्किल बन जाते हैं। युवी ने जिस तरह कैंसर से लड़कर क्रिकेट मैदान पर वापसी की, उसी तरह निराशा के दौर में भी दृढ़ता दिखाई। जब उनका करिअ‍ॅर समाप्त होता दिख रहा था तो उन्होंने रणजी ट्राफी में अपने जोरदार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को मजबूर कर दिया कि उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। पंजाब के लिए पांच मैचों में 672 रन ठोंककर वह सुर्खियों में रहे।

हाल ही के वर्षों में भारतीय क्रिकेट का सबसे अच्छा पहलू यह रहा है कि खिलाड़ी चाहे उम्रदराज हो या युवा, घरेलू क्रिकेट में सुर्खियां बटोरने वाले खिलाड़ियों का चयनकर्ता संज्ञान लेते हैं। युवराज ने जता दिया है कि उनमें अब भी काफी क्रिकेट खेलने का दम बाकी है। फार्म और अनुभव के नाते तो युवराज टीम में आए ही, इसके पीछे रणनीति भी है। वन-डे और ट्वेंटी-20 सिरीज इंग्लैंड के साथ है। इंग्लिश टीम के खिलाफ युवी खासे सफल रहे हैं। 48 की औसत से बनाए 1313 रन उनके दावे को पुख्ता करते हैं। वैसे भी इस साल इंग्लैंड में चैंपियंस ट्राफी का भी आयोजन होना है। इस महत्त्वपूर्ण टूर्नामेंट के लिए टीम को मध्यम क्रम में अनुभवी बल्लेबाज चाहिए। सुरेश रैना के वन-डे टीम में जगह नहीं बना पाने के कारण युवराज को बड़ी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। इंग्लैंड के खिलाफ सिरीज में उनका प्रदर्शन तय करेगा कि चैंपियंस ट्राफी के लिए युवराज टीम में होंगे या नहीं। अच्छा प्रदर्शन उनके करिअ‍ॅर को थोड़ा लंबा बना सकता है। टी-20 में भी साल भर बाद उनको अपनी करिश्माई बल्लेबाजी दिखाने का अवसर मिलेगा।

ओपनर रोहित शर्मा के चोटिल होने के कारण खब्बू बल्लेबाज शिखर धवन को एक और मौका मिल रहा है। पर ट्वेंटी-20 टीम में उन्हें जगह नहीं दिए जाने का मतलब है कि होनहार खिलाड़ी ऋषभ पंत से पारी की शुरुआत कराई जा सकती है। अंडर-19 टीम के इस आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज ने रणजी में धमाकेदार प्रदर्शन किया है। आठ पारियों में 81 की औसत से 972 रन जुटाना खेल नहीं है। इसमें महाराष्ट्र के खिलाफ तिहरा शतक (308) भी शामिल है। झारखंड के खिलाफ तो उन्होंने 48 गेंदों पर सेंचुरी जड़ दी, जो रणजी ही नहीं, प्रथम श्रेणी मैचों में भारतीय बल्लेबाजों की ओर से लगाई गई सबसे तेज सेंचुरी है। यह तय है कि वन-डे और टी-20 में कर्नाटक के केएल राहुल पारी की शुरुआत करेंगे। कोहली के पास दोनों टीमों में तेज और स्पिन गेंदबाजी में कई विकल्प रहेंगे। पिच के मिजाज को देखकर उन्हें तय करना होगा कि कैसे आक्रमण के साथ उतरें। टैस्ट सिरीज में इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए परेशानी का सबब बने रविचंद्रन अश्विन और रविंदर जड़ेजा दोनों प्रारूप में कप्तान के ब्रह्मास्त्र रहेंगे। टीम में लेग स्पिनर अमित मिश्रा और यजुवेंद्र चहल भी हैं। भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, उमेश यादव और हार्दिक पर तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी होगी। टी-20 में अनुभवी आशीष नेहरा की वापसी आक्रमण को पैना बनाएगी। बढ़ती उम्र और चोटग्रस्त होकर टीम के अंदर-बाहर होते रहने के बावजूद नेहरा कप्तान के भरोसेमंद गेंदबाज रहे हैं। रनों के प्रवाह पर अंकुश लगाने और जरूरत के समय विकेट निकालने के कौशल में वह निपुण हैं।

2016 में रन बनाने की होड़ में अग्रणी रहे विराट कोहली और जो रूट इस प्रारूप में भी अपनी-अपनी टीम की धुरी बने रहेंगे। कप्तानी के दायित्व से मुक्त हो गए एमएस धोनी अपने विकेटकीपिंग कौशल और बल्ले से खुलकर खेल पाएंगे। जहां तक विश्व की नंबर पांच टीम इंग्लैंड के एकदिवसीय रिकार्ड का सवाल है तो वह बहुत अच्छा नहीं रहा। कोई भी प्रतिष्ठित खिताब उनके साथ नहीं जुड़ा है। पर इस प्रारूप में सर्वाधिक 444 का स्कोर उसके नाम है। टैस्ट सिरीज का परिणाम भले ही इंग्लैंड के खिलाफ गया पर वन-डे में उनके पास कई ऐसे बल्लेबाज और गेंदबाज हैं जो मुकाबलों को दिलचस्प बना सकते हैं। वैसे एक दिवसीय मैचों में टीम इंडिया ज्यादातर अवसरों पर इंग्लैंड टीम पर भारी पड़ी है। 93 मैचों में से 50 में जीत भारत को मिली है। दोनों टीमों के बीच दो मुकाबले ‘टाई’ हुए हैं और तीन बेनतीजा रहे। लेकिन जेसन राय, एलेक्स हेल्स, ईयोन मोर्गन जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी से इंग्लैंड टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने का माद्दा रखती है। जानी बेयरस्टा बीते साल में इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर रहे। लियाम प्लंकेट, क्रिक वोक्स जैसे शानदार तेज गेंदबाज और मोइन अली, आदिल राशिद जैसे स्पिनर इंग्लिश चुनौती को और मजबूत बनाएंगे।

ट्वेंटी-20 में तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड की टीम का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। 2010 में विश्व चैंपियनशिप बनी इंग्लैंड की टीम जब पिछले साल भारत में हुए टी-20 विश्व कप में आई थी तो फाइनल खेली थी। फिर विश्व खिताब जीतने के करीब पहुंच गई थी पर आखिरी ओवर ने फाइनल हरा दिया। वेस्टइंडीज के आलराउंडर क्रेग ब्रेथवेट ने बेन स्टोक्स की गेंद पर लगातार चार छक्के लगाकर मैच का पासा पलट दिया था। जहां तक भारत के साथ हुए टी-20 मुकाबलों का सवाल है तो इंग्लैंड का पलड़ा भारी रहा है। दोनों टीमों के बीच हुए आठ मुकाबलों में इंग्लैंड को पांच में जीत मिली है। इसलिए किसी भी मायने में अब इंग्लैंड टीम को हल्का नहीं लिया जा सकता। आखिर कप्तान ईयोन मोर्गन का आईपीएल अनुभव इंग्लैंड टीम के लिए काफी उपयोगी हो सकता है। इंग्लैंड ने जून 2015 से खेली सात वन-डे सिरीज में से पांच को जीता है। सीमित ओवरों की क्रिकेट के प्रति उनका रवैया यह दर्शाता है कि इंग्लैंड इस बार तीन दशक से भी ज्यादा समय से भारत में वन-डे सिरीज नहीं जीत पाने का सिलसिला तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। ०

 

 

 

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