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सेहतः जब सताए जुकाम

सामान्य जुकाम के लिए कोई इलाज नहीं है लेकिन इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है।

Author April 2, 2017 2:04 AM
सामान्य जुकाम को नैसोफेरिंजाइटिस, राइनोफेरिंजाइटिस, अत्यधिक नजला या जुकाम के नाम से भी जाना जाता है।

सामान्य जुकाम को नैसोफेरिंजाइटिस, राइनोफेरिंजाइटिस, अत्यधिक नजला या जुकाम के नाम से भी जाना जाता है। यह ऊपरी श्वसन तंत्र में आसानी से फैलने वाला संक्रामक रोग है जो नासिका को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में खांसी, गले की खराश, नाक से स्राव (राइनोरिया) और ज्वर होना शामिल है। लक्षण आमतौर पर सात से दस दिन के भीतर समाप्त हो जाते हैं। हालांकि कुछ लक्षण तीन सप्ताह तक भी रह सकते हैं। ऐसे दो सौ से अधिक विषाणु होते हैं जो जो सामान्य जुकाम का कारण बन सकते हैं। राइनोवायरस इसका सबसे आम कारण है। नाक, साइनस, गला या कंठनली अक्सर जुकाम में प्रभावित होती है। सामान्य जुकाम मुख्य रूप से नासिका, श्वासनलिका और साइनस को प्रभावित करता है। यह लक्षण स्वयं विषाणुओं द्वारा ऊतकों को नष्ट किए जाने से नहीं, बल्कि संक्रमण के प्रति हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया के कारण उत्पन्न होता है। संक्रमण को रोकने के लिए हाथ धोना मुख्य तरीका है।

सामान्य जुकाम के लिए कोई इलाज नहीं है लेकिन इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है। यह मनुष्यों में सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है। औसत वयस्क को प्रतिवर्ष दो से तीन बार जुकाम होता है। औसत बच्चे को प्रतिवर्ष छह से लेकर बारह बार जुकाम होता है। यह संक्रमण प्राचीन काल से मनुष्यों में होते आ रहे हैं। यों तो बंद नाक को साफ करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति है, लेकिन विशेषज्ञ भी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए है कि यह तरीका सही है या गलत। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि जबरदस्ती नाक साफ करने से नाक में दबाव निर्माण हो सकता है और आपके साइनस में बलगम को फंसा देता हैं और इस वजह से साइनस संक्रमित हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि जुकाम में नाक को जबरन साफ करना अहम है, क्योंकि ऐसा करने से नाक में जमा हुआ अतिरिक्त बलगम निकल जाएगा और आपको बंद नाक से राहत मिलेगी। ध्यान रहे जब भी नाक साफ करने की जरूरत हो तो आप थोड़े आराम से नाक को साफ करें ताकि नाक में अतिरिक्त दबाव न पड़े और किसी भी प्रक्रिया को सलाह से ही उपयोग में लाएं। जैसे नाक साफ करते वक्त एक छिद्र को उंगली से दबकर रखें ताकि दूसरा छिद्र खुल जाए, फिर दूसरे छिद्र के लिए यही प्रक्रिया दोहराएं। जितना हो सके सुंघनी और नसवार से बचें, क्योंकि ऐसा करने से बलगम वापस मस्तिष्क में चला जाता है। नाक साफ करने के बाद हमेशा हाथ धोएं ताकि आप जुकाम के विषाणु को संक्रमित होने से रोकें।

शहद और नींबू की चाय पीना, जुकाम से निजात पाने का एक सरल और प्रभावी उपाय है, जो लंबे समय से चला आ रहा है। शहद से गले की खराश कम होने में मदद मिलेगी और नीबू से बंद नाक खुल जाएगी। विटामिन सी आमतौर पर संक्रमण से लड़ने के लिए मददगार साबित होता है। चाय का प्रभाव तुरंत होना चाहिए ताकि कुछ घंटों के लिए जुकाम से आराम मिले। जुकाम के विषाणु यों तो ठंडे तापमान में ही पनपते हैं और इस वजह से ठंड नाक में संक्रमित होते हैं। एक अध्ययन से पता चला है कि गरम हवा में सांस लेने से जुकाम के लक्षण में कमी आती है। आधे घंटे के लिए बंद नाक को थोड़े गरम हाथ से बंद करें और मुंह से सांस लें इससे जुकाम के विषाणु का प्रभाव कम हो सकता है।

साइनस को साफ करना जरूरी है। साइनस को साफ करने का लोकप्रिय तरीका जल-नेति भी है। इससे बलगम नाक की नली में ही पतला हो जाता है और आसानी से बाहर निकल जाता है। नमक और बेकिंग सोडा वाले गुनगुने पानी के गरारे से फायदा पहुंचता है। यह पुरानी कहावत है कि जुकाम को पसीने से भगाएं। लेकिन इस बात को साबित करने के लिए वैज्ञानिक तथ्य भी हंै। यह दावा किया गया है कि जुकाम के शुरुआती लक्षणों के वक्त अगर ऐसा शारीरिक श्रम किया जाए, जिसमें काफी पसीना निकल जाए तो जुकाम अपने आप कम हो जाता है। अगर बलगम ज्यादा गाढ़ा है और उसे निकालने में मुश्किल आ रही है तो कफ-सिरप आदि का प्रयोग किया जा सकता है। इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि चिकन सूप पीने से जुकाम की गति कम हो जाती है। सूप में थोड़ी सी लाल मिर्च भी डाल जा सकती है। कुछ लहसुन की कलियों को एक छोटे चम्मच शहद के साथ दरदरा पीस लें और उसे तुरंत चबाकर निगल लें। इससे भी राहत मिलती है।

आहार में विटामिन सी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। जितना संभव हो उतना मानवीय संपर्क से बचें। अगर बंद नाक या बहती नाक की वजह से आप सो नहीं पा रहे हैं तो 45 डिग्री के कोण पर अपनी छाती और सिर को अतिरिक्त तकिए के सहारे रखकर सोएं। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आपका जुकाम बढ़ रहा है और इस कारण छींके व खांसी हो रही है तो विश्राम करना जरूरी हो जाता है। इससे जुकाम के वायरस दूसरों में संक्रमित नहीं होंगे। ठीक से विश्राम करने की वजह से आप जल्दी ठीक हो सकते हैं। नहाना जरूरी लगे तो गरम पानी से नहाएं। इससे बहती नाक से राहत मिलेगी।
छींकने के बाद हाथ जरूर धोना चाहिए। एक कारगर तरीका भाप लेना भी रहता है। ऐसा करने से बंद नाक खुल जाएगी। अगर आपको रात में ज्यादा खांसी आ रही है तो पैरों को ढंक कर सोना चाहिए। अगर जुकाम के लक्षण सात दिन से ज्यादा दिन तक रहें तो चिकित्सक के पास जाना चाहिए। तेज बुखार और ठंड लगना किसी और गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि नेजल जैल जैसी औषधियां सूंघने की क्षमता को कम या समाप्त कर सकती है। १

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