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सेहत: चढ़े पारे के साथ बढ़ा लू का प्रकोप धूप से बचें, जरूरी सलाह मानें

तेज लू लगने का दिलचस्प लक्षण यह भी है कि आदमी अजीबो-गरीब बर्ताव शुरू कर देता है। वह अचानक तेज बोलने लगेगा और अगले ही क्षण गिरकर बेहोश हो जाएगा।

धूप और लू से बचने के लिए मुंह को कपड़ों से कवर करके घर से निकलीं युवतियां।

कुछ दिन पहले तक लोग यह सोचकर हैरत कर रहे थे कि आधा मई बीत जाने के बावजूद पारे का कहर उस तरह नहीं बरपा है, जैसा आमतौर पर इन दिनों में देखने को मिलता है। पर अब गर्मी ने अपनी रंगत दिखानी शुरू कर दी है। चिलचिलाती धूप और गर्म तेज हवाओं ने शहर से गांव तक लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह यही है कि तेज धूप में घर से बाहर निकलने से परहेज करें।

अच्छी बात यह है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के कारण ज्यादातर लोग पहले से ऐसा कर रहे हैं। बावजूद इसके अगर बाहर निकलना ही पड़े तो घर से निकलने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी, मट्ठा, पना, जलजीरा आदि पीकर चलें। ऐसा इसलिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। हो सके तो पानी साथ लेकर चलें जिससे अगर प्यास लगे तो इधर-उधर भटकना न पड़े।

हो सकता है जानलेवा
लू से बचाव और इसके लक्षण पर और बातें करने से पहले यह समझ लें कि आखिर इसे क्यों गंभीर और जानलेवा बताया गया है। दरअसल, गर्मी के दिनों में सूरज की सीधी किरणें और गर्म हवा शरीर में पानी की कमी पैदा करती हैं। यही नहीं, गर्मी की वजह से अधिक पसीना आने के कारण शरीर में मौजूद नमक निकल जाता है।

नतीजतन व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने के साथ ही दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगती है। ऐसे में मरीज को शरीर में पानी की कमी पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। आमतौर पर लू का प्रकोप दो तरह से हमें प्रभावित करता है। आसानी के लिए इसे हम कम या ज्यादा लू लगने के तौर पर देख सकते हैं।

हल्की लू
एम्स भोपाल की डॉ. अदिति बताती हैं कि ज्यादा श्रम वाले काम करने के दौरान या देर तक बैठने के बाद उठते ही अचानक आंखों के सामने अंधेरा छाना और नजरों के आगे अजीबो-गरीब आकृतियों का बनना कम लू लगने के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में चक्कर आने और उल्टियां शुरू होने की शिकायत भी आमतौर पर देखने को मिलती है। कम लू की चपेट में आने पर मांसपेशियों में तेज दर्द, हल्का बुखार और सिरदर्द के लक्षण भी सामने आते हैं। डॉ अदिति बताती हैं कि हर आदमी के शरीर की क्षमता या मेटाबॉलिज्म अलग-अलग होता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि सब में लू लगने के एक समान ही लक्षण दिखाई दें।

तेज लू
अगर किसी भी तरह की लापरवाही के कारण व्यक्ति तेज लू का शिकार हो जाता है तो यह काफी गंभीर मामला हो सकता है। बात करें लक्षण की तो ऐसा होने पर बेहद तेज बुखार आता है। डॉक्टरों के अनुसार मुंह या रेक्टल तापमान 40 डिग्री सेल्सियस यानी 104-105 डिग्री फॉरेनहाइट या इससे ज्यादा भी पहुंच सकता है। तेज लू लगने पर इंसान के बदन से पसीना आना बंद हो जाता है और इस कारण त्वचा एकदम सूख जाती है।

तेज लू लगने का दिलचस्प लक्षण यह भी है कि आदमी अजीबो-गरीब बर्ताव शुरू कर देता है। वह अचानक तेज बोलने लगेगा और अगले ही क्षण गिरकर बेहोश हो जाएगा। ऐसे में ध्यान रखने की जो अहम बात है वह यह कि तेज लू लगने वाले व्यक्तिके शरीर का तापमान अगर जल्द से जल्द नियंत्रण में नहीं लाया गया तो मरीज के शरीर के अंग अचानक काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे ज्यादातर मामलों में मरीजों की मौत भी हो जाती है।

जरूरी सलाह
’ खुले शरीर धूप में न निकलें। अगर निकलना ही पड़े तो शरीर और आंखों के बचाव का पूरी तरह ध्यान रखें। ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। मौसमी फल, फल का रस, दही, मठ्ठा, जीरा छाछ, जलजीरा, लस्सी, आम का पना पिएं या आम की चटनी खाएं।
’ लू लगने पर तत्काल योग्य डॉक्टर को दिखाना चाहिए। डॉक्टर को दिखाने के पूर्व कुछ प्राथमिक उपचार करने पर भी लू के रोगी को राहत महसूस होने लगती है।

’ बुखार तेज होने पर रोगी को ठंडी खुली हवा में आराम करवाना चाहिए। 104 डिग्री से अधिक बुखार होने पर बर्फ की पट्टी सिर पर रखना चाहिए। रोगी को तुरंत प्याज का रस शहद में मिलाकर देना चाहिए। इस दौरान चाय-कॉफी आदि गरम पेय का सेवन अत्यंत कम कर देना चाहिए।

’ प्यास बुझाने के लिए नींबू के रस में मिट्टी के घड़े अथवा सुराही के पानी का सेवन करना चाहिए। बर्फ का पानी नहीं पीना चाहिए। मरीज के तलवे पर कच्ची लौकी घिसें, इससे सारी गर्मी लौकी खींच लेगी और तुरंत राहत मिलेगी।
’ जौ का आटा व पिसा हुआ प्याज मिलाकर शरीर पर लेप लगाने से लू से तुरंत राहत मिलती है। ऐसे में कैरी का पना खास तौर पर लाभदायक होता है।

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