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कविताएंः ‘बच गया’ और ‘ये तीसरे लोग’

दिविक रमेश की कविता

Author October 28, 2018 6:50 AM
प्रतीकात्मक चित्र

दिविक रमेश

बच गया

घातक था प्रहार
बच गया।
विश्वास
न उनको हुआ
न मुझे।
चमत्कार था!
संभला
तो देखा
कवच की तरह खड़ी थी
तनी
मेरी कविता
मुझको बचाए।
खड़ी होती हैं तनी
जैसे कविताएं
कवच-सी
पूरी मनुष्यता को बचाए।
मैंने देखा
आकाश की ओर
फिर पृथ्वी को
पृथ्वी के वृक्षों, नदियों, पहाड़ों, समुंद्रों को
थलचर, जलचर और वायुचरों को
देखा मां को, पिता को, हर संबंध को
और प्रणाम किया हर उसको
जो बचाता है।
जो बचाता है
खुद हमसे भी
हमको।

ये तीसरे लोग

कुछ लोग आपको पूछते हैं
कुछ लोग आपको नहीं पूछते
कुछ लोग आपको उपेक्षित करते हैं
ये तीसरे ही
सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं।
कुछ लोग आपको चाहते हैं
कुछ लोग आपको नहीं चाहते
कुछ लोग आपको चाहने का ढोंग करते हैं
ये तीसरे ही
सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं।
कुछ लोग आपके सामने मिमियाते हैं
कुछ लोग आपके सामने नहीं मिमियाते
कुछ लोग अपना मिमियाना बस भुनाते हैं
ये तीसरे ही
सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं।
कुछ लोग आपको पूजते हैं
कुछ लोग आपको नहीं पूजते
कुछ लोग आपसे ही ऐंठ कर आपकी प्रतिमा लगाते हैं
ये तीसरे ही
सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं।

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