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सेहत: पसीने वाले दिनों में स्वास्थ्य की देखभाल, उमस में छूटता सेहत का पसीना

उमस के मौसम में लोग बार-बार नहाना चाहते हैं। लेकिन बार-बार नहाने से जुकाम होने का खतरा हो सकता है। शाम में या रात को सोते वक्त नहाना ज्यादा जरूरी लगे तो हल्के गर्म पानी का इस्तेमाल करें। रात में नहाने के तुरंत बाद तेज पंखे या एसी कमरे में शरीर को न सुखाएं। कोशिश करें कि स्नानघर से मोटे तौलिए से अच्छे तरीके से देह सुखा कर ही निकलें।

उमस वाले मौसम में शरीर का विशेष तौर पर देखभाल की जरूरत पड़ती है।

कोरोना संकट के साथ शुरू हुआ यह साल सेहत के लिए कई चुनौतियां लेकर आया है। सितंबर महीना बीतने को है लेकिन चरम पर पहुंची उमस और गर्मी कई मुश्किलें पैदा कर रही हैं। इस उमस और गर्मी की तुलना जून और जुलाई वाली गर्मी के तरीकों से नहीं की जा सकती है। खास कर कोरोना को ध्यान में रखते हुए अभी कई तरह की सावधानी बरतने की जरूरत है।

जुकाम और बुखार
जुकाम और बुखार एक सामान्य सी चीज है जो किसी को भी, कभी भी हो सकता है। लेकिन अभी इससे बचना इसलिए जरूरी है कि अस्पतालों पर कोरोना के मरीजों के इलाज का बोझ है और हम सब पहले की तरह अस्पतालों के चक्कर नहीं लगा सकते हैं। इसलिए सितंबर के अंत वाली गर्मी में फ्रिज का ज्यादा ठंडा किया हुआ पानी पीने से बचें। सादा पानी पीना ही सुरक्षित है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि जो पानी आप पी रहे हैं, कहीं वो दूषित तो नहीं है। अगर ऐसा है तो शुद्ध पेयजल का बंदोबस्त आपको फौरी तौर पर कर लेना चाहिए।

उमस के मौसम में लोग बार-बार नहाना चाहते हैं। लेकिन बार-बार नहाने से जुकाम होने का खतरा हो सकता है। शाम में या रात को सोते वक्त नहाना ज्यादा जरूरी लगे तो हल्के गर्म पानी का इस्तेमाल करें। रात में नहाने के तुरंत बाद तेज पंखे या एसी कमरे में शरीर को न सुखाएं। कोशिश करें कि स्नानघर से मोटे तौलिए से अच्छे तरीके से देह सुखा कर ही निकलें। अगर बालों को गीला किया है तो उसके पूरी तरह सूखने के बाद ही बिस्तर पर सोने के लिए जाएं नहीं तो एसी चलने से गीले बालों के कारण जुकाम या सिरदर्द की समस्या हो सकती है।

सूती और ढीले कपड़े
उमस के कारण त्वचा संबंधी दिक्कत भी हो सकती है। पसीने से होने वाली परेशानी से बचने के लिए सूती और ढीले कपड़ों को ही तरजीह दें। कपड़ों में सख्त बंधन जितना कम हो उतना बेहतर। खास कर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के कपड़ों पर भी ध्यान दें। बच्चों को खेलने-कूदने के कारण पसीना ज्यादा आता है तो बुजुर्गों के एक जगह ज्यादा देर बैठे रहने या फिर लेटे रहने के कारण शरीर के खास अंगों पर पसीने का ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है।
अगर बुजुर्ग और बच्चे आप पर निर्भर हैं तो पसीने की सफाई का खास ख्याल रखें। पसीना आने वाली जगहों पर दिक्कत आ रही है तो चिकित्सक की सलाह से पाउडर या किसी अन्य मलहम का इस्तेमाल करें। बुजुर्गों की त्वचा से संबंधी दिक्कतों को शुरू में नजरअंदाज करेंगे तो यह बाद में उनके लिए काफी तकलीफदेह भी हो सकती है।

व्यायाम और खानपान
उमस ज्यादा हो तो इस बात का ध्यान रखें कि आप अपनी ओर से ज्यादा पसीना न बहाएं। बहुत देर तक पसीना बहाने वाला व्यायाम घातक हो सकता है। कसरत के बाद नींबू पानी और नारियल पानी का सेवन करें। पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। खाने में फल और सलाद की प्रचुर मात्रा लें। ज्यादा तेल मसालों और चटपटे खाने से परहेज करें। मौसमी सब्जियों का अपनी रुचि और सेहत की खास जरूरतों के हिसाब से इस्तेमाल करें।

डेंगू का भी डंक
कोरोना आया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य परेशानियां गायब हो गई हैं। सितंबर में Þडेंगू के मामले काफी बढ़ गए हैं। इसलिए अदृश्य कोरोना ही नहीं, दिखने वाले मच्छरों से भी बचाव का पूरा इंतजाम करें। आम तौर पर इस मौसम के आते-आते कूलर पैक हो जाया करते थे लेकिन अभी भी बहुत से घरों में इसका इस्तेमाल हो रहा है। कूलर के पानी की सफाई का खास ध्यान रखें। इन दिनों लोग बालकनियों और छतों पर बागवानी भी खूब कर रहे हैं। ध्यान रखें कि गमलों या कहीं और पानी नहीं जमा हो ताकि डेंगू के मच्छर पनप नहीं पाए। दरवाजों और खिड़कियों की जालियां दुरुस्त रखें। बच्चों और बुजुर्गों के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।

एक बात जो खासतौर पर सब लोगों को समझनी चाहिए वह यह कि मच्छर भगाने के रासायनिक सामानों के इस्तेमाल से बेहतर है कि रात में सोते समय सभी मच्छरदानी का ही इस्तेमाल करें। हाउसिंग सोसायटी या मोहल्ले की गलियों में फॉगिंग करवाएं। (यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें)

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