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सेहत- संक्रामक रोगों का मौसम

बरसात में जहां मौसम सुहाना होता है, वहीं इसमें कुछ संक्रामक बीमारियां जैसे, डेंगू, मलेरिया, मियादी बुखार, जुकाम, फ्लू और निमोनिया फैलने का खतरा अधिक रहता है।

Author Published on: June 25, 2017 6:53 AM
डेंगू।

शक्तिराज

य ह सही है कि बारिश का मौसम बहुत मनभावन होता है। कवियों और शायरों के लिए तो हमेशा से यह मौसम प्रेरणा का स्रोत रहा है। बारिश में भीगने का जिक्र कविता-शायरी में बार-बार आता है। हमारी फिल्मों में तो बारिश में भीगती नायिका का दृश्य किसका मन नहीं मोह लेता। लेकिन, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बारिश जितनी सुहानी लगती है, जरा-सी असावधानी में वह उतनी ही परेशानी भी पैदा कर सकती है। अब जबकि, बारिश का मौसम सिर पर है, तो इस मौसम से निपटने की तैयारी भी जरूरी है। मौसम विभाग ने इस बार अच्छी बारिश की संभावना जता चुका है। भीषण गरमी के तपते मौसम में यह राहत की बात है। मगर वहीं इस बात को भी समझने की जरूरत है कि जहां हर मौसम की अपनी खासियत होती है वहीं उसका अपना अलग मिजाज भी और उसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी होते। फिर चाहे गरमी हो, सर्दी या फिर बरसात का मौसम। बरसात के मौसम में बीमारियों के पनपने की संभावना कहीं अधिक होती है। जगह-जगह भरा पानी और सड़ रहे कूड़े के ढेरों से मच्छर, मक्खियां पनपती हैं और इनसे बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बरसात के मौसम में कहीं अधिक सावधानी रखने की जरूरत भी बढ़ जाती है। फिर चाहे, बात खान-पान की हो या फिर शरीर को स्वस्थ्य बनाए रखने की। बरसात का मौसम हर तरह से प्रभावित करता है। एक तरफ संक्रमण से डेंगू, मलेरिया, हैजा जैसी बीमारियां फैलती हैं तो वहीं बालों का गिरना और त्वचा संबंधी रोग जैसे दाद-खाज-खुजली आदि का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में कुछ एहतियात रखना बेहद जरूरी है।

बरसात के मौसम में जरूरी सावधानियां-
बरसात में जहां मौसम सुहाना होता है, वहीं इसमें कुछ संक्रामक बीमारियां जैसे, डेंगू, मलेरिया, मियादी बुखार, जुकाम, फ्लू और निमोनिया फैलने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में कुछ एहतियात रखें व भीगने से बचें। अचानक होने वाली मूसलाधार बारिश से बचने के लिए रेनकोट, छाता अपने पास जरूर रखें। अक्सर बरसात के मौसम में जगह-जगह गड्ढों में पानी भर जाता है। इससे मच्छर पनपने लगते हैं। इसलिए अपने आस-पास किसी भी जगह पानी को इकट्ठा न रहने दें। कीटाणुनाशकों का छिड़काव करें और घर की साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।

खान-पान का रखें ख्याल
कुदरत ने हर मौसम के हिसाब फल पैदा किए हैं जो सेहत के लिहाज से भी बेहद पौष्टिक होते हैं। इनमें जामुन, चैरी, अनार, लीची आदि ऐसे ही फल हैं। इनमें विटामिन और पोषक तत्त्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं और इनमें पनप रही मौसमी बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी होती है। आलूबुखारा सर्दी-जुकाम में लाभदायक होता है। तुलसी, इलायची, पुदीना आदि की हर्बल चाय बरसात के मौसम में न सिर्फ स्वाद के लिहाज से ही बहुत अच्छी होती है बल्कि सेहत के लिए भी लाभदायक होती है। इससे बरसात में होने वाले संक्रमण से बचाव होता है। इस मौसम में मिलने वाली सब्जियां जैसे, लौकी, तोरई, करेला आदि में भरपूर मात्रा में पोषक तत्त्व होते हैं। यह पाचन क्रिया को भी दुरुस्त रखती है। इसलिए इनका सेवन करें। सब्जियों और फलों का इस्तेमाल अच्छी तरह धोकर ही करें। इस बात का भी ख्याल रखें कि यह ताजा होने चाहिए। अधिक ठंडा और अधिक गरम या ज्यादा खट्टा आहार लेने से बचें। इसके अलावा ज्यादा नमक व मिर्च वाले भोजन, चिप्स से भी बचाव रखें। पानी शुद्ध होना चाहिए, बल्कि गरमियों में उबालने के ठंडा कर पानी पीना चाहिए। आहार में सलाद लेने वालों को इस मौसम में इसे खाने में खास एहतियात बरतनी चाहिए। अक्सर बरसात की वजह से कच्चे सलाद में कई तरह के कीड़े होने का खतरा रहता है। इसलिए सलाद बनाने से पहले सब्जियों आदि को अच्छी तरह से धोकर साफ करके रखें और तब इस्तेमाल करें। मशरूम में अन्य दिनों के मुकाबले बरसात में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है इसलिए इसे खाने से बचाव रखना बेहतर है।

