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दाना-पानी: चोखा देसी लिट्टी देसी

शहरों में लोगों को अपना देसी खानपान याद तो है, पर वे विदेशी ढंग की रसोई में उसे बना नहीं पाते। कई लोग तो शहरी खानपान के इस कदर आदी हो गए हैं कि उन्हें देसी स्वाद का कुछ पता ही नहीं। लिहाजा, शहरी स्वाद को बदलते रहने के लिए और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी जरूरी है कि कभी-कभार कुछ देसी व्यंजन बना लिए जाएं। इस बार आसान से कुछ देसी व्यंजन।

healthबारिश के मौसम में लिट्टी-चोखा का अंदाज ही अलग होता है।

मानस मनोहर

परवल का चोखा
चोखा शब्द पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में अधिक प्रचलित है। दिल्ली और पंजाब-हरियाणा में चोखा की तरह के व्यंजन को भर्ता बोलते हैं। चोखा आमतौर पर आलू, बैगन, टमाटर को पका कर बनाया जाता है, पर परवल और तोरई का चोखा भी अद्भुत होता है। इस मौसम में परवल खूब मिलता है। ज्यादातर लोग परवल की भुजिया या फिर उसे आलू के साथ मिला कर रसेदार सब्जी बनाते हैं। पर इसका चोखा बना कर खाएं, बहुत आनंद आएगा।

परवल का चोखा बनाना बहुत आसान है। इसके लिए बहुत कौशल की जरूरत नहीं होती। बता दें कि चोखे का चलन चरवाहों और गाड़ीवानों ने विकसित किया था। वे चूंकि लंबे समय तक घर से बाहर रहते थे और भोजन पकाने के लिए उनके पास बर्तन आदि की सुविधा नहीं होती थी, इसलिए वे आलू और दूसरी सब्जियों को आग में पका कर नमक, मिर्च वगैरह डाल कर मसल लिया करते थे।
ऐसे खाद्य केवल भारत में नहीं, दुनिया के तमाम देशों में प्रचलित हैं, जिन्हें चरवाहों, गाड़ीवानों आदि ने विकसित किया था। आजकल बाजार में तुरंता खाद्य की तरह बिकने वाले पिज्जा को भी उसी श्रेणी में आता है।

खैर, परवल का चोखा बनाने का पारंपरिक तरीका तो यह है कि परवल को धीमी आग पर भून लिया जाए। अगर ऐसा कर पाएं, तो स्वाद निराला होगा। पर इसकी सुविधा नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं।

छह से आठ बड़े आकार के परवल लें। चाकू से रगड़ कर उसकी ऊपरी परत को अच्छी तरह घिस लें और दोनों सिरों को काट कर अलग कर दें। अच्छी तरह धोएं और फोर्क यानी कांटेदार चम्मच या चाकू की नोक से चार-पांच जगह छेद कर दें।

अब दो बड़े आकार के टमाटर लें और उन्हें भी धोकर साफ कर लें। इसके साथ ही आठ से दस लहसुन की कलियां और तीन-चार हरी मिर्च लें। एक बड़े कुकर या ढक्कन वाली कड़ाही में एक-दो चम्मच सरसों का तेल गरम करें और परवल, टमाटर, लहसुन और हरी मिर्च को डाल कर ढक्कन लगा दें। मध्यम आंच पर कम से कम पंद्रह मिनट तक पकने दें। आप देखें कि परवल में लहसुन और मिर्च की गंध रच-बस जाएगी। अगर आग पर भून रहे हैं तो लहसुन की कलियों को परवल के दोनों सिरों पर छेद करके अंदर डाल सकते हैं। टमाटर को भी भूनना है।

अब चोखे के लिए बाकी तैयारी कर लें। एक मध्यम आकार का प्याज, थोड़ा अदरक, धनिया पत्ता और एक-दो हरी मिर्चें बारीक-बारीक काट कर अलग रख लें। पके हुए परवल और बाकी चीजों को बाहर निकालें। थोड़ा ठंडा होने दें। पके हुए लहसुन और मिर्च को खरल यानी कुंडी में डाल कर मसल लें। फिर चम्मच से परवल के छोटे-छोटे टुकड़े करें और इसी खरल में डाल कर मसल लें। फिर टमाटर का छिलका उतारें और उन्हें भी मसल लें। इन सारी चीजों को एक बड़े कटोरे में डाल कर मिलाएं। ऊपर से कुकर में बचा हुआ तेल समेत रस डालें। जरूरत भर का नमक, कटी हुई सारी सामग्री, आधा चम्मच अजवाइन, आधा चम्मच मंगरैल और दो चम्मच कच्चा सरसों तेल डालें। सारी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। परवल का चोखा तैयार है। इसे दाल-चावल, रोटी के साथ भी खा सकते हैं, पर इसका मेल सत्तू भरे परांठे या लिट्टी के साथ बेजोड़ होता है।

नोट : अगर कच्चा सरसों तेल की झांस आपको पसंद न हो, तो इसे छोड़ भी सकते हैं।

सत्तू भरी लिट्टी
लिट्टी और बाटी बनाने को लेकर अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरह की विधियां प्रचलित हैं। मगर लिट्टी बनाने की पारंपरिक विधि चने का सत्तू भर कर ही है। इसे तेल में तल कर कचौड़ी की तरह बनाया जाता है। देखने में यह बिल्कुल कचौड़ी की तरह ही होती है।

पहले इसका सत्तू बनाने की विधि। चने का सत्तू इन दिनों हर जगह बाजार में मिल जाता है। न मिले तो भुने हुए चने को ग्राइंडर में पीस कर सत्तू बना लें। सत्तू को छान लें।
फिर उसमें एक नींबू का रस, दो चम्मच सरसों तेल, बारीक कटा अदरक, लहसुन, थोड़ा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, आधा-अधा चम्मच अजवाइन, मंगरैल और जरूरत भर का नमक डालें और दोनों हथेलियों से हल्का रगड़ते हुए सारी चीजों को देर तक मिलाएं। जितना अच्छी तरह रगड़ कर सत्तू में सारी सामग्री मिलाएंगे, उतना ही स्वाद निखरेगा। लिट्टी बनाने में सारा कौशल उसके लिए सत्तू तैयार करने में ही है।

अब रोटी के लायक आटा गूंथें। छोटी-छोटी लोइयां तोड़ते हुए उन्हें अंगूठों से दबाते हुए गोलाकार फैलाएं, जैसे कचौड़ी में भरावन डालने के लिए फैलाते हैं। फिर इनमें एक-एक चम्मच सत्तू का भरावन डाल कर सावधानी से चारों ओर से लपेटते हुए बंद करें, जैसे कचौड़ी बंद करते हैं। हथेलियों से दबा कर चपटा आकार दें।

अब कड़ाही में तेल गरम करें। यों तो पारंपरिक लिट्टी सरसों के तेल में बनती है, पर आप जो भी तेल खाते हों, उसी का इस्तेमाल करें। जब तेल अच्छी तरह गरम हो जाए तो आंच को मध्यम कर दें। एक-एक कर तेल में लिट्टियों को डालें और पलट-पलट कर सुनहरा होने तक तल लें। बस, लिट्टी तैयार है। परवल के चोखे के साथ इस बरसात में आनंद लें।

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