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दाना-पानी: हल्का भी सुपाच्य भी

रात का भोजन हल्का रखा जा सकता है। उसके लिए कुछ अंकुरित दालों और दालों के सूप वगैरह का सेवन किया जा सकता है। इससे पेट भी भर जाता है, प्रोटीन भी भरपूर मात्रा में मिल जाती है और सुपाच्य भी होता है।

दाना-पानीशरीर को फिट रखने के लिए बाजार की ताकती दवाएं और गरिशष्ठ भोजन करने से बेहतर है कि घर में सेहतमंद कुदरती पदार्थ बनाएं।

दिवाली में आपने खूब गरिष्ठ पकवान खाए होंगे। मिठाइयां, नमकीन, तली-भुनी चीजें। अब पेट को थोड़ा आराम देने का समय है। रोज कम से कम एक समय हल्का भोजन अवश्य लें। इससे पाचन तंत्र ठीक रहेगा। रात का भोजन हल्का रखा जा सकता है। उसके लिए कुछ अंकुरित दालों और दालों के सूप वगैरह का सेवन किया जा सकता है। इससे पेट भी भर जाता है, प्रोटीन भी भरपूर मात्रा में मिल जाती है और सुपाच्य भी होता है।

अंकुरित नाश्ता
दालों को अंकुरित करके खाने से उनका लाभ बढ़ जाता है। मगर कच्ची अंकुरित दालें रोज न खाएं, दो-तीन दिन के अंतराल पर खाएं। कच्ची दालें पेट में आंव करती हैं। इसलिए इन्हें खाने से पहले कुछ तैयारी करनी पड़ती है। पहली बात तो यह कि जब भी दालों को अंकुरित करें, तो एक साथ दो-तीन दालें लें। जैसे चने के साथ मूंग, मसूर, मोठ ले सकते हैं। इनके साथ कच्ची मूंगफली लेना भी बहुत अच्छा रहता है।

इन सारी चीजों को बराबर मात्रा में एक साथ रात भर के लिए भिगो दें। सुबह पानी निथार कर एक पतले कपड़े में ढक कर रख दें। अगली सुबह इनमें से अंकुर फूट आएंगे। अगर इनके अंकुर और बड़े करने हैं, तो एक दिन के लिए और कपड़े में लपेट कर रखना चाहिए। तीसरे दिन ये दालें खाने के लायक हो जाती हैं।

अब इन दालों को खाने से पहले उबलते पानी में चम्मच भर नमक मिला कर डालें और दो से तीन मिनट बाद आंच बंद कर दें। फिर एक बड़े कटोरे में ढंडा पानी अलग से रखें। उसमें कुछ बर्फ के टुकड़े भी डाल दें। फिर गरम पानी में से दालों को छान लें और तुरंत बर्फ मिले ठंडे पानी में डाल दें। इन्हें अच्छी तरह ठंडा होने तक रखें। ऐसा करने से दालों का कचकचापन बरकरार रहता है और कच्चा खाने की वजह से पेट में आंव वगैरह की समस्या पैदा होने की जो आशंका रहती है, वह भी दूर हो जाती है। इन दालों को अगर बिना कुछ मिलाए अच्छी तरह चबा-चबा कर खाएं, तो बहुत अच्छा।

मगर हम भारतीय लोगों को चटपटा और मसालेदार खाने की आदत होती है, इसलिए बहुत सारे लोगों को शायद इस तरह सादा दालें खाने से संतोष न हो। तो, इसे कुछ चटपटा और अधिक शक्तिशाली आहार बनाने के लिए इसमें कुछ और चीजें डालते हैं। अगर आपको प्याज पसंद हो, तो बारीक कटा कच्चा प्याज ले सकते हैं। एक खीरे को भी बारीक काट लें। इस मौसम में मूली अच्छी आने लगी है और वह पेट के लिए बहुत गुणकारी होती है, उसका भी उपयोग कर सकते हैं। इन तीनों में से जो चीजें पसंद हों वही लें, जो पसंद न हो, उसे छोड़ दें।

