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दाना-पानीः संक्रांति की मिठास

संक्रांति के दिन मुख्य रूप से तिल-गुड़, मूंगफली के पकवान बनते हैं, जो सर्दी के लिहाज से शरीर को गरम रखने में मददगार होते हैं। तो इस बार कुछ ऐसे ही व्यंजन।

Makar Sankrantiतिल, गुड़ और सूखे मेवे के बने लड्डू (ऊपर) तथा मसालेदार खिचड़ी (नीचे)

मानस मनोहर

संक्रांति नजदीक आ रही है। यों तो अब हर त्योहार को ध्यान में रख कर बाजार में चीजें उपलब्ध होने लगी हैं, मगर बाजार की बनी चीजें खिलाने-खाने में वह आनंद कहां, जो घर में बनी चीजों में आता है। संक्रांति के दिन मुख्य रूप से तिल-गुड़, मूंगफली के पकवान बनते हैं, जो सर्दी के लिहाज से शरीर को गरम रखने में मददगार होते हैं। तो इस बार कुछ ऐसे ही व्यंजन।

तिल-गुड़-मूंगफली के लड्डू
संक्रांति के दिन अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरह के पकवान बनते हैं। उत्तर भारत में तिल-गुड़-चावल के पकवान बनाए जाते हैं, तो पंजाब में लोहड़ी पर मूंगफली और तिल की रेवड़ियां खाने-बांटने का चलन है। दक्षिण में तिल के साथ नारियल का उपयोग किया जाता है। ये सारी चीजें स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकर हैं। इनसे लड्डू बनाना इतना आसान है कि जितनी मेहनत आपको रोटी बनाने में करनी पड़ती है, उससे भी कम में बन कर ये तैयार हो जाते हैं। इस लड्डू के आगे बाजार का लड्डू कहीं नहीं ठहरेगा, अपने हाथों बनाने का सुख मिलेगा, सो अलग।

तिल-मूंगफली-गुड़ के लड्डू बनाने के लिए न मावे की जरूरत पड़ती है, न तेल-घी की। मूंगफली और तिल में खुद इतना तेल होता है कि उसी से काम चल जाता है। बस, इसकी मात्रा का थोड़ा ध्यान जरूर रखें। जितनी मात्रा मूंगफली की ले रहे हैं, उसकी आधी मात्रा तिल की लें। इसके लिए सफेद तिल अच्छी रहेगी, क्योंकि उससे रंग अच्छा आता है। बेहतर हो कि इतनी ही मात्रा अलसी यानी फ्लेक्सी सीड की ले लें। आजकल तो चर्बी घटाने के लिए अलसी खाने का चलन काफी बढ़ा है।

लड्डू में इससे स्वाद बढ़ जाता है। मूंगफली की मात्रा के बराबर ही गुड़ लें। अगर मीठा अधिक पसंद करते हैं, तो इसकी मात्रा बढ़ा सकते हैं। गुड़ उस तरह नुकसान नहीं करता, जैसे चीनी करती है, इसलिए गुड़ की मात्रा कुछ अधिक भी हो जाए तो कोई खराबी नहीं। गुड़ को घिस या कूट कर महीन कर लें। इसमें डालने के लिए अपनी पसंद के कुछ मेवे ले सकते हैं, जैसे किशमिश, अखरोट, बादाम, काजू। इसकी मात्रा एक कटोरी रखें।

अब एक कड़ाही गरम करें। उसमें पहले मूंगफली के दाने डाल कर चटकने तक भून लें। ध्यान रखें कि ज्यादा नहीं भूनना है, बस इतना ही भूनें कि रगड़ने से उसके छिलके उतर आएं। फिर तिल और अलसी को बारी-बारी डाल कर महक आने तक भूनें। इन्हें भी रंग बदलने तक न भूनें, बस सेंक लें। जब ये सारी चीजें सिंक जाएं तो कड़ाही में एक चम्मच देसी घी गरम करें और सारे मेवे को डाल कर तीन से चार मिनट तक धीमी आंच पर सेंक लें।

