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बरसात में रसोई

बरसात में हर समय वातावरण में नमी बनी रहती है, जिससे घर के भीतर गंदगी चिपकने की आशंका रहती है। खासकर रसोई में तेल-मसाले, सब्जियों-फलों के रस और दूसरी तरह की चिकनाई के गिरने-फैलने से गंदगी चिपकने और फिर उसमें बैक्टीरिया पलने के खतरे अधिक होते हैं।

Author July 29, 2018 7:11 AM
बरसात में रसोई की सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

बरसात में हर समय वातावरण में नमी बनी रहती है, जिससे घर के भीतर गंदगी चिपकने की आशंका रहती है। खासकर रसोई में तेल-मसाले, सब्जियों-फलों के रस और दूसरी तरह की चिकनाई के गिरने-फैलने से गंदगी चिपकने और फिर उसमें बैक्टीरिया पलने के खतरे अधिक होते हैं। इसलिए बरसात में रसोई की सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। बरसात में रसोई की साज-संभाल कैसे करें, पेश हैं रवि डे के सुझाव।

पुराने समय में लोग रसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान मानते थे, इसलिए वहां सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता था। तब मिट्टी के चूल्हे वाली रसोई होती थी, पर लोग भोजन पकाने के बाद रसोई को लीप कर साफ जरूर करते थे। चूल्हे को कभी जूठा नहीं छोड़ते थे। रसोई में किसी को जूते पहन कर या गंदे पैर नहीं जाने दिया जाता था। महिलाएं नहा-धोकर ही भोजन पकाती थीं। पर जबसे गैस वाले चूल्हे आए हैं, आधुनिक रसोई का चलन बढ़ा है, अक्सर लोगों को रसोई की सफाई के मामले में लापरवाह देखा जाता है। चूल्हे पर गिरा हुआ भोजन दिन भर चिपका रहता है। शहरों में चूंकि माता-पिता की व्यस्तता के चलते बच्चे भी अपने लिए कुछ खाने-पीने की चीजें बनाते रहते हैं, वे चूल्हे और रसोई को सबसे अधिक गंदा करते हैं। जिन घरों में कामवालियां भोजन पकाती हैं, प्राय: उनमें भी रसोई की सफाई को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई देती। यह लापरवाही या सफाई के प्रति अनदेखी बरसात में बीमारियों को जन्म देती है।

यों रसोई की सफाई पर हर समय ध्यान देना चाहिए, पर बरसात के समय इसका विशेष खयाल रखना चाहिए। बरसात के समय हवा में लगातार नमी बनी रहती है। आसपास की जगहों पर पानी जमा रहने, कूड़े-करकट के सड़ते-गलते रहने की वजह से उनमें बैक्टीरिया पैदा होते हैं। इन दिनों में कुछ घासों के फूलों से भी बैक्टीरिया पैदा होते हैं, जो हवा में तैरते रहते हैं। रसोई में नम हवा की वजह से तैलीय चीजों, फलों-सब्जियों के रस आदि के चिपकने और उनमें गंदगी जमा होने की संभावना अधिक होती है। इस गंदगी में बाहर का बैक्टीरिया चिपकते और फिर भोजन में शामिल होकर पेट संबंधी अनेक बीमारियों को जन्म देते हैं। इसलिए इस मौसम में रसोई की विशेष रूप से लगातार सफाई होती रहनी चाहिए।

चूल्हे और चिमनी की सफाई

रसोई में चूल्हा सबसे महत्त्वपूर्ण उपकरण है। भोजन पकाते समय सबसे अधिक गंदगी जमा होने का खतरा इसी पर होता है। इसलिए जब भी कुछ भोजन पकाएं, यहां तक कि चाय बनाएं, तो चूल्हे को पोंछ कर साफ जरूर करें। अगर भोजन का कोई भी कण चूल्हे पर चार-पांच घंटे के लिए चिपका रह गया, तो वह बैक्टीरिया का कारण बन सकता है। इसलिए हमेशा भोजन बनाने के बाद साबुन के घोल से चूल्हे को साफ करें। सूखे कपड़े से उसे पोंछें।

पर भोजन पकाने के बाद चूल्हे को साफ कर देने भर से साफ-सफाई का काम पूरा नहीं हो जाता। आपका चूल्हा जितना आधुनिक, जितना सुविधाजनक होगा, उसमें गंदगी जमा होने के खतरे उतने ही अधिक होंगे। अक्सर चूल्हे की सफाई करने के बाद भी उनके नॉब यानी गैस खोलने बंद करने वाले बटन और गैस की पाईप पर चिकनाई और मैल जमी रह जाती है। हफ्ते में एक दिन गरम पानी में साबुन का घोल डालें और चूल्हे की नॉब, बर्नर वगैरह को निकाल कर उसमें धोएं। नॉब के भीतर जमी चिकनाई उसे कठोर बना देती है, जिससे उसे घुमाने में दिक्कत आती है। इस तरह सफाई से चूल्हे की आयु बढ़ती है और रसोई में बैक्टीरिया पनपने का खतरा भी टल जाता है।

