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दीवारों के रंग से लेकर खिड़की और दरवाजों की सज्जा, ऐसे बढ़ाएं घर की खूबसूरती

घर बड़ा हो या छोटा, उसे सुंदर बनाने के लिए सृजनात्मक विचारों का होना अहम है, लेकिन हर व्यक्ति के भीतर सृजनात्मकता हो यह जरूरी नहीं है। इसीलिए आजकल घर सजाने के लिए आंतरिक सज्जाकार यानी इंटीरियर डिजाइनर की सलाह लेना आम बात हो गई है। अगर आप भी इस उधेड़बुन में हैं कि अपने छोटे से घर को कैसे सजाएं और घर के किस कोने में कौन-सी सजावटी वस्तुएं रखें, इन सारी बातों को ध्यान में रख कर सुझाव दे रही हैं अनुजा भट्ट।

Author June 9, 2019 5:41 AM
ट में सीमित जगह होती है और हरेक सामान के लिए एक निश्चित कोना बना होता है।

अनुजा भट्ट

आप अपने बनाए घर में रहते हैं या फिर फ्लैट में, उसे सजाने के लिए किसी न किसी विचार से प्रेरित जरूर होंगे। पर क्या आपका विचार या पसंद आपके घर के अनुरूप है, इसे सिर्फ आंतरिक सज्जा यानी इंटीरियर डिजाइनिंग से जाना जा सकता है। कई बार हमें किसी के घर की सजावट बहुत पसंद आ जाती है और हम बिना सोचे-विचारे उसकी नकल कर बैठते हैं। साथ ही यह भूल जाते हैं कि सभी घरों की बनावट एक-दूसरे से भिन्न होती है। यहां तक कि फ्लैट और निजी मकान की बनावट में भी काफी अंतर होता है।

महानगरों में अधिकतर लोग फ्लैट में रहते हैं। ये फ्लैट एक बेडरूम और एक हॉल यानी वन बीएचके से लेकर छह बीएचके तक हो सकते हैं। फ्लैट में सीमित जगह होती है और हरेक सामान के लिए एक निश्चित कोना बना होता है। वहीं इन फ्लैटों में जब असीमित सामान होता है, तो घर पूरी तरह से अस्त-व्यस्त नजर आता है। ऐसे में आप चाहें तो कम जगह का इस्तेमाल भी नियोजित तरीके से कर के अपने घर को आरामदायक और खूबसूरत बना सकते हैं। इंटीरियर डिजाइनर लिपिका सूद ने इस बारे में कुछ खास बातें बताई। जैसे दीवार, फर्नीचर, खिड़कियां सजावट के मुख्य आयाम हैं और इसी के आधार पर घर में रंग-रोगन से लेकर पर्दे तक का चुनाव किया जाता है।

दीवारों का रंग
’फ्लैट के कमरे छोटे होते हैं। छोटे कमरे के फर्श का रंग हल्के रंग का होना चाहिए। इसलिए फ्लैट के निर्माण के समय ही फर्श पर हल्के रंग के पत्थर या फिर टाइल्स लगवाएं।
’कमरे छोटे अच्छे नहीं लगते, इसलिए उन्हें बड़ा लुक देने के लिए हमेशा हल्के रंग का पेंट करवाएं। हल्का रंग होने से कमरा कम रोशनी में भी खुला-खुला और बड़ा-सा जान पड़ता है।
’कमरे को ज्यादा ऊंचा दिखाने के लिए सीलिंग पर फ्लोरोसैंट कलर के स्टिकर या वालपेपर का इस्तेमाल करें।
’लंबे समय से वन वॉल डार्क यानी कमरे की एक दीवार में चटक रंग का फैशन चल रहा है। लेकिन इस फैशन का प्रयोग छोटे कमरों में करने से बचें।
’अगर आप कमरे की दीवार को लेकर कुछ अलग करना चाहते हैं, तो एक ही रंग के दूसरे शेड का प्रयोग करें। ध्यान रखें कि दूसरा शेड हल्के रंग का होना चाहिए।

फर्नीचर की जगह
’छोटे कमरे के लिए स्टेटमैंट फर्नीचर का चुनाव करें। कमरे में छोटे-छोटे फर्नीचर की जगह ऐसा फर्नीचर का चयन करें, जो कम जगह घेरने के साथ बहु-कार्य में आएं और आपकी जरूरत को भी पूरा करें।
’कभी भी फर्नीचर को दीवार से सटा कर न रखें। ऐसा करने पर दीवारें खराब तो होती ही हैं साथ ही कमरा भी भरा-भरा-सा लगता है।
’बाजार में सोफा कम बेड और बेड बॉक्स तो पहले से ही आ रहे हैं। अब डाइनिंग टेबल, सोफासेट और कुछ मॉडुलर फर्नीचर ऐसे आने लगे हैं, जो जगह भी कम घेरते हैं और स्टोरेज का भी काम करते हैं।

