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सेहत- निंदिया न बैरन हो जाए

अच्छी और पूरी नींद अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है।

Author Published on: December 3, 2017 6:12 AM
सांकेतिक फोटो

अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है अच्छी नींद। अच्छी और पूरी नींद अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कुंजी है। शरीर के लिए यह उतनी ही जरूरी है जितना खाना-पीना। लेकिन आज ज्यादातर लोग सबसे ज्यादा अगर किसी समस्या से ग्रस्त हैं, तो वह है नींद की समस्या। आज की जीवनशैली ने अधिकतर लोगों की नींद उड़ा दी है। आजकल बड़ों की ही नहीं, बल्कि बच्चों की भी समस्या बन चुकी है। इसे ही अनिद्रा कहते हैं। अनिद्रा के कई कारण होते हैं, जिनमें शारीरिक और मानसिक बीमारियां, सोने का निश्चित समय न होना, तनाव, काम का दबाव आदि।  हर उम्र में शरीर को एक निश्चित अवधि की नींद जरूरी होती है। नवजात शिशु अठारह घंटे तक सोते हैं, तो वयस्कों को औसतन आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है। अगर नींद पूरी नहीं होती, तो इसका सीधा असर शरीर की चयापचय प्रक्रिया पर पड़ता है। इससे मधुमेह, वजन बढ़ना, उच्च रक्त चाप जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इतना ही नहीं, नींद की कमी से सिर के भी तमाम रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग कम सोते हैं या फिर अक्सर देर से सोते हैं, अन्य लोगों की तुलना में उनका नजरिया काफी नकारात्मक होता है और वे चिंताओं से घिरे रहते हैं।

अनिद्रा की समस्या
चिकित्सा शास्त्र के अनुसार हफ्ते में तीन बार पूरी रात नींद न आने को अनिद्रा समझा जाता है। अनिद्रा किसी भी उम्र के पुरुषों और महिलाओं में हो सकती है। ये कई तरह की होती है।अल्पावधि अनिद्रा : अल्पावधि या तीव्र अनिद्रा, अनिद्रा का एक आम प्रकार है। यह कुछ दिनों के लिए होती है और कुछ दवाओं या जीवनशैली में किए गए मामूली बदलावों से होती है। चिरकालीन अनिद्रा : अगर अनिद्रा की समस्या काफी लंबे समय के लिए रहे तो यह आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है। अगर एक व्यक्ति महीने भर से भी ज्यादा समय तक ठीक से न सो पाए तो इसका अर्थ है कि वह चिरकालीन अनिद्रा से पीड़ित है।
कैसे बचें अनिद्रा से
ऐसा नहीं है कि अनिद्रा की समस्या से निजात नहीं पाई जा सकती। बहुत आसान है, बस नियमित रूप से आपको कुछ चीजें जीवन में अपना लेनी चाहिए।
दर्द से बाहर निकलें : अगर कोई व्यक्ति दर्द या ऐसी ही कोई परेशानी महसूस कर रहा है, तो उसके लिए सो पाना मुश्किल होता है। दर्द कैसा भी हो, आपको नींद नहीं आएगी। इसलिए जब आप दवा ले रहे हैं तो सुनिश्चित कर लें कि अपनी दवाइयां सोने से एक या दो घंटे पहले ले लें और दवा लेने के पहले और उसके बाद चाय-कॉफी न लें।
गुनगुने पानी से नहाएं : अगर आपको लेटने पर नींद न आने की समस्या हो या सोने के बीच में जग जाते हैं तो इसके लिए सोने जाने से पहले गुनगुने पानी से स्नान करना बेहतर समाधान है। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता और शरीर का तनाव दूर हो जाता है।  योग करें : नियमित योग करके शरीर और मन को आराम पहुंचाता है। यह शरीर में रक्त प्रवाह को सुचारु बनाता है और मानसिक तनाव और चिंता को दूर रखता है। योग शरीर के विभिन्न अंगों को उचित स्थिति में तैयार करता है।

सोने का निश्चित समय रखें : रोजाना सोने का समय तय करने की कोशिश करें। इससे सात-आठ घंटे की अच्छी नींद आ सकती है। कमरे का माहौल अच्छा रखें : अपने सोने के कमरे का माहौल अच्छा रखें जहां कोई शोरगुल न सुनाई पड़े। तेज टेलीविजन और संगीत से बचने की कोशिश करें।  निकोटीन से बचें : तंबाकू तंत्रिका तंत्र के लिए उत्तेजक का कार्य करता है। अगर आपको धूम्रपान की आदत है, तो अधिक धूम्रपान की आदत से बचने की कोशिश करें और शाम के समय अधिक देर तक धूम्रपान न करें। अगर आप ऐसा करते हैं तो यह आपके शरीर को बेचैन कर देगा। अंधेरे में सोने की कोशिश करें : अगर कमरे में हल्की सी भी रोशनी मौजूद है तो यह आपके शरीर के भीतर की घड़ी को बाधित कर सकती है। अपने सोने के कमरे का दरवाजा बंद रखें और नाइट लैंप का प्रयोग न करें। इस धरती पर सारा जीवन रोशनी और अंधेरे के तालमेल से ही आया है। बिजली की रोशनियों ने प्राकृतिक घड़ी को बाधित करके शरीर के अंदर की घड़ी खराब कर दी है। छोटी से छोटी रोशनी भी आॅप्टिक नर्व से होते हुए आपके हाइपोथैलमस में जाती है। हाइपोथैलमस आपकी जैविक घड़ी पर नियंत्रण रखता है। रोशनी आपके मस्तिष्क को यह निर्देश भेजती है कि अब उठने का वक्त हो गया है और आपका शरीर काम के लिए तैयार हो जाता है। ल्ल

 

 

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