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गीता की राजनीति या राजनीति में गीता

देश के पांच सौ चौहत्तर जिलों की जिस मिट्टी से गीता उपदेश स्थल पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा तैयार की जानी थी, वह एक साल से कूडे़दान में रखी है और इस मिट्टी को बुत बनने का इंतजार है।

Author Published on: December 3, 2017 5:42 AM
मिट्टी से बनना है विराट स्वरूप।

गीता में दिए गए राजनीति के संदेश के उदाहरण तो नेता अक्सर सार्वजनिक मंचों से देते रहे हैं, लेकिन गाय और गीता को आगे रख कर हरियाणा में सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी ने कुरुक्षेत्र में आयोजित गीता जयंती समारोह का पूरी तरह से राजनीतिकरण कर दिया है। हालांकि यह आयोजन कई दशकों से हो रहा है, लेकिन यह पहला मौका है, जब समूचा कार्यक्रम सियासत की भेंट चढ़ गया। संजीव शर्मा ने अपनी पड़ताल में इस बात का खुलासा किया है कि किस तरह पिछले तीन वर्षों से हरियाणा सरकार गीता और भगवान कृष्ण के नाम पर राजनीति कर रही है।

जिस मिट्टी से बननी थी भगवान कृष्ण की प्रतिमा, वह कूड़ेदान की बढ़ा रही शोभा।’  हरियाणा की वर्तमान भाजपा सरकार के मंत्री अक्सर सार्वजनिक मंचों के माध्यम से दावा करते हैं कि उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश में गीता का प्रचार सबसे ज्यादा हुआ है। इसके बावजूद हकीकत कुछ और ही है। देश के पांच सौ चौहत्तर जिलों की जिस मिट्टी से गीता उपदेश स्थल पर श्रीकृष्ण की प्रतिमा तैयार की जानी थी, वह एक साल से कूडे़दान में रखी है और इस मिट्टी को बुत बनने का इंतजार है। हरियाणा सरकार ने पिछले साल पहली बार गीता जयंती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने का बीड़ा उठाया था। कुरुक्षेत्र में आने वाले हर भारतवासी को यहां आकर अखंड भारत का अहसास हो, इसके लिए पांच सौ चौहत्तर जिलों के लोगों को सरकारी खर्च पर लाने-ले जाने और उन्हें ठहराने के साथ आवासीय सुविधाओं के प्रबंध किए गए। पांच सौ चौहत्तर जिलों के लोगों को आमंत्रित करने का मूल कारण गीता में भगवान श्रीकृष्ण के पांच सौ चौहत्तर श्लोकों के आधार पर रहा। देश के इन सभी जिलों से आए लोगों को अपने साथ गीता का एक श्लोक, अपने जिले की मिट्टी, पानी और पारंपरिक वेशभूषा में आने को कहा गया था। इस श्लोक को इन्होंने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती के दौरान अपने राज्य की पारंपरिक वेशभूषा धारण करके जहां गीता का एक श्लोक पढ़ा, वहीं अपने-अपने राज्य के जिले की मिट्टी को भी कुरुक्षेत्र में भेंट किया।

उस समय मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने दावा किया था कि इन जिलों की इस मिट्टी से न केवल गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में भगवान श्रीकृष्ण की भव्य सुंदर प्रतिमा तैयार की जाएगी, बल्कि प्रतिमा तैयार होने पर यहां आने वाले हर भारतीय को एक गौरव का अहसास होगा। इस घोषणा को एक साल बीत चुका है, लेकिन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के ज्यादातर अधिकारियों को यह तक मालूम नहीं कि भगवान कृष्ण की प्रतिमा बनाने के लिए देश भर से आई मिट्टी इस समय कहां है। जब मिट्टी के बारे में जानकारी जुटाई गई, तो मालूम हुआ कि हरियाणा शिक्षा विभाग की एक साइंस लैब में इस मिट्टी को बड़े-बड़े कूडेÞदानों में भर कर रखा गया है। हैरानी की बात है कि इस आयोजन से जुड़े अहम लोग भूल चुके हैं कि वह मिट्टी आखिर है कहां।

मिट्टी से बनना है विराट स्वरूप

देश के पांच सौ चौहत्तर जिलों की एक क्विंटल चौदह किलो और आठ सौ ग्राम माटी के मिश्रण से भगवान श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप तैयार कर यह प्रतिमा ज्योतिसर में लगनी है। इसके लिए पच्चीस राज्यों और सात केंद्र शासित राज्यों से पांच सौ चौहत्तर प्रतिनिधि दो-दो सौ ग्राम मिट्टी लेकर आए थे। इस अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती में भले अब इन जिलों के प्रतिनिधि नहीं बुलाए गए हों और गीता के श्लोक नहीं गूंजे हों, लेकिन अपने जिलों की पावन मिट्टी लेकर आए लोगों को यह इंतजार तो जरूर होगा कि जिस मिट्टी को वह लेकर गए थे, उसका आखिर हुआ क्या?
सर्वशिक्षा अभियान के जिला परियोजना अधिकारी अरुण आश्री के मुताबिक गीता समरस भारत विषय पर देश के पांच सौ चौहत्तर जिलों के प्रतिनिधियों की सिर्फ व्यवस्था का जिम्मा उनके कंधों पर था। उन्होंने बताया कि इस मिट्टी को दिल्ली से आए दीप जी ने एकत्रित किया था। विभाग से मिट्टी और पारंपरिक वेशभूषा रखने के लिए जगह मांगी गई थी, जिसे विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला में सुरक्षित रखा गया है। इस प्रयोगशाला में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक परिधान भी डिब्बों में बंद करके रखे गए हैं, जिन्हें पिछले वर्ष गीता जयंती आयोजन पर प्रतिनिधियों ने धारण किया था। उस वक्त इन परिधानों की प्रदर्शनी लगाने की भी बात कही गई थी, लेकिन अब तक इस बारे में कुछ नहीं हुआ।

