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दाना-पानी: भोजन भी औषधि भी, करमू का साग और सनई के फूल का साग

कहते हैं, भोजन में एक पत्तेदार सब्जी जरूर रखें। अगर यह रोज संभव नहीं है, तो हफ्ते में कम से कम दो दिन पत्तेदार सब्जियां यानी साग अवश्य भोजन में शामिल करना चाहिए। बरसात में कई लोग साग खाना ठीक नहीं मानते, पर कुछ साग ऐसे हैं, जो इसी मौसम में पैदा होते हैं और उन्हें खाना निरापद होता है। पालक, चौलाई जैसे गरमी के साग के बजाय मौसमी साग खाएं। साग भोजन के साथ औषधि भी होता है। इस बार ऐसे ही कुछ सागों के बारे में बात करेंगे।

Author July 28, 2019 4:07 AM
करमू का साग

मानस मनोहर

करमू का साग
करमू, करेमू या करमी बरसात में कुदरती उग आने वाला साग है। इसकी खेती नहीं होती। यह पानी वाली जगहों पर खुद जाता है। इस तरह इसमें दूसरी फसलों की तरह खाद-पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती। यों हर साग में एंटी आक्सीडेंट होता है, जो हमारे रक्त का प्रवाह सुचारु बनाता है, पर करमू में यह गुण कुछ अतिरिक्त होता है। यह खून बढ़ाने में भी मदद करता है। जिन लोगों को कब्ज की समस्या है, पेट ठीक से साफ नहीं होता, उन्हें करमू का साग खाने से लाभ मिलता है। करमू का साग आजकल शहरों की मंडियों में बड़ी सहजता से मिल जाता है। यह चूंकि पानी वाली जगहों पर होता है, इसलिए इसकी सफाई में विशेष ध्यान देना पड़ता है। इसके मोटे डंठल को अलग कर दें। सिर्फ पत्तियों का इस्तेमाल करें।

किसी भी साग में प्याज-टमाटर डालने की जरूरत नहीं होती। करमू के साग में भी मत डालें। इस तरह इसे बनाना बहुत आसान भी है। इसे मुख्य रूप से दो तरह से बनाया जाता है। एक तो इसे सीधे छौंक कर पका लिया जाता है, दूसरे किसी दाल के साथ इसे, पकाया जाता है। करमू के साग का चावल-दाल के साथ अच्छा मेल बैठता है। इसके लिए करमू के पत्तों को ठीक से धोकर साफ कर लें। छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर कड़ाही में एक चम्मच सरसों का तेल या फिर देसी घी गरम करें और उसमें जीरा, हरी मिर्च, हींग और बारीक कटे लहसुन का तड़का लगाएं और करमू को छौंक दें। चलाते हुए पकाएं। चाहें तो थोड़ी देर के लिए ढक्कन लगा सकते हैं, ताकि पत्तियां जल्दी नरम हो जाएं। वैसे खुला रख कर भी पका सकते हैं। जब पत्तियां नरम हो जाएं तो ऊपर से नमक, हल्दी, थोड़ी-सी कुटी लाल मिर्च और थोड़ा-सा सब्जी मसाला डाल कर चलाते हुए पानी सूखने तक चलाते हुए पका लें। पर इसे रोटी के साथ खाना हो, तो किसी दाल के साथ पकाना बेहतर रहता है। करमू का साग दो में से किसी एक दाल के साथ पकाया जाता है- मंूग और चना। चना दाल के साथ पकाना हो, तो कम से कम चार-पांच घंटे पहले दाल को भिगो कर रखें। फिर कड़ाही में तड़का देकर पहले दाल को नरम होने तक पका लें। फिर उसमें कटे हुए करमू के पत्ते डालें। ध्यान रखें कि दाल की मात्रा अधिक न हो। फिर उसमें नमक, हल्दी, कुटी लाल मिर्च और सब्जी मसाला डाल कर कड़ाही पर ढक्कन लगा दें और पत्तों के नरम होने तक पकने दें। पानी बहुत कम डालें। दाल पतली न रखें। पानी इतना ही हो कि दाल और पत्ते आपस में मिले रहें। इसी तरह मूंग दाल के साथ पकाना चाहते हैं तो दाल को एक घंटे पहले भिगो दें और फिर तड़का देकर पहले मूंग दाल को डालें। हल्का-सा पानी डाल कर एक उबाल आने दें और फिर उसमें करमू के पत्ते, नमक और मसाले डाल कर ढक कर पकने दें। मूंग की दाल चूंकि कोमल प्रकृति की होती है, इसलिए वह पत्तों के पानी से ही गल जाएगी। इसे रोटी या चावल के साथ खाएं।

सनई के फूल का साग
सनई एक ऐसी फसल है, जो रस्सियों के लिए रेशे पैदा करने के लिए बोई जाती है। इसके औषधीय गुण बहुत हैं। कब्ज की यह रामबाण औषधि है। कब्ज संबंधी जो भी आयुर्वेदिक औषधियां बनती हैं, उनमें से ज्यादातर में सनई के पत्ते का उपयोग किया जाता है। इस तरह जिन लोगों को कब्ज की शिकायत रहती है, उन्हें इस मौसम में मिलने वाले सनई के फूलों का साग हफ्ते में कम से कम दो दिन अवश्य खाना चाहिए। जिन्हें यह समस्या नहीं है, वे स्वाद के लिए भी खाएं, तो इसकी तासीर लाजवाब होती है। सनई के फूल आजकल शहर की मंडियों में आसानी से मिल जाता है। इसे धोकर ठीक से साफ कर लें। इसमें भी प्याज-टमाटर डालने की जरूरत नहीं होती। चाहें, तो हरी मटर के कुछ दाने डाल सकते हैं।

एक कड़ाही में एक चम्मच सरसों का तेल या देसी घी गरम करें और जीरा, हींग, बारीक कटी हरी मिर्च और लहसुन का तड़का लगाएं। उसमें सनई के फूलों को छौंक दें। थोड़ी देर चलाते हुए फूलों को नरम होने तक पकाएं। फिर उसमें हरी मटर के दाने और नमक, हल्दी और गरम मसाला डालें और ढंक कर पकने दें। अगर जरूरत हो, तो थोड़ा-सा पानी का छींटा लगाएं और फूलों को ठीक से नरम होने तक पकाएं। अगर हरी मटर के दाने न डालना चाहें, तो इस साग में कुछ मूंगदाल की सादा बड़ियां डाल सकते हैं। बड़ियां डालनी हों, तो सनई के फूलों को छौंकने से पहले बड़ियों को हल्का-सा तल लें और फिर ऊपर से सनई के फूलों को डाल कर पकाएं। इसमें थोड़े पानी की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए आधा कप पानी डाल दें और पानी सूख जाने तक पकाएं।

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