सजावट करें कम
’कमरे में कलर थीम से मैच करती हुई ड्रैमेटिक पेंटिंग को लगाया जा सकता है। कमरे की कलर थीम से मैच पेंटिंग होने से कमरा भरा-भरा नहीं लगेगा।
’कमरे में टेबल पर फूलदान रखना पुराना चलन है। इसलिए टेबल को खाली रखें और कमरे के किसी कोने में एक सुंदर और आकार में बड़ा टैराकोटा, चीनी मिट्टी या धातु से बना पॉट वॉश या आर्टिकल सजा दें।
’दर्पण से सजावट यानी मिरर डेकोरेशन छोटे घरों के लिए एकदम सही है। अगर इसे सृजनात्मक तरीके से किया जाए तो घर बड़ा और खुला लगता है। यही नहीं, इससे घर की रौनक भी बढ़ जाती है।
’घर के ड्राइंग रूम की एक दीवार को मिरर पैनल से कवर करें।
’छोटे घरों में स्ट्रिप कारपेट का इस्तेमाल करना चाहिए, इससे कमरा लंबा नजर आता है।
’स्टूडियो फ्लैट में एक कमरे में ही हर कमरे की जरूरत का सामान रखना होता है। इसके लिए सबसे पहले एक ही कमरे में अलग-अलग काम के लिए जगह बांट लें। जगह के बंटवारे के लिए छोटे कारपेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये कारपेट सेपरेटर का काम करते हैं।
’बाजार में आ रहे डिवाइडर्स छोटे आशियानों के लिए अच्छा विकल्प हैं। इन्हें एक ही कमरे में अलग-अलग काम करने के लिए या निजता के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

खिड़की और दरवाजों की सज्जा
’कमरा छोटा हो, तो खिड़कियों को हर वक्त भारी भरकम पर्दों से ढंक कर न रखें। अगर हो सके तो इन खिड़कियों पर पर्दे न लगाएं, ऐसा करने से कमरे में रोशनी और हवा आएगी और कमरा तरोताजा लगेगा।
’छोटे कमरों में शिमरी पर्दे लगाएं। ये पारदर्शी होने के साथ-साथ बेहद आकर्षक होते हैं। इनमें भी हल्के रंग के पर्दों का ही इस्तेमाल करें।
’आजकल ग्लास के दरवाजे चलन में हैं। लकड़ी के दरवाजों की जगह सेमी ग्लास वाले दरवाजे घर में लगवाएं। इससे कमरा खुला-खुला नजर आएगा।

बत्तियों का चुनाव
’ ऊपर लगने वाली बत्तियों यानी ओवरहेड लाइट्स का फैशन सदाबहार है, लेकिन कुछ नया प्रयोग करना चाहते हैं तो आप घर में नीचे लगने वाली यानी बिलो हेडलाइट्स की सेटिंग कराएं। इसके लिए फ्लोर लाइट्स, डिजाइनर लैंप्स और हैंगिंग लाइट्स का चयन करें।
’घर में सूरज की रोशनी का आना जरूरी है। इसलिए खिड़कियों पर ग्लास वर्क कराएं।
’कमरे में प्रकाश की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। जैसे बैडरूम में मध्यम रोशनी के लिए वॉल लैंप्स तो स्टडी रूम में ज्यादा रोशनी के लिए ओवरहेड लाइट्स का प्रयोग किया जाना चाहिए।
’आपका भोजन कक्ष कितना भी छोटा क्यों न हो, आप डाइनिंग टेबल पर लटकने वाली बत्ती यानी हैंगिंग लाइट लगा कर सिर्फ उतने ही भाग को फोकस करेंगे, तो कमरे का आकार छोटा है या बड़ा है, यह पता नहीं चलेगा।
इन सभी बातों को ध्यान में रख कर आप घर को सुंदर बना सकते हैं।
इन सभी विकल्पों पर विचार करते समय अपने बजट का ध्यान रखना भी बेहद आवश्यक है। आप जब भी घर की सजावट के लिए इंटीरियर डिजाइनर से बात करें तो उन्हें सबसे पहले अपने बजट के बारे में बताएं। ताकि वह बजट के अनुसार ही घर की साज-सज्जा करे।

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