इसी तरह महीने में कम से कम एक बार चिमनी की जालियों को निकाल कर गरम पानी और साबुन के घोल से सफाई जरूर करें। चिकनाई और धूल वगैरह जमा होने से चिमनी की जालियां बंद हो जाती हैं। इस तरह वे ठीक से धुएं को खींच नहीं पातीं और चिमनी के मोटर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। फिर गंदगी जमा रहने से उनमें बैक्टीरिया पनपने की आशंका भी बनी रहती है।

बर्तन-जार-मसालेदानी

रसोई में रखे अनाज, मसाले, घी-तेल के बर्तनों पर भी इस मौसम में चिकनाई जम कर कठोर हो जाती है। उन्हें सूखे कपड़े से सामान्य तौर पर पोंछने से उनकी ठीक से सफाई नहीं हो पाती। इसलिए महीने में एक दिन इन सबकी भी सफाई जरूरी होती है। गरम पानी में साबुन का घोल डाल कर उन्हें पोछें और फिर ठीक से सुखा कर रखें। रसोई की अलमारियों के कांच, उनके पैनल वगैरह की भी इसी तरह सफाई जरूरी है, नहीं तो अक्सर जार वगैरह रखने की जगह पर चिकनाईयुक्त गंदगी जमती रहती है। भोजन पकाते समय अक्सर हम मसालेदानी को आटे आदि वाले हाथों से उठाते हैं, जिससे उनके कण उस पर चिपके रह जाते हैं और नमी पाकर वे बैक्टीरिया का कारण बनते हैं। इसलिए मसालेदानी की भी नियमित सफाई होती रहनी चाहिए।

उपकरणों का रखरखाव

रसोई के उपकरणों में अवन, मिक्सर-ग्राइंडर, इलेक्ट्रिक केतली, कुकिंग रेंज, कुकर वगैरह की सफाई पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता। खासकर मिक्सर ग्राइंडर के जारों का रखरखाव समुचित नहीं हो पाता। जब मिक्सर में कुछ पीसें उसके जार के रबड़ निकाल कर ठीक से सफाई करें। चटनी वगैरह पीसने के बाद प्राय: उनकी रबड़ वाली जगहों पर कुछ न कुछ चिपका रह जाता है। इसलिए रबड़ निकाल कर ठीक से साबुन से धोएं, अगर किसी जगह से गंदगी साफ नहीं हो पा रही है, तो वहां पुराने टुथब्रश का उपयोग करते हुए सफाई करें, नहीं तो सिर्फ पानी से धोकर रख देने से उसमें बैक्टीरिया का जमावड़ा शुरू हो जाता है। इसी तरह फलों के रस निकालने के बाद ठीक से सफाई करें, क्योंकि फलों-सब्जियों के रस से बहुत जल्दी और तेजी से बैक्टीरिया पनपते हैं।

अक्सर लोग कुकर की सफाई में समुचित ध्यान नहीं रखते। कुकर में गंदगी जमा होने की संभावना सबसे अधिक उसके ढक्कन के रबड़ यानी गास्केट और सीटी में होता है। जब भी कुकर को धोएं, उसके ढक्कन को हमेशा सावधानी से धोएं। कभी गास्केट लगे हुए ढक्कन को न धोएं, उसे निकाल लें। सीटी को खोल कर अंदर-बाहर से धोएं। उसके भाप निकलने वाले छेदों को ब्रश या लकड़ी की तीली से साफ कर धोएं। कुकर से भोजन पकाने में जितनी आसानी होती है, उसकी सफाई ठीक से न हो पाने पर बीमारियां फैसले का खतरा भी उससे उतना ही अधिक होता है।

इसके अलावा जूठे बर्तनों को ज्यादा समय तक सिंक में रखें। उन्हें धो लिया करें। बर्तन धोने के बाद रोज सिंक और उसकी जालियों को भी उसी तरह साबुन से धोएं, जैसे बर्तन धोते हैं, क्योंकि उनमें जूठन चिपके रहने से बैक्टीरिया सबसे अधिक पलते हैं।

अनाज, दालें और मसालों वगैरह का भंडारण

बरसात में सबसे अधिक डर अनाज, दालों, बड़ियों, मसालों आदि में कीड़े पनपने का होता है। हवा में नमी की वजह से अनाज, दालों, मसालों वगैरह में कीड़े पैदा हो जाते हैं। इसलिए अनाज, मसाले वगैरह रखने के लिए हमेशा एअर टाइट बर्तनों का ही इस्तेमाल करें। पर इससे भी बर्तनों के भीतर नमी पहुंचने का खतरा समाप्त नहीं हो जाता। जब आप उन्हें खोलते-बंद करते हैं, तो नमी पहुंच ही जाती है। इसलिए इस मौसम में जब भी अनाज-मसाले वगैरह खरीदें, थोड़ा-थोड़ा खरीदें। छोटे-छोटे पैकेट में खरीदें और हफ्ते भर तक इस्तेमाल हो सकने लायक ही चीजों को छोटे बर्तनों में रखें, बाकी को पैकेटों में बंद रहने दें। एहतियात के लिए अनाज, दालें, मसाले रखने वाले बर्तनों में नीम के सूखे पत्तों को महीने कपड़े में बांध कर डाल सकते हैं, इससे कीड़े लगने की आशंका कम हो जाती है। इसके अलावा बाजार में अनेक तरह की औषधीय गोलियां मिलती हैं, जिन्हें रखने से अनाज, दालों वगैरह में कीड़े नहीं लगते।

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