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सेहत: धुएं से दुश्वारियां

जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है, इसके अनेक दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। स्मॉग भी बढ़ते प्रदूषण का ही एक खतरनाक रूप है।

प्रतीकात्मक चित्र

सीने में जलन आंखों में तूफान-सा क्यों है/ इस शहर में हर शख्स परेशान क्यों है।’… ‘गमन’ फिल्म की ये पंक्तियां बढ़ते स्मॉग पर जैसे सटीक बैठती हैं। स्मॉग के कारण आज हर किसी की आंखों में जलन हो रही है। सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है। अब सूरज डूबने से पहले ही शाम हो जाती है। वायु में हर तरफ धुंध छा जाती है। सब धुंधला दिखने लगता है। आजकल खराब वायु गुणवत्ता अखबारों के पृष्ठ की खबरें बन रहा है। जैसे-जैसे प्रदूषण बढ़ रहा है, इसके अनेक दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। स्मॉग भी बढ़ते प्रदूषण का ही एक खतरनाक रूप है।

क्या है स्मॉग

धुआं यानी स्मोक और कुहरा यानी फॉग से मिल कर बना स्मॉग वायु प्रदूषण का ही एक रूप है। इसे धुंआ और कुहासा से मिलने की वजह से धुआंसा भी कहा जाता है। जब गाड़ियों, कारखानों आदि से हानिकारक रसायन निकलते हैं और हवा में मिल जाते हैं तब वह स्मॉग बन जाता है। यह स्मॉग कोहरा नहीं होता है, बल्कि इसमें प्रदूषण फैलाने वाले छोटे कण मिले होते हैं। स्मॉग के कारण लोगों को गंभीर परिणाम झेलने पड़ते हैं।

परेशानियां

सांस की दिक्कत – स्मॉग बढ़ने के कारण वातावरण में जहरीलापन फैल जाता है। जो वायु प्राणवायु हो सकती थी वह आज प्रदूषण के कारण प्राणों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। स्मॉग या धुंध बढ़ने से अस्थमा के रोगियों को परेशानी अधिक झेलनी पड़ती है। इस स्मॉग की वजह से उन्हें सांस की बीमारी हो जाती है और उनका दम घुटने लगता है।

आंखों में जलन – पिछले कुछ साल से हवा में रासायनिक जहरीलेपन का स्तर बढ़ता जा रहा है। इससे लोगों को तरह-तरह की परेशानियां हो रही हैं। इनमें से एक आंखों में जलन भी है। आप जब भी घर से बाहर निकलते हैं, तो आपको आंखों में अजीब सी जलन महसूस होती है, जिससे आप परेशान हो जाते हैं।

चिड़चिड़ापन – आंखों में जलन या सांस ठीक से ली जा पाने पर आपका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे मौसम में कहीं घूमने पर भी समस्या हो जाती है।

फेफड़ों को नुकसान – जो लोग अधिक समय तक व्यायाम, जॉगिंग या कोई और शारीरिक गतिविधि करते हैं तो उनकी श्वसन दर बढ़ जाती है, जिससे ज्यादा हवा फेफड़ों में जाती है। पराली जलाने, कारखानों की चिमनियों आदि से निकले धुएं से जो स्मॉग वातावरण में फैल रहा है वह फेफड़ों को अधिक नुकसान पहुंचा रहा है।

खांसी – स्मॉग के कारण फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है। इस धुंध की वजह से ही खांसी भी होती है। जब भी हम टहलते या दौड़ते हैं तो सांस की समस्या के साथ खांसी भी हो जाती है। इनके अलावा बाल झड़ना, दिल की बीमारियां, नाक-कान गले में संक्रमण आदि समस्याएं हो सकती हैं।

बचाव

मास्क पहनें – स्मॉग से बचने का सीधा-सा उपाय है कि जब भी आप घर से बाहर निकलें तो मास्क पहन कर निकलें। मास्क आपके शरीर में जहरीली हवा जाने से रोकेगा।

बाहर जाने से बचें – अगर बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर कम ही निकलें। जितना आप घर से बाहर जाएंगे, उतना ही स्मॉग के सीधे संपर्क में आएंगे।

सुबह की कसरत कम करें – सुबह-सुबह अगर आप खुद को तंदुरुस्त रखने के लिए किसी पार्क में जाकर कसरत करते हैं, तो अब इस गतिविधि को कम कर दीजिए। क्योंकि सुबह और शाम स्मॉग अधिक होता है।

पौधे लगाएं – जेड और स्पाइडर ऐसे पौधे हैं, जो दूषित हवा को साफ करने में मदद करते हैं। इसलिए इन पौधों को अपने घरों में जरूर लगाएं। हो सके तो अधिक से अधिक पौधे लगाएं, क्योंकि पौधे वातावरण के लिए लाभदायक होते हैं।

वाहनों का कम इस्तेमाल – स्मॉग को बढ़ाने में एक बड़ा कारक वाहनों से निकलने वाला धुंआ है। इसलिए कम से कम वाहन का प्रयोग करें। हो सके तो अपनी गाड़ी का प्रयोग न करके सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें।

खानपान – गुड़, चना, शहद और लहसुन का रोज सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसलिए इनका रोज सेवन करें और स्मॉग से होने वाली परेशानियों से छुटकारा पाएं।

सावधानी

बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें

इस जहरीली हवा से बच्चे और बुजुर्ग अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक मजबूत नहीं होती। साथ ही दमे के मरीज और गर्भवती महिलाओं को भी इस मौसम में अपना खास खयाल रखना चाहिए।

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