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गरमी में घर ठंडा ठंडा

गरमी का मौसम शुरू हो रहा है। इस मौसम में घर की दीवारें गरम होनी शुरू हो जाती हैं। दिन में गरम हवा चलती है, इसलिए खिड़की-दरवाजे खोलने पर घर और गरम हो जाता है। ऐसे में दिन-रात कूलर या एसी चला कर रखना पड़ता है। पर सामान्य आमदनी वाले परिवार के लिए घर को ठंडा रखने का यह उपाय महंगा साबित होता है। यही वजह है कि कई लोग थोड़े-थोड़े अंतराल पर एसी या कूलर चलाते हैं। कई लोग सिर्फ रात को सोते समय कुछ देर के लिए चलाते हैं। पर इस तरह घर के भीतर की गरमी कम नहीं होती। घर को कैसे ठंडा रखें, पेश हैं रवि डे के सुझाव।

Author March 11, 2018 3:26 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

रवि डे

गरमी का मौसम शुरू हो गया है। इसलिए अभी से घर को ठंडा रखने के उपाय करने शुरू कर देने चाहिए। घर के भीतर गरमी का प्रकोप मुख्य रूप से दो कारणों से बढ़ता है- एक, धूप और दूसरा, गरम हवा। इसलिए गरमी के मौसम में जहां तक संभव हो सके, देर तक घर में धूप को आने से रोकें। इसी तरह दिन में जब गरम हवा चल रही हो, तो उसे घर में आने से रोकें।

धूप से बचाव
घर में धूप देर तक न बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि धूप वाली जगहों पर छाए का प्रबंध करें। इसके लिए बालकनियों में ऊपर-नीचे हो सकने वाली चिक लगवाएं। जब दिन चढ़ने लगे तो चिक को उतार दें। रात को चिक ऊपर चढ़ा दें। अगर कुछ अधिक पैसा खर्च कर सकते हैं तो बालकनियों में ओनिंग लगवा लें। ओनिंग यानी एल्यूमीनियम की छड़ों पर कपड़े की तनी हुई छतरी, जिसे पेंच घुमा कर सिकोड़ा और खोला जा सकता है। जिन कमरों की बालकनियां छोटी हैं, उनके बाहर खस की टट्टी लटकाई जा सकती है। खस की टट्टी थोड़ी महंगी जरूर पड़ती है, पर उसका आनंद ही अलग होता है। उस पर पानी छिड़क दें और कमरे की बालकनी की तरफ का दरवाजा खोल कर रखें तो खस की टट्टी से छन कर आने वाली हवा की खुशबू और ठंडक पूरे घर को तरोताजा कर देती है। इस तरह धूप से बचाव तो होता ही है, घर भी ठंडा बना रहता है।

परदे और सज्जा
घर में धूप आने का दूसरा रास्ता खिड़कियां होती हैं। आजकल कांच की बड़ी-बड़ी, बल्कि पूरी दीवार की लंबाई-चौड़ाई की खिड़कियां लगाने का चलन है। अगर ऐसी खिड़की लगवाते हैं, तो ध्यान रखना ताहिए कि उसमें कांच वैक्यूम वाले लगवाएं। इससे बाहर का शोर घर में नहीं आता और दूसरे, गरमी भी कम पहुंचती है। ऐसी खिड़कियों पर मोटे कपड़े वाले और गहरे रंग के परदे लगाएं। आजकल अस्तर वाले परदे बनने लगे हैं। पीछे वाला अस्तर हल्के रंग का और गरमी को रोकने वाले कपड़े का लगाया जाता है। इस तरह खिड़कियों के रास्ते आने वाली धूप से गरमी का बचाव करना आसान हो जाता है। ऐसे परदे घर के भीतर का तापमान कम कर देते हैं। गाढ़े रंग के परदे घर के भीतर दिन में अंधेरे का आभास रचते हैं, इससे गरमी का अहसास भी कम होता है। परदों पर हरियाली के दृश्य हों तो ठंडक का आभास बढ़ जाता है। इसी तरह बेड कवर आदि के रंग हल्के रखें। सफेद और हल्के हरे रंग ठंडक का आभास देते हैं।

