ताज़ा खबर
 

दाना-पानी: स्वाद भी प्रयोग भी

जब भी भोजन पकाएं, तो यह ध्यान रखें कि किसी भी चीज की कोई तय विधि नहीं होती और न अंतिम स्वाद। जब भी भोजन पकाएं, उसे मशक्कत के बजाय मोहब्बत से पकाएं, वह अपना अलग स्वाद देगा ही।

भारतीय व्यंजन -केसर कुल्फी और दही राई वाले आलू।

मानस मनोहर
भारतीय व्यंजनों की खासियत है कि इनमें प्रयोग करने की गुंजाइश बहुत रहती है। एक ही व्यंजन अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग जायके के साथ मिल जाता है। यहां तक कि हर हाथ का स्वाद अलग होता है। इसलिए जब भी भोजन पकाएं, तो यह ध्यान रखें कि किसी भी चीज की कोई तय विधि नहीं होती और न अंतिम स्वाद। जब भी भोजन पकाएं, उसे मशक्कत के बजाय मोहब्बत से पकाएं, वह अपना अलग स्वाद देगा ही।

केसर कुल्फी
गर्मी का मौसम है और कुल्फी खाने को मन ललचाता ही है। बाजार की बनी चीजें इस समय खाना थोड़ा जोखिम भरा है, इसलिए घर में ही कुल्फी बनाएं तो बेहतर है। कुल्फी शुद्ध भारतीय व्यंजन है। बताते हैं कि इसे बनाने का तरीका मुगलिया शासन के समय खोजा गया था। जैसा कि भारतीय व्यंजनों को बनाने में निरंतर प्रयोग होते रहते हैं, कुल्फी को लेकर भी अब तक बहुत सारे प्रयोग हो चुके हैं। हर कोई अलग-अलग तरीके से इसे बनाने का प्रयास करता है। पर पिस्ता मिली केसर कुल्फी का स्वाद ही ज्यादातर लोगों की जुबान पर रहता है। इसे घर में बहुत आसानी से बनाया जा सकता है।

इसे बनाने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए बहुत सारे लोग इसे घर में बार-बार बनाने की परेशानी से बचना चाहते हैं। मगर इस परेशानी से बचने का एक तरीका है कि इसका मसाला पहले से बना कर तैयार रखा जाए और जब खाना हो, तो फटाफट बना कर फ्रिज में रख दिया जाए। बहुत सारे लोग कुल्फी बनाने के लिए दूध के अलावा मलाई, कंडेंस्ड मिल्क, मावा वगैरह का इस्तेमाल करते हैं। बाजार में मिलने वाले आटे, सूजी वगैरह का भी इस्तेमाल होता है। पर आप घर में बना रहे हैं, तो शुद्ध बनाएं और ऐसा बनाएं कि सेहत के लिए भी मुफीद हो। इसलिए पहले इसका मसाला तैयार कर लेते हैं।

इसके लिए डेढ़ सौ ग्राम चीनी, पचास से साठ ग्राम मिल्क पाउडर, चार ब्रेड के टुकड़े, दस-पंद्रह पिस्ता के दाने और दो हरी इलाइची की जरूरत पड़ेगी। अगर अधिक मात्रा में पाउडर बनाना चाहते हैं, तो इसी अनुपात में सारी चीजों की मात्रा बढ़ा लें। सबसे पहले एक नॉनस्टिक पैन गरम करें। उसमें चीनी डालें और मध्यम आंच पर उसे पिघलने दें। चीनी को चलाते रहें, ताकि वह कहीं पैन में चिपकने न पाए, नहीं तो स्वाद कड़वा हो जाएगा। जब चीनी का रंग भूरा हो जाए तो आंच बंद कर दें और उसे चलाते रहें। जब चीनी ठंडी होकर गाढ़ी होने लगे तो उसे किसी थाली में हल्का घी लगा कर पतली परत में फैला दें। थोड़ी देर में चीनी सूख कर कांच की शक्ल में हो जाएगी। अब इसे सावधानी से निकाल लें और फिर ग्राइंडर में डाल कर पीस लें। इसे अलग रखें।

