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दाना-पानी: तरल आहार और हरा-भरा उपमा

नाश्ता और रात का भोजन कम से कम तेल-घी वाला करें, तो पाचन तंत्र सुचारु रूप से काम करता है और उदर विकार की संभावना कम रहती है। जहां तक संभव हो, इस मौसम में अन्न कम और फल तथा सब्जियों का उपयोग अधिक से अधिक करना चाहिए।

Author March 11, 2018 3:12 AM

मानस मनोहर

होली के बाद का मौसम सेहत की दृष्टि बहुत संवेदनशील होता है। आयुर्वेद के अनुसार खासकर वात प्रकोप वाले लोगों को इस मौसम में हल्का भोजन ही करना चाहिए। गरिष्ठ भोजन कब्ज पैदा करता है। नाश्ता और रात का भोजन कम से कम तेल-घी वाला करें, तो पाचन तंत्र सुचारु रूप से काम करता है और उदर विकार की संभावना कम रहती है। जहां तक संभव हो, इस मौसम में अन्न कम और फल तथा सब्जियों का उपयोग अधिक से अधिक करना चाहिए। इसलिए इस मौसम में नाश्ते के रूप में क्या लिया जा सकता है, पेश हैं कुछ उसी के अनुरूप व्यंजन।

तरल आहार
यह मौसम न तो अधिक गरम होता है और न अधिक ठंडा। इसलिए इसमें कुछ ऐसे बैक्टीरिया पैदा होते हैं, जो जुकाम, खांसी, अपच जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। उनसे बचने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखना जरूरी होता है। इसलिए खासकर पेय पदार्थ लेते वक्त ध्यान रखना चाहिए कि वे ठंडा न हों, या उनमें बर्फ डाल कर पीने की जरूरत न महसूस हो। इस मौसम में नाश्ते के तौर पर सत्तू का सेवन अधिक मुफीद होता है। सत्तू एक ऐसा खाद्य है, जिसमें नीबू और संतरा का रस मिला कर पीया जा सकता है। इस तरह अन्न और फल के रस दोनों का अद्भुत संगम बनता है। दो गिलास सत्तू पी लें, तो नाश्ते की जरूरत पूरी हो जाती है। दिन भर तरोताजा और हल्का महसूस करेंगे। सत्तू सहज ही बाजार में मिल जाता है। आमतौर पर लोग सत्तू का मतलब सिर्फ चने का सत्तू समझते हैं, पर सत्तू सही अर्थों में कई चीजों को मिला कर बनता है। पारंपरिक तरीका है कि जौ, चना, मूंग, मटर और मोठ को बराबर मात्रा में भून कर पीस लिया जाए। ऊपर से उसमें भुना हुआ जीरा पीस कर डाला जाए। मगर शहरों में ऐसा सत्तू बनाना मशक्कत भरा काम है। इसलिए जब भी सत्तू खरीदें तो चने के साथ जौ का सत्तू जरूर लें। दोनों को मिला कर रख लें। चने की तासीर गरम होती है, तो जौ की ढंडी। दोनों का मेल पेट के लिए उत्तम है।

सुबह नाश्ते के लिए एक बड़े बर्तन में तीन से चार चम्मच सत्तू लें। अगर उसे नमकीन पीना चाहते हैं, तो जरूरत भर का नमक मिलाएं। इसे मीठा भी पीया जा सकता है। मीठा पीने के लिए जरूरत भर चीनी डालें। वैसे सत्तू नमकीन ही पीएं, सेहत के लिए ठीक होता है। इसमें पुदीने के चार छह पत्ते बारीक काट कर डालें। एक चम्मच भुने हुए जीरे का पाउडर डालें और दो से तीन गिलास पानी डाल कर ठीक से घोल लें। सत्तू को ठीक से न मिलाया जाए तो उसमें गांठें बन जाती हैं, इसलिए उसे ठीक से मिलाएं। अब उसमें एक या दो नीबू का रस मिला दें। चाहें तो एक गिलास संतरे का रस भी डाल सकते हैं, स्वाद अच्छा आता है। संतरे का रस डालना हो, तो एक गिलास पानी कम मिलाएं। अगर संतरे का रस नहीं मिलाना चाहते, तो सत्तू के घोल में बारीक कटा हुआ थोड़ा-सा प्याज या गाजर भी मिला सकते हैं। इस तरह नाश्ते में अन्न, रस और सब्जी का बढ़िया मिश्रण मिलेगा। सत्तू पीने का फायदा यह है कि उसका फाइवर न सिर्फ पेट को साफ करता है, बल्कि आपको कई बार प्यास लगती है, आप पानी पीते हैं और पेट साफ रहता है।

हरा-भरा उपमा
नाश्ते के लिए उपमा सुपाच्य और उत्तम अहार है। इसे बनाने में अधिक मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। इसके लिए एक कटोरी सूजी यानी रवा को कड़ाही में एक चम्मच घी डाल कर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक भून लें। इसे हलवा के लिए सूजी भूनने समय जिस तरह अधिक घी की जरूरत होती है, वैसी नहीं होती। अगर आपको तेल-घी से परहेज है तो बिना घी के भी भून सकते हैं। अब दो काम करें। गाजर, चुकंदर, बीन्स, मटर के दाने, पत्ता गोभी, फूल गोभी आदि जो भी हरी सब्जी आप पसंद करते हों, बारीक काट कर कम से कम डेढ़ कटोरी की मात्रा में अलग रख लें। इसके अलावा धनिया पत्ता और कुछ हरी मिर्चें लेकर चटनी बना लें। अब एक कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें। राई और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाएं और सब्जियों को डाल कर तेज आंच पर दो मिनट तक पका लें। अब उसमें भुनी हुई सूजी डालें और दो गिलास पानी मिला दें। ऊपर से नमक और एक चम्मच धनिए की चटनी डालें और कढ़ाई को ढक कर धीमी आंच पर पकने दें। जब सूजी पूरी तरह पानी सोख ले और उसका दाना-दाना फूल जाए तो आंच बंद कर दें। यह अन्न और सब्जियों का सुंदर मेल आपके नाश्ते के लिए उत्तम है। कुछ लोग ओट खाना पसंद करते हैं। वे सूजी की जगह ओट का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सुपाच्य नाश्ता आपको दिन भर हल्का और प्रसन्न रखेगा। शरीर को जरूरी पोषण भी देगा।

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