मूंगफली को किसी कपड़े में रख कर रगड़ें और छिलका उतार लें। फिर सारी चीजों को बारी-बारी मिक्सर में डाल कर दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि इन्हें बिल्कुल आटे की तरह महीन नहीं करना है। मोटा दरदरा पीसना है। तले हुए मेवे को खरल में डाल कर मोटा कूट लें। चाहें तो एक झटका देकर मिक्सर में भी पीस सकते हैं। बस वे टूट जाएं, पिसें नहीं।

अब एक परात में सारी चीजों को लेकर अच्छी तरह मिला लें। गुड़ का सारी चीजों में चिपकना जरूरी है, इसलिए उसे थोड़ा गरम करने की जरूरत पड़ेगी। तो, जिस कड़ाही में घी डाला था, उसी में गुड़ समेत सारी चीजों को डालें। एक बार अच्छी तरह उलट-पलट लेने के बाद आंच बंद कर दें। कड़ाही की गरमी से ही गुड़ पिघल कर सारी चीजों में मिल जाएगा। हथेलियों से रगड़ कर एक बार फिर सारी चीजों को मिलाएं और सामग्री के हल्का गरम रहते ही थोड़ी-थोड़ी मात्रा लेकर लड्डू का आकार दें।

मसाला खिचड़ी
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश में संक्रांति को खिचड़ी का पर्व भी कहते हैं। दक्षिण में इसे पोंगल कहते हैं। पोंगल का अर्थ भी खिचड़ी है। वहां भी खिचड़ी जरूर बनती है। दिन भर मीठी चीजें खाने के बाद शाम तक मुंह मीठा-मीठा हो जाता है। तब कुछ तीखा और चटपटा खाने का खूब मन होता है। इसलिए इस दिन शाम को खिचड़ी जरूर बनती है। यों भी खिचड़ी अब पहले की तरह बीमार का खाना नहीं माना जाता। अब तो अच्छे-खासे होटलों में भोजन की सूची में खिचड़ी को भी शमिल किया जाने लगा है।

पहली बात तो यह कि खिचड़ी का नाम सुनते ही अगर आपके दिमाग में कुकर की तस्वीर उभरी है, तो उसे मिटा दें। यह खिचड़ी ढक्कनदार कड़ाही में बनाएं। पहले एक कप चावल को धोकर अलग भिगो कर रख दें। एक अलग कटोरे में धुली मूंग, मसूर, अरहर और चना दाल की दो-दो चम्मच मात्रा लेकर अच्छी तरह धो लें। इसी के साथ मुट्ठी भर कच्ची मूंगफली भी मिला लें। इन सारी चीजों को भिगो कर एक घंटे के लिए रख दें।

अब इसमें डालने के लिए कुछ सब्जियां ले लें। आधा कटोरी हरी मटर के दाने, इतनी ही मात्रा में अलग-अलग छोटे टुकड़ों में कटे टमाटर, गाजर, फूल गोभी, बीन्स भी लें। सारी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर अलग रख लें। एक कड़ाही में तीन-चार खाने के चम्मच बराबर घी गरम करें। उसमें एक छोटा टुकड़ा दालचीनी, एक तेजपत्ता, आठ-दस साबुत काली मिर्च, दो लौंग, दो हरी इलाइची तोड़ कर, आधा छोटा चम्मच जीरा, चौथाई छोटा चम्मच हींग डाल कर तड़का तैयार करें। फिर उसमें पहले कटा टमाटर और फिर सारी सब्जियां डाल कर तीन-चार मिनट के लिए चलाते हुए पका लें। सब्जियों के साथ ही थोड़ा नमक डाल दें तो सब्जियां जल्दी नरम हो जाएंगी।

अब पानी समेत पहले सारी दालें डालें और फिर चावल डाल कर चलाएं। इसमें चौथाई छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा चम्मच कुटी लाल मिर्च, एक चम्मच गरम मसाला डालें और जरूरत भर का नमक डाल कर अच्छी तरह मिला लें। आंच को मध्यम रखें।

इस खिचड़ी को पकने में पंद्रह से बीस मिनट लगेंगे। एक बार ढक्कन खोल कर देख लें। दालें गलने लगी हैं, तो उसमें दो-तीन गिलास गरम पानी और डाल दें और अच्छी तरह मिलाएं। उबाल आने दें और जब सारी चीजें अच्छी तरह पक जाएं, तो आंच बंद कर दें। कटे हरे धनिए से सजा कर ऊपर से घी डाल कर गरमागरम परोसें।

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