तीन वर्ष में केवल आधारशिला

हरियाणा सरकार ने सत्ता में आने के बाद कुरुक्षेत्र के बारे में सबसे पहली घोषणा यहां भगवान कृष्ण की विराट प्रतिमा लगाने की थी। सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं, प्रतिमा स्थापना तो अभी दूर की बात है, इसकी आधारशिला पिछले हफ्ते राष्टÑीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने रखी है। आठ करोड़ रुपए की लागत से भगवान कृष्ण की प्रतिमा को लगा कुरुक्षेत्र को अलग पहचान देने का मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। लेकिन बेलगाम अफसरशाही तीन साल से इस परियोजना की फाइलों को घुमा रही है। काफी जद्दोजहद के बाद सरकार इसकी आधारशिला रखने में तो कामयाब हो गई, लेकिन यह कब पूरी होगी, कोई नहीं जानता।

‘राम नाम’ की नहीं, दाम की लूट

गीता में भगवान कृष्ण ने राम नाम का संदेश देते हुए कहा था कि यही एक ऐसा शब्द है, जिसे लेने के लिए हमें कोई दाम खर्च नहीं करना पड़ता। इसके उलट हरियाणा सरकार के संरक्षण में कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के दौरान ‘दाम’ लूटे जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है राजनीतिक दलों के नेता ही नहीं, बल्कि संत समाज और स्थानीय नागरिक भी गीता के नाम पर लूट की बात कह रहे हैं। यह ‘लूट’ लाइट के साथ केडीबी में किए गए निर्माण में भी दिख रही है।  अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में बिजली के अस्थायी काम में धांधली, प्रचार के लिए लगाए गए फ्लैक्स के अलावा बिना अनुमति के कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड आॅफिस को लाखों खर्च कर नया रूप देने के विवाद सामने आए हैं। विवादों के चलते अधिकारियों ने केडीबी का काम रुकवा दिया। बिजली के काम का ठेका करनाल की एक एजेंसी को पहले सैंतीस लाख अड़तीस हजार आठ सौ छिहत्तर रुपए में मिला था। विवादों में घिरने के बाद यह टेंडर रद्द हुआ और दोबारा यह ठेका इसी फर्म को करीब उन्नीस लाख सत्ताईस हजार रुपए दिया गया। केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा ने इन मामलों की जांच कराने और टेंडर की फाइल मंगा कर उनकी जांच कराने की बात कही है। उन्होंने माना कि प्रचार सामग्री के लिए जो फ्लेक्स बनाए गए थे, उसमें ठेका स्टार कंपनी की सामग्री का था। उसकी जगह दोयम दर्जे की सामग्री उपयोग की गई है।

इतना ही नहीं, टेंडर की शर्तों पर काम नहीं हुआ। जैसे- मेला क्षेत्र में ब्रह्मसरोवर की सभी स्टालों पर चार हजार एलईडी लगाई जानी थीं। आधे से भी कम संया में लगाई गई हैं। इंडियन लूड एलईडी लाइट पचास वॉट के सौ लगाई जानी थी, लेकिन सिर्फ पचास लगाई गई। एलईडी पैनल आठ फुट गुणे चार फुट के सौ लगाए जाने थे, लेकिन ये भी करीब तीस ही लगाए गए हैं। ब्रह्मसरोवर के मुख्य द्वार और किरमिच रोड वाले मुख्य द्वार पर आठ फुट चौड़े और चार फुट लंबे दो डिजिटल एलईडी पैनल लगने थे। इनमें से एक भी नहीं लगा। टेंडर की शर्तों के तहत छह नंबर पर दस हजार लड़ियां लगाई जानी थीं। यह सरकारी भवनों और शहर के अठारह मुख्य चौराहों पर लगानी थी। इनमें से चुनिंदा स्थानों को छोड़ कर लगभग सभी खाली हैं।