कैसा हो आहार
सादा आहार जैसे, दाल-सब्जियां व कम वसायुक्त आहार इस मौसम में पाचन के लिए बेहतर रहता है। गरिष्ठ आहार और खट्टी दही से परहेज करना चाहिए। बरसात में पाचन शक्ति तुलनात्मक रूप से मंद रहती है, क्योंकि बढ़ी आर्द्रता के कारण शरीर में बनने वाला पाचक अम्ल प्रभावित होता है। इसलिए इस पर ध्यान देना चाहिए और जल्दी पचने वाला आहार लेना चाहिए। प्याज और अदरक में प्रतिरोधक क्षमता होती है व यह पाचन क्रिया को भी मजबूत बनाती हैं। इनका सेवन बेहतर रहता है।
गरम दूध बरसात में पीना ज्यादा हितकारी होता है। यह बरसात के मौसम में होने वाले रोगों के संक्रमण से बचाव रखता है। इसलिए रोज सोने से पहले गरम दूध हर तरह से उपयोगी होता है। बासी भोजन बरसात में बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इसमें बहुत जल्द संक्रमण होने लगता है। खानों में जीवाणु पनपने से वह विषाक्त हो जाता है, जो पेट में जाकर अपच, मरोड़ या दूसरी बीमारियों को जन्म दे सकता है। इस मौसम में अक्सर लोग प्रदूषित जल के उपयोग से बीमार होते हैं और पेचिश आदि की समस्याएं होती हैं। अक्सर बारिश के मौसम में तला-भुना खाना अच्छा लगता है। मगर इससे स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतें बढ़ भी सकती हैं। बारिश के पानी में कई अशुद्धियां होती हैं, जो अक्सर खुला रखकर बिकने वाले पदार्थों में मिल कर उन्हें दूषित कर देते हैं।\ इसलिए स्ट्रीट फूड खाने से बचें।
बारिश में बार-बार भीगने से बचना चाहिए और सिर को ज्यादा समय तक गीला नीं रखना चाहिए। अगर भीग जाएं तो तुरंत सूखा कपड़ा पहनना चाहिए। ज्यादा देर तक भीगा कपड़ा पहनने से त्वचा संबंधी बीमारी हो जाती है, जो खारिश-खुजली में बदल जाती ग्है। अक्सर आंखों के संक्रमण यानी आईफ्लू का खतरा भी बरसात में बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए आंखों को ताजा पानी से धोएं और आंखों की साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।
त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई बार इसका कारण अधिक पसीना आना और कपड़ों में साबुन आदि का रह जाना भी होता है। इससे खुजली की समस्या होती है । यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैलती है। इसके लिए एंटीबायोटिक क्रीम आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। गीले जूते-चप्पल अधिक समय तक पैरों में न रखें। अन्यथा त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादा समय जूते पहने रहने वाले लोगों को भी समस्या हो सकती है। लगातार जूतों में रहने की वजह से पैरों की उंगलियों के बीच की त्वचा गलने लगती है। इसलिए कुछ समय के लिए जूतों को उतार कर भी रखें। खासकर शरीर के जोड़ों को सूखा रखें, क्योंकि अक्सर यह गीले रह जाते हैं और इस वजह से त्वचा संबंधी रोग पनपते हैं।
हल्के कपड़े पहनें। जितना हो सके शरीर को सूखा रखें। बरसात के मौसम में बाल गिरने की समस्या भी होती है। इससे बचाव के लिए बालों को साफ और सूखा रखना जरूरी है। बाल गीले रहेंगे तो सिर की त्वचा में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। बालों में तेल कम लगाना चाहिए, क्योंकि तैलीय बाल अगर पानी में भीग जाते हैं, जो जल्द ही उनमें बदबू भी आने लगती है।

 

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