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दाना-पानी: पाक साझा स्वाद साझा

पाकशास्त्र कहता है कि अगर अनाज, दाल और सब्जी को मिश्रत रूप में पकाया और खाया जाए, तो स्वाद और पोषण बढ़ जाता है।

चौलाई-मूंगदाल (ऊपर) और मूली-मसूर अंकुरित।

मानस मनोहर

आमतौर पर लोग अनाज और सब्जियों को अलग-अलग या स्वतंत्र रूप से बनाना और खाना पसंद करते हैं। मगर पाकशास्त्र कहता है कि अगर अनाज, दाल और सब्जी को मिश्रत रूप में पकाया और खाया जाए, तो स्वाद और पोषण बढ़ जाता है। हालांकि भोजन को आपस में मिला कर पकाते समय कुछ सावधानियों की भी आवश्यकता होती है, नहीं तो विरुद्ध आहार सेहत के लिए नुकसानदेह भी हो सकते हैं। इस बार कुछ ऐसे व्यंजन जो रोज बनते और खाए जाते हैं, उनमें मिश्रण करके बनाने पर चर्चा करते हैं।

चौलाई-मूंगदाल

चौलाई और मूंगदाल दोनों ऐसे खाद्य हैं, जो किसी भी उम्र और किसी भी गुण-दोष वाले लोग खा सकते हैं। इन दोनों चीजों में रेशे बहुतायत होते हैं। चौलाई का साग खून साफ करने और पेट संबंधी विकार दूर करने में मदद करता है। यों भी भोजन में साग की कुछ न कुछ मात्रा अवश्य रखनी चाहिए। चौलाई सब जगह सहज उपलब्ध हो जाने वाला देसी साग है। इसकी दो प्रजातियां होती हैं- हरी और लाल चौलाई। जो सहजता से मिल जाए, खरीद लेना चाहिए।

चौलाई-मूंगदाल बनाना बहुत आसान है। यों भी देसी व्यंजन बनाने के लिए बहुत कौशल की जरूरत नहीं होती। मगर देसी भोजन में थोड़ा प्रयोग करें, तो न सिर्फ उसका स्वाद अलग हो जाता है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बढ़ जाती है। इसलिए प्रयोग करते रहना चाहिए। चौलाई-मूंगदाल बनाने के लिए छिलके वाली मूंग दाल लें। उसे अच्छी तरह धोकर तीन-चार घंटे के लिए भिगो कर रख दें। फिर चौलाई के पत्तों को डंठल से अलग करके अच्छी तरह तीन-चार बार धोएं और पानी निथार लें।

कुकर में आधा गिलास पानी के साथ थोड़ा नमक और हल्दी डाल कर मूंगदाल को तेज आंच पर एक सीटी के लिए उबाल लें। सीटी आते ही आंच बंद कर दें। मूंगदाल बहुत कोमल होती है, इसलिए कुकर में ज्यादा देर नहीं पकाना चाहिए, वरना वह पूरी तरह गल जाएगी। हमें दाल को बस नरम होने तक पकाना है, क्योंकि इसे साग के साथ भी पकाना होगा। फिर चौलाई के पत्तों को महीन-महीन काट लें। एक कड़ाही में दो चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें जीरा, सौंफ, साबुत धनिया और हींग का तड़का दें और चौलाई को छौंक दें। आधा चम्मच नमक और हल्दी डाल कर एक बार चलाएं और ढक्कन लगा कर मध्यम आंच पर पकने दें।

आठ-दस मिनट बाद ढक्कन खोल कर एक बार फिर चौलाई को चलाएं। चौलाई पक चुकी है। अब उसमें एक-डेढ़ चम्मच गरम मसाला डालें और अच्छी तरह मिलाएं। इसी में पकी हुई मूंगदाल डालें और अच्छी तरह मिला कर पकने दें। ध्यान रखें कि इस दाल को बहुत पतला नहीं बनाना है। थोड़ी गाढ़ी ही रखें। इसलिए इसमें अधा गिलास पानी और डालें और ढक्कन लगा कर दाल को करीब दस मिनट के लिए और पकने दें। दाल और साग पक कर आपस में मिल चुके हैं। एक चम्मच से निकाल कर नमक देखें, कम हो, तो और जरूरत भर का नमक डालें और ऊपर से लंबी कटी हरी मिर्च और अदरक के लच्छे डाल कर गरमा-गरम परोसें। यह दाल-सब्जी का भी अच्छा विकल्प है।

मूली-मसूर अंकुरिता
सलाद या नाश्ते के रूप में तो चने, मूंग आदि को अंकुरित करके बहुत सारे लोग खाते हैं। पर अंकुरित अनाजों को रोज-रोज कच्चा नहीं खाना चाहिए, इससे शरीर में विषाक्तता बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए अंकुरित को खाने का सही तरीका है कि उसे थोड़ी देर गरम पानी में रखें और फिर ठंडे पानी से धोकर खाएं। इस तरह उसका कचकचापन भी बना रहता है और कच्चा खाने से पैदा होने वाले खतरे भी टल जाते हैं।

साबुत मसूर को रात भर के लिए भिगो दें, जैसे चना, मूंग आदि भिगोते हैं। फिर उसे छान कर महीन कपड़े में लपेट कर रखें, उसमें अंकुर फूट आएंगे। इस तरह मसूर नरम भी हो जाती है और उसका स्वाद और पोषण बढ़ जाता है। साबुत मसूर की दाल तो सभी खाते हैं, पर इसका मूली के पत्तों के साथ मिश्रण करके बनाएं, तो स्वाद लाजवाब हो जाता है।

मूली पेट संबंधी विकार मिटाने में बहुत कारगर खाद्य है। इसका रस पीलिया को दूर करता है, अगर किसी के पेट में पथरी है, तो उसे भी गलाता है। इन दिनों मूली आने लगी है। मूली के पत्तों को फेंकें नहीं। नरम पत्तों को अच्छी तरह धोकर बारीक काट लें।

अब एक ढक्कनदार कड़ाही लें। उसमें दो-तीन चम्मच सरसों तेल डालें और जीरा, लाल मिर्च, लहसुन और बारीक कटी हरी मिर्च का तड़का दें। उसमें पहले मूली के पत्तों को छौंक दें। उसमें आधा चम्मच नमक, चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर डाल कर पांच-सात मिनट तक ढक्कन लगा कर पत्तों को पकने दें। एक कुकर में आधा गिलास पानी, आधा चम्मच नमक, चुटकी भर हल्दी पाउडर डाल कर अंकुरित मसूर दाल को डाल कर तेज आंच पर दो सीटी आने तक पकाएं।

भाप शांत हो जाए तो कुकर का ढक्कन खोलें और दाल को पानी समेत मूली के पत्तों में डाल दें। ऊपर से एक चम्मच गरम मसाला डालें और सारी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद कड़ाही पर ढक्कन लगा दें। धीमी आंच पर करीब दस मिनट तक पकने दें। हरी-भरी मसूर दाल तैयार है। इसे गरमा गरम रोटी के साथ खाएं। इस तरह साग के साथ मिश्रित करके दूसरी दालें भी बना सकते हैं।

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