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सेहत: जानें खर्राटे की समस्या की असली वजह और बचाव के आसान उपाय

डॉक्टर ग्लैडविन के मुताबिक, खर्राटे आना आनुवंशिक कारण भी है। जिन घरों में पहले भी किसी को खर्राटे आते हैं तो हो सकता है कि उस व्यक्ति के बच्चों को भी यह समस्या झेलनी पड़े।

Author December 9, 2018 12:43 AM
खर्रांटों से बचने का आसान उपाय है व्यायाम।प्रतीकात्मक तस्वीर।

दिन भर की थकान के बाद जब आप चैन की नींद लेने की कोशिश करते हैं और उस नींद के बीच आपका कोई साथी या परिवार का कोई अन्य सदस्य खर्राटे लेने लग जाए तो बहुत गुस्सा आता होगा। खर्राटे नाक और मुंह कहीं से भी आ सकते हैं। जो लोग धीमी आवाज में खर्रांटे मारते हैं वे दूसरों को इतना परेशान नहीं करते, जितना तेज आवाज वाले। दरअसल, खर्राटे कभी-कभी किसी के लिए मजाक तो किसी के लिए गंभीर समस्या बन जाते हैं। जिस व्यक्ति को खर्राटे आ रहे हैं वह खुद भी परेशान रहता है। स्वामी दयानंद अस्पताल में जनरल फिजिशियन डॉक्टर ग्लैडविन त्यागी का कहना है कि जिस व्यक्ति को खर्राटे आते हैं, उसकी नींद पूरी नहीं होती है। जिस वजह से वह हमेशा उनींदा रहता है और नींद पूरी न होने से कई दुर्घटनाओं का भी उसे सामना करना पड़ सकता है।

क्यों आते हैं खर्राटे
जब नाक या मुंह के रास्ते में कोई रुकावट होती है तब खर्राटे आते हैं। डॉक्टर ग्लैडविन के मुताबिक खर्राटे आने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से प्रमुख कारण निम्न हैं-

लेटने का तरीका
हर व्यक्ति के लेटने का तरीका अलग होता है। लेकिन कई बार हमारे लेटने के कुछ तरीके सेहत के लिए नुकसानदेह भी हो सकते हैं। डॉक्टर ग्लैडविन के अनुसार जब कोई व्यक्ति बिस्तर पर लेटता है, तो गले के पीछे का हिस्सा संकरा हो जाता है, जिससे श्वसन तंत्र की मांसपेशियां शिथिल पड़ जाती हैं। इस तरह जब व्यक्ति सांस अंदर लेता है तो आवाज आती है और साथ ही खर्राटे आने लगते हैं।

मोटापा
जिन व्यक्तियों में मोटापा ज्यादा होता है उन्हें खर्राटों की समस्या से जूझना पड़ता है, क्योंकि मोटापे के कारण गले की मांसपेशियों में सांस लेने में रुकावट पैदा होता है। दरअसल, मोटापे के कारण गर्दन का मांस लटने लगता है। मांस के कारण श्वासनली दब जाती है। जिससे खर्राटे आते हैं।

आनुवंशिक
डॉक्टर ग्लैडविन के मुताबिक, खर्राटे आना आनुवंशिक कारण भी है। जिन घरों में पहले भी किसी को खर्राटे आते हैं तो हो सकता है कि उस व्यक्ति के बच्चों को भी यह समस्या झेलनी पड़े।

साइनस
जिन व्यक्तियों को साइनस की समस्या होती है उनकी नाक बंद हो जाती है। वे ठीक से सांस नहीं ले पाते, जिससे जब वे सोते हैं तो उन्हें खर्राटे आते हैं।

नाक की हड्डी 
जब नाक की हड्डी किसी वजह से टेढ़ी हो जाती है या उसमें मांस बढ़ जाता है तब सांस लेने के लिए अधिक बल लगाना पड़ता है। इसलिए नाक से आवाज आने लगती है, जिससे आसपास सो रहे लोग परेशान हो जाते हैं।
परेशानियां

नींद में व्यवधान
डॉक्टर ग्लैडविन ने बताया कि ऐसा नहीं है कि जिन लोगों को खर्राटे आते हैं, उन्हें परेशानी नहीं होती है। अगर खर्राटों की आवाज तेज है, तो जिस व्यक्ति को खर्राटे आ रहे हैं वह भी परेशान होकर उठ जाता है। ऐसे में उसकी नींद पूरी नहीं होती और नींद में व्यवधान पड़ता है।

एप्निक अटैक
खर्राटे आना कोई आम बात नहीं है। दरअसल, जो लोग खर्राटों को आम बात मान लेते हैं उनके लिए समस्या गंभीर हो जाती है। डॉक्टर ग्लैडविन के मुताबिक खर्राटे की समस्या अधिक बढ़ जाने पर पीड़ित को एप्निक अटैक आने लगते हैं, जिनसे वह अधिक परेशान रहता है।

आॅपरेशन
खर्राटे से पीड़ित व्यक्ति को एथनिया अटैक आते हैं और सांस लेने में परेशानी होती है तो उसे समस्या से निजात पाते के लिए आॅपरेशन भी कराना पड़ता है।

बचाव
– डॉक्टर ग्लैडविन ने बताया कि खर्राटों से बचने का उन लोगों के लिए सरल उपाय है, जिनका वजन ज्यादा है। वे अपने वजन पर नियंत्रण करें। इससे खर्राटों की समस्या भी दूर होगी।

– खर्रांटों से बचने का आसान उपाय है व्यायाम। प्रणायाम। अनुलोम विलोम, भ्रामरी आसन आदि वे तरीके हैं, जिनसे खर्राटों की समस्या से बचा जा सकता है।

– नींद की गोलियों से परहेज करें और ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। इन उपायों को अपनाने से भी इस समस्या से बचा सकता है।

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