इसके अलावा स्वाद के मुताबिक पत्ता गोभी, टमाटर, ब्रोकली, हरा प्याज, गाजर, कुछ हरी मिर्चें और कुछ हरा धनिया भी काट कर डालें। ऊपर से चाट मसाला डालें और सारी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। फिर खाते वक्त ऊपर से थोड़ा-थोड़ा बेसन की भुजिया डाल कर खाएं, चटपटा और जानदार अंकुरित दालों का नाश्ता तैयार है।

राजमा सूप
जमा को ज्यादातर लोग दाल या सब्जी की जगह खाने में इस्तेमाल करते हैं। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली का लोकप्रिय आहार है राजमा-चावल। मगर पश्चिमी देशों में राजमा का सूप खूब लोकप्रिय है। राजमा को वहां रेड बीन्स कहते हैं। खासकर जो लोग कसरत करते और सेहत को लेकर अधिक सावधान रहते हैं, वे राजमा का सूप पीना ज्यादा पसंद करते हैं। इससे शरीर को भरपूर प्रोटीन मिल जाता है और पेट भी जल्दी भर जाता है।

मगर गरम इलाकों में रहने वाले लोगों को अक्सर राजमा खाने से कब्ज की समस्या हो जाती है, इसलिए वे इसे कम ही खाते हैं। मगर अब मौसम कुछ ठंडा हो चला है, सर्दी शुरू हो रही है। इसमें राजमा खाना नुकसानदेह नहीं होगा। बल्कि इससे शरीर को पोषण और उचित ऊष्मा मिलेगी। जब राजमा का सूप बना कर खाते हैं, तो वह सीधे राजमा खाने की अपेक्षा अधिक सुपाच्य हो जाता है।

राजमा का सूप बनाना बहुत असान है। जैसे राजमा को रात भर भिगो कर रखते हैं, वैसे ही भिगो दीजिए। अगर इसे एक दिन के लिए पानी से निकाल कर कपड़े में बांध कर रख दें और अंकुरित होने दें, तो इसका पोषण और बढ़ जाएगा। फिर अच्छी तरह धोकर राजमा की मात्रा से दोगुना पानी डालें और एक कुकर में उबलने रख दें। उबालते समय ही जरूरत भर का नमक भी मिला दें। मध्यम आंच पर तीन-चार सीटी आने तक उबालें। राजमा नरम होने में अधिक समय लेता है, इसलिए आप अपने कुकर के हिसाब से अंदाजा लगा लें।

जब राजमा उबल कर नरम हो जाए, तो उसे थोड़ी देर ठंडा होने दें। फिर पानी समेत मिक्सर में डाल कर अच्छी तरह पीस लें। एक मोटी छन्नी से इसे छान लें ताकि मोटा छिलका वगैरह बचा हो तो वह निकल जाए।
एक कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें जीरा और हींग का तड़का दें। एक चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट डाल कर हल्का भूनें और फिर उसमें पत्ता गोभी, मटर, हरा प्याज, गाजर, बेबी कार्न जैसी कुछ सब्जियां छोटा-छोटा काट कर डालें। थोड़ी देर पकाने के बाद उसमें पिसा हुआ राजमा छौंक दें।

देखें कि राजमा अगर अधिक गाढ़ा है, तो उसमें थोड़ा पानी और डाल सकते हैं। अगर पसंद न हो तो लहसुन-अदरक का पेस्ट नहीं भी डाल सकते हैं। हल्की आंच पर एक उबाल आने दें। सूप तैयार है। इस सूप को ज्यादा चटपटा बनाने की जरूरत नहीं है। खाते समय इसमें ऊपर से कुटी काली बुरक सकते हैं। रात को एक बड़ी कटोरी राजमा का सूप पर्याप्त है। पाचन को सही रखेगा।

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