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दाना-पानी: सेहत का राज देसी अनाज

आयुर्वेद कहता है कि हमें वही खाना चाहिए जो हमारे आसपास पैदा होता है। मगर कुछ तो खाद्यान्न की कमी को पूरा करने के मकसद से और कुछ विदेशी जायके की लत में हमने अपनी देसी फसलों को छोड़ कर बहुत सारी ऐसी चीजें उगानी और खानी शुरू कर दी हैं, जो हमारी सेहत के अनुरूप नहीं है। इस बार कुछ देसी अनाज के व्यंजन।

देसी अनाज के कई स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन बनाए जा सकते हैं।

मानस मनोहर

बाजरे का खस्ता
बाजरा शुद्ध