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सेहत: नींद क्यों असमय आती?

विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा सोने से याद्दाश्त कमजोर होना, आलस बढ़ना, जीवन में उत्साह खत्म होना, शरीर हमेशा भारी रहना आदि परेशानियां बढ़ सकती हैं। सात घंटे से 10 घंटे तक की नींद परेशानी का सबब नहीं बनती लेकिन इससे अधिक होना गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए जरूरी है कि सामान्य नींद लें।

Author March 18, 2018 2:11 AM
प्रतीकत्मक तस्वीर।

यूं तो नींद लेना एक अच्छी आदत है। लेकिन यह नींद यदि असमय आती है तो बीमारी बन जाती है। सात से आठ घंटे की नींद लेना एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए आवश्यक है। लेकिन ज्यादा सोना या बेवजह नींद आना एक बीमारी है। जिसे हाइपरसोम्निया कहते हैं। यह एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें व्यक्ति को बेवजह और कभी भी नींद आती रहती है। ज्यादा सोने के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा सोने से याद्दाश्त कमजोर होना, आलस बढ़ना, जीवन में उत्साह खत्म होना, शरीर हमेशा भारी रहना आदि परेशानियां बढ़ सकती हैं। सात घंटे से 10 घंटे तक की नींद परेशानी का सबब नहीं बनती लेकिन इससे अधिक होना गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए जरूरी है कि सामान्य नींद लें। अगर नींद कभी-कभी परेशान करती है तो कोई परेशानी की बात नहीं है लेकिन यदि यह रोज की समस्या बन गई है तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ज्यादा नींद आना या बेवक्त नींद आने के कई कारण हैं। जिन्हें समझना जरूरी है।

1. मानसिक उथल-पुथल
जब कोई व्यक्ति मानसिक उथल-पुथल से पीड़ित होता है। मन एकाग्रचित नहीं होता है तब उसे ज्यादा नींद आती है। क्योंकि मन परेशान होने पर या तो बहुत अधिक नींद आएगी या नींद नहीं आएगी। जब नींद ठीक से नहीं आती है तब हम पूरे दिन ऊंघते रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि मन शांत और खुश रहे।

2. अधिक कार्बोहाइड्रेट लेना
जिन लोगों के खाने में ज्यादा कार्बोहाईड्रेट जाता है उन्हें ज्यादा नींद आती है। रात के अलावा दिन में भी उनकी पलकें झपकने लगती हैं। अगर आपके खाने में प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट अधिक है तो यह भी आपके अधिक नींद आने के कारण हो सकते हैं। प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट आपके शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ा देते हैं जिससे आपको अधिक नींद आती है। इसलिए अपने भोजन की सामग्री पर भी ध्यान दें। और संतुलित भोजन खाएं।

3. इडियोपैथिक हाइपरसोम्निया
हाइपरसोम्निया के कई प्रकार हैं जिनमें से एक इडियोपैथिक हाइपरसोम्निया है। ये भी एक बीमारी है। दि इंटरनेशनल क्लासीफिकेशन ऑफ स्लीप डिसॉर्डर्स ने इडियोपैथिक हाइपरसोम्निया को इस तरह परिभाषित किया है, ‘एक सामान्य या दीर्घकालीन रात्रि नींद और साथ में बहुत ज्यादा नींद।’ इसके मरीज रात में अपनी पूरी नींद लेने के बावजूद दिन में एक या दो घंटे नींद लेते हैं, और दिनभर उनींदापन महसूस करते हैं। इससे मरीज के प्रोफेशनल जीवन पर असर पड़ता है।

4. मोटापे का बढ़ना
जब आप ज्यादा सोते हैं तो अधिकतर समय बिस्तर पर ही निकाल देते हैं। इस वजह से आपके शरीर में वसा की मात्रा बढ़ने लगती है। हमारे शरीर की ऊर्जा वसा में तब्दील हो जाती है। इस वजह से आप मोटे होने लगते हैं और शरीर आलसी हो जाता है।

कैसे करें बचाव
किसी भी आदत को हमें अपनी लत नहीं बनाना चाहिए। कहते हैं हमारी आदत जो लत बन जाती है वह जहर के समान है। इसलिए कोई भी आदत जरूरत से ज्यादा होना जहर के समान है। ज्यादा नींद भी आपकी मौत का कारण बन सकती है। आप एक सामान्य नींद ले सकें इसके लिए निम्न उपाय अनपाएं।

1. कसरत करें
शरीर की थकान, आलस्य भगाने के लिए और दिन भर तरोताजा रहने के लिए हर रोज सुबह कसरत करें। इससे आपका मन खुश रहेगा और आपका मन काम में भी लगेगा।

2. सामान्य नींद लें
अगर आप बहुत अधिक समय काम में व्यस्त रहते हैं और आपको सामान्य नींद लेने का समय नहीं मिलता तो सबसे पहले आपको खुद को समय देना होगा। आपको अपने कामों को एक समयसारिणी के अनुसार करना होगा। ऐसा करने से आप का मन संतुलित होगा और आप सामान्य नींद यानी 7 से 8 घंटे की नींद ले पाएंगे।

3. संतुलित भोजन लें
आपने अक्सर देखा होगा कि जब आप भर पेट खाना खा लेते हैं तो आपको नींद ज्यादा आती है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि रात के समय हैवी डाइट न लें। अधिक जंक फूड शरीर में थकान पैदा करते हैं। इसलिए संतुलित भोजन ही लें।

4. सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं
कई बार जब हम अधिक तनाव में होते हैं तो नींद उड़ने के बजाए अधिक आती है। इसलिए जरूरी है कि हम तनाव में कम रहें और एक स्वस्थ व सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं।

5. एरोबिक्स करें
जिन लोगों को अधिक नींद आती है उन्हें एरोबिक्स करना चाहिए। एरोबिक्स करने से आपके शरीर में स्फूर्ति आती है। इसे करने से आप तरोताजा रहते हैं। और नींद नहीं आती है।

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