पौधा रोपण
घर की बालकनियों में ऐसे पौधे लगाएं, जो घनी हरियाली देते हों। कोचिया, बोगनबेलिया वगैरह इसके लिए उपयुक्त होते हैं। अगर आपका घर भूतल पर है, तो कुछ लताएं भी लगा सकते हैं, जिन्हें बालकनी और खिड़कियों के ऊपर फैलाया जा सकता है। ऐसी अनेक लताएं हैं, जो हरियाली भी देती हैं और आकर्षक फूल भी। उनके फूल रात में घर को महक से भर देते हैं। अगर आपका घर ऊपर की किसी मंजिल पर है, तो भी गमलों में हरियाली रचने वाले पौधे लगा सकते हैं। यह सब्जियां बोने का मौसम है। अगर आपको बागबानी का शौक है, तो बड़े आकार के गमले लें और उनमें लौकी, तोरई, करेला, सेम, लोबिया आदि के बीज रोप दें। इनकी लताएं लंबी और छांह देने वाली होती हैं। उनकी लताओं को बालकनी और खिड़कियों के ऊपर छज्जा बना कर चढ़ा दें। वे हरियाली और छांह तो देंगे ही, आप घर में उगाई सब्जियों का आनंद भी ले सकेंगे। पौधे घर के भीतर गरमी को आने से रोकते हैं। उनकी वजह से ठंडक बनी रहती है। इसी तरह घर के भीतर भी इनडोर प्लांट्स रखें। इससे हरियाली का आभास भी बना रहेगा और पौधे घर के भीतर की गरमी को अवशोषित करेंगे।

फर्श की धुलाई
गरमी में सुबह और शाम दोनों वक्त घर के फर्श पर पोंछा लगाना चाहिए। बल्कि असुविधा न हो तो फर्श की धुलाई करें, इससे घर में ठंडक आती है। मगर चूंकि आजकल शहरों में घरों का आकार छोटा होता है, उसमें जरूरत की चीजें इस कदर ठुंसी होती हैं कि पूरे फर्श की सफाई कभी-कभार ही हो पाती है। खाली जगहों पर ही झाड़ू-पोंछा लग पाता है। इसलिए फर्श की धुलाई संभव न हो तो पोंछे को थोड़ा अधिक गीला रख कर फर्श पोंछें। इससे भी फर्श की गरमी कम हो जाती है।
इसके अलावा बैठक या मुख्य कमरे में चौड़े मुंह का मिट्टी का कोई बर्तन रख कर उसमें पानी रखें। पानी के वाष्पीकरण से घर के भीतर नमी बनी रहेगी, इस तरह कुछ गरमी अवशोषित हो सकेगी। मगर इस बात का ध्यान रखें कि मिट्टी के बर्तन में रखा पानी रोज बदलें, नहीं तो उसमें कीट पलने का खतरा पैदा होगा।

जब घर से बाहर निकलें
गरमी के मौसम में जब भी घर से बाहर जाएं, सारे खिड़की दरवाजों को ठीक से बंद कर दिया करें। इससे बाहर से आने वाली गरम हवा और धूप घर को गरम नहीं कर पाएगी। खिड़कियों के परदे और बालकनी की चिक भी दिन में हमेशा गिरा कर रखें। जब बाहर से लौटें तो घर के खिड़की दरवाजे कुछ देर के लिए खोल कर रखें और पंखे चला दें। इससे भीतर की गरम हवा बाहर निकल जाएगी।

कूलर-एसी का उपयोग
बहुत सारे लोग बिजली की खपत रोकने के मकसद से हर समय एसी या कूलर नहीं चलाते। निस्संदेह हर समय एसी चला कर रखना सामान्य आयवर्ग के लिए खर्चीला काम है। पर आजकल बाजार में प्लास्टिक के ऐसे कूलर आने लगे हैं, जो लगभग पंखे जितनी बिजली में चल जाते हैं। उन्हें इनवर्टर से भी चलाया जा सकता है। तमाम कंपनियों ने बिजली की खपत घटाने के मकसद से छोटे आकार में अधिक बेहतर प्रदर्शन कर सकने वाले कूलर बनाए हैं। कुछ कूलरों में पानी के अलावा बर्फ के टुकड़े डालने की भी व्यवस्था होती है। इस तरह वे अधिक ठंडक देते हैं। यों पर्यावरण और शरीर की प्रकृति के लिहाज से ठंडक पाने के लिए कूलर सबसे उपयुक्त उपकरण है। कूलर में चूंकि पानी पड़ता है, वह शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता। एसी ठंडक जरूर अधिक देता है, पर अनेक अध्ययनों से स्पष्ट हो चुका है कि एसी की हवा में रहने से सेहत पर कई तरह से प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में कूलर का उपयोग किफायती और ज्यादा मुफीद है। बाजार में घूम कर अध्ययन करेंगे, तो अलग-अलग क्षमता, बनावट और सुंदरता के लिहाज से उपयुक्त अनेक कूलर उपलब्ध हैं। अगर आपके पास खुली छत है तो पूरे घर को ठंडा रखने वाले कूलर भी ऊपर लगाए जा सकते हैं, जिसकी हवा पाईप के जरिए कमरों में पहुंचती है।

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