कौड़ियों के दाम बेची जमीन

गीता जयंती के दौरान हरियाणा सरकार जितने विवादों में फंसी है, उनका मुख्य केंद्र स्वामी ज्ञानानंद हैं। हरियाणा में भाजपा के सत्ता में आने से पहले ज्ञानानंद कभी संतों में चर्चा का विषय नहीं बने। पर भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद अचानक सुर्खियों में आए ज्ञानानंद के बारे में कहा जाता है कि सरकार में इनका प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से खासा दखल है।
प्रदेश सरकार ने ज्ञाना नंद को कुरुक्षेत्र में करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन कौड़ियों के भाव दे दी है। आरटीआइ कार्यकर्ता पीपी कपूर को मिली जानकारी से पता चला है कि सरकार ने कुरुक्षेत्र में किसानों से करोड़ों में खरीदी जमीन स्वामी ज्ञाना नंद के एनजीओ को कौड़ियों के भाव आबंटित की है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) द्वारा मेला भूमि के लिए अधिगृहित कृषि भूमि का मुआवजा सरकार ने किसानों को पचास लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से भुगतान किया। जबकि इसके उलट स्वामी ज्ञानानंद के जीयो गीता संस्थानम को नियमों को ताक पर रख कर कुल जमीन मात्र पांच लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से निन्यानवे साल के लिए लीज पर दे दी। किसानों को नौ एकड़ का साढेÞ चार करोड़ रुपए मुआवजा दिया, वहीं नौ एकड़ भूमि मात्र पैंतालीस लाख रुपए में जीयो गीता संस्थानम को दे दी गई। जबकि प्राइम लोकेशन पर स्थित इस नौ एकड़ भूमि की बाजार कीमत सात करोड़ रुपए प्रति एकड़ की दर से बहत्तर करोड़ रुपए बैठती है।
केडीबी ने ज्ञानानंद को भूमि आवंटित करने मेंं ‘पिक एडं चूज’ की नीति अपनाई। केडीबी के पूर्व सदस्य श्रीप्रकाश मिश्र और परीक्षित मदान का कहना है कि वे लंबे समय तक बोर्ड में रहे हैं, लेकिन इतने घपले और ऐसी लूट पहले कभी नहीं देखी। मेला क्षेत्र की भूमि नियम कायदों को ताक पर रख कर स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को देना सरासर गलत है।
ज्ञानानंद को लाभ पहुंचाने को सरकार ने मातृ भूमि सेवा मिशन, उत्तराखंड भ्रातृ मंडल, वैश्य अग्रवाल पंचायत थानेसर, लोकल मोहयाल सभा कुरुक्षेत्र, रोहिल्ला समाज सभा, मुलतान सभा, हरियाणा शोरगीर सभा, शिशु अनंता आश्रम (ओड़िसा), खेड़ापति बाजा जी मंदिर जयपुर, रहबरी समाज, विश्वकर्मा धीमान धर्मशाला, सांस्कृतिक विस्तारक संघ (मुंबई), योगी डिवाइन सोसाईटीज (दिल्ली) के आवेदन रद्द कर दिए गए।

सौ की गीता छह सौ रुपए में

स्वामी ज्ञानानंद और उनकी गीता को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान राष्ट्रपति से लेकर देश-दुनिया से यहां पहुंचने वाले वीवीआइपी को भेंट करने के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज की मनोज पब्लिकेशन से प्रकाशित गीता प्रेरणा की बड़ी संख्या में प्रतियां खरीदी हैं। इस गीता का मूल्य छह सौ रुपए प्रिंट है।

सरकार के मंत्री भी नाराज

कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के आयोजन को लेकर हरियाणा सरकार भी एकमत नहीं है। एक तरफ इस कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिस्सा लिया तो दूसरी तरफ हरियाणा के कई मंत्री और दर्जनों विधायक इस कार्यक्रम से नदारद रहे। प्रदेश के मंत्रियों को इसी बात का मलाल है कि इस अंतरराष्टÑीय स्तर में उनकी कोई भूमिका सुनिश्चित नहीं की गई है। इस आयोजन के दौरान आलम यह रहा कि राष्टÑपति कुरुक्षेत्र जाने से पहले अंबाला एयरफोर्स बेस पर उतरे और वहां स्थानीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री अनिल विज भी उनकी अगुवाई के लिए नहीं पहुंचे। विज ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें इस संबंध में न तो कोई अधिकारिक जानकारी दी गई और न ही उनके पास वहां जाने की अनुमति भेजी गई।

सरकारी गीता केंद्र में पुलिस थाना

हरियाणा सरकार की पूरी राजनीति गीता के ईद-गिर्द घूम रही है। सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम तक में गीता को लागू कर दिया गया है। हालात यह हैं कि वर्तमान सरकार की अनदेखी के चलते सरकारी गीता केंद्र में पुलिस थाना और स्वामी ज्ञानानंद की संस्था द्वारा संचालित गीता ज्ञान संस्थान चल रहा है। करीब बाईस साल पहले कांग्रेस के शासनकाल में ब्रह्मसरोवर तट पर एक भव्य परिसर में दुनियाभर से गीता पर शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने गीता केंद्र स्थापित किया था। इस गीता केंद्र का उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने 1 दिसंबर 1995 में को किया था। हद तो यह है कि ब्रह्मसरोवर पर जिस भवन को विशेष रूप से गीता केंद्र के लिए बनाया गया, वह कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की अनदेखी के चलते बंद कर आदर्श थाना पुलिस को किराए पर दे दिया गया। ०

 

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