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सेहत: खर्रांटे की समस्या

जब हमारे गले का पिछला हिस्सा संकरा होता जाता है तब खर्रांटे की समस्या जन्म लेती है। दरअसल, जब गले का पिछला हिस्सा संकरा हो जाता है तब आॅक्सीजन उस रास्ते से होकर जाती है और तब आसपास के ऊतक कंपित होने लगते हैं और खर्रांटे आने लगते हैं।

Author March 11, 2018 3:00 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

आपकी बगल में लेटा व्यक्ति जोर-जोर से खर्रांटे ले रहा हो, तो आपको गुस्सा आना स्वाभाविक है, मगर उस व्यक्ति को नहीं मालूम कि उसे खर्रांटे आ रहे हैं और उसकी वजह से उसके आसपास के लोग परेशान हो रहे हैं। यों तो खर्रांटे लेना किसी को भी पसंद नहीं होता, पर जिस व्यक्ति को खर्रांटे आ रहे हैं वह खुद उनसे अनजान होता है। रात में सोते समय खर्रांटे आने की कई वजहें हैं। खर्रांटे आना कई बार एक बीमारी बन जाता है। इस बीमारी को स्लीप एपनिया भी कहा जाता है।

सांस के रास्ते में अवरोध
खर्रांटे आने की मूल वजह सांस के रास्ते में अवरोध को माना जाता है। जब हमारे शरीर में कार्बनडाइ आॅक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और आॅक्सीजन कम हो जाता है तब आॅक्सीजन की पूर्ति के लिए हम सांस लेने की कोशिश करते हैं और सांस के रास्ते में अवरोध आने की वजह से खर्रांटे आते हैं।

गले के पिछले हिस्से का संकरा होना
जब हमारे गले का पिछला हिस्सा संकरा होता जाता है तब खर्रांटे की समस्या जन्म लेती है। दरअसल, जब गले का पिछला हिस्सा संकरा हो जाता है तब आॅक्सीजन उस रास्ते से होकर जाती है और तब आसपास के ऊतक कंपित होने लगते हैं और खर्रांटे आने लगते हैं।

पीठ के बल सोना
जो लोग पीठ के बल सोते हैं उन्हें भी यह समस्या हो जाती है। जब पीठ के बल सोते हैं तो हमारी जीभ पीछे की ओर हो जाती है, जिससे वह तालू के पीछे मूर्धा पर जाकर लग जाती है और सांस लेने और छोड़ने में दिक्कत होती है। इस तरह हमारे ऊतक कंपन करने लगते हैं और खर्रांटे आने लगते हैं।

नाक में मांस बढ़ना
कुछ लोगों की नाक की हड्डी जब टेढ़ी हो जाती है या उसमें मांस बढ़ने लगता है तब उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है, जिससे खर्रांटे आने लगते हैं।

गर्दन छोटी होना
अगर किसी व्यक्ति की गर्दन ज्यादा छोटी है तो यह भी खर्रांटे आने की वजह बनता है।

नीचे वाले जबड़े का छोटा होना
अगर आपका नीचे वाला जबड़ा छोटा है तब भी खर्रांटे आते हैं। क्योंकि जब जबड़ा छोटा होता है तो लेटने के समय जीभ पीछे की ओर हो जाती है और सांस की नली बंद हो जाती है। जिससे सांस लेने और छोड़ने में दबाव पड़ता है, जिसके चलते कंपन होता और खर्रांटे आते हैं।

वजन बढ़ना
खर्रांटे आने का एक कारण वजन बढ़ना है। जब किसी व्यक्ति का वजन बढ़ता है तो गर्दन का मांस लटकने लगता है। मांस लटकने की वजह से सांस की नली पर दबाव बनता और सांस लेने में दिक्कत होती है।

ऐसे करें बचाव
दिन भर काम करने के बाद रात को चैन की नींद अगर खर्रांटे की वजह से न आए तो जो व्यक्ति खर्रांटे भर रहा है उस पर गुस्सा आने लगता है। अगर आप भी किसी के ऐसे ही खर्रांटे से परेशान हैं या अपने खर्रांटे से परेशान हैं तो इन खर्रांटों को ऐसे दूर किया जा सकता है।

’अगर आपका वजन ज्यादा है तो पहले वजन कम करिए, ताकि आपके खर्रांटे बंद हो सकें। वजन कम करने के लिए आप जिम भी जा सकते हैं या अपने डाइटीशियन से सलाह भी ले सकते हैं।

’रात के समय कम खाना खाएं ताकि वजन न बढ़े और आप सांस ठीक से ले पाएं।

’पानी कम पीने की वजह से भी खर्रांटे की समस्या पैदा होती है। जब हम कम पानी पीते हैं तब हमारी नाक की नली सूख जाती है। ऐसे में साइनस हवा की गति को श्वास तंत्र में पहुंचने के बीच में सहयोग नहीं कर पाता और सांस लेना कठिन हो जाता है। इसलिए खर्रांटे की समस्या बढ़ जाती है। इस वजह से ऐसे व्यक्ति को पानी अधिक पीना चाहिए।

’अगर आपको पीठ के बल सोने की आदत है तो उसे बदलें। इससे सांस की नली में रुकावट नहीं होगी। सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा करके सोएं। इससे आपकी जीभ और सांस की नली में रुकावट नहीं आएगी।

’अगर आपकी नाक का मांस बढ़ रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करें।

’अगर आप गर्भवती हैं तो भी आपको सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और खर्रांटे आएंगे। इसलिए ऐसे में करवट लेकर ही सोएं।

’जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें भी खर्रांटे की समस्या हो जाती है। धूम्रपान करने से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। तो अगर आपको भी खर्रांटे की समस्या है तो धूम्रपान छोड़ दें।

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