फिर ब्रेड के किनारों का भूरा हिस्सा काट कर अलग कर दें और छोटे टुकड़े करके इन ब्रेड को भी ग्राइंड कर लें। ब्रेड क्रम तैयार हो जाएगा। पर चूंकि इसमें हल्की नमी रहती है, इसलिए इसका पाउडर बनाना ठीक नहीं। सो, नॉनस्टिक पैन में डाल कर हल्की आंच पर इसे चलाते हुए सेंक लें। ध्यान रखें कि ब्रेड क्रम का रंग न बदलने पाए और न वह कहीं चिपकने पाए। बस इसकी नमी निकालनी है। इसे भी अलग रखें और ठंडा होने दें।

इलाइची का छिलका उतार कर कूट लें। पिस्ता के छोटे-छोटे टुकड़े काट लें। अब पिसी हुई कैरेमलाइज्ड चीनी, मिल्क पाउडर, ब्रेड क्रम और पिस्ता, इलाइची पाउडर को एक साथ मिला कर अच्छी तरह फेंट लें। इस पाउडर को एक एयरटाइट जार में रख दें।
जब भी कुल्फी बनानी हो, आधा लीटर दूध उबालें। उबाल आ जाए तो उसमें पांच-सात केसर के लच्छे डालें और फिर कुल्फी मिश्रण में से चार चम्मच पाउडर लेकर मिला दें। मिश्रण को चलाते रहें।

चार-पांच मिनट में कुल्फी का घोल गाढ़ा हो जाएगा। अब आंच को बंद कर दें और मिश्रण ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसे कुल्फी मोल्ड या मिट्टी की मटकियों में भर कर बारह-पंद्रह घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। इस तरह जब मन हो, कुल्फी खुद बनाएं और खाएं।

दही-राई वाले आलू
आलू एक ऐसी तरकारी है, जो हर किसी को पसंद है और हर कहीं खाई जाती है। इसे चाहे जिस सब्जी के साथ मिला दें उसके स्वाद में रम जाता है। इसलिए हर इलाके में इसे अलग-अलग ढंग से बनाया जाता है। यों रसेदार आलू या दमआलू तो हर कहीं बनता है, पर जम्मू और कश्मीर में दही और राई के साथ इसे कुछ अलग ही ढंग से बनाया जाता है। इसका स्वाद निराला होता है। कहते हैं कि इस तरकारी की विधि डोगरा राजाओं के खानसामों ने खोजी थी।

खैर, इसे बनाना बहुत आसान है। इसे बनाने के लिए खास तैयारी की जरूरत पड़ती है, तो वह है राई और दही का मिश्रण तैयार करना। दो चम्मच राई या काली सरसों को ग्राइंड करके पाउडर बना लें। अब एक मध्यम आकार की कटोरी के बराबर दही लें और उसमें राई पाउडर डाल कर अच्छी तरह फेंट लें। इसे ढंक कर कम से कम रात भर के लिए या बारह से पंद्रह घंटे छोड़ दें। राई फर्मंटेड होकर अपनी खटास छोड़ देगी और यही इस सब्जी को अलग स्वाद देगी।

अब चार बड़े आलू उबाल कर छिलका उतारें और थोड़े बड़े टुकड़ों में काट लें। इसी में एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक चम्मच धनिया पाउडर, थोड़ा-सा हल्दी पाउडर, जरूरत भर का नमक और आधा चम्मच गरम मसाला डाल कर अच्छी तरह मिला लें, ताकि सारे मसाले आलुओं पर अच्छी तरह चिपक जाएं। इसे पंद्रह-बीस मिनट तक रमने दें।

फिर एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच सरसों तेल गरम करें। उसमें एक चम्मच सौंफ का तड़का दें। जम्मू-कश्मीर की सब्जियों में सौंफ का इस्तेमाल अवश्य होता है। तड़का तैयार हो जाए, तो आलुओं को छौंक दें और धीमी आंच पर चलाते हुए पांच मिनट के लिए पकाएं। अब उसी में दही-राई का घोल डालें और चलाते हुए पकाएं। जब रसा गाढ़ा हो जाए, तो आंच बंद कर दें। यह तरकारी सूखी नहीं बनती, थोड़ा रसा होता है, इस बात का ध्यान रखें। दही-राई वाले आलू तैयार हैं। इसे रोटी, नॉन, परांठे, किसी के भी साथ परोसें और आनंद लें।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 रविवारी शख्सियत: शौर्य और श्रद्धा की देवी अहिल्याबाई होल्कर
2 जनसत्ता रविवारी सेहत: कोरोनाकाल में गर्भवती महिलाएं, कुछ बातों पर गौर जरूरी
3 जनसत्ता रविवारी दाना-पानी: कुछ शरबत हो जाए
IPL 2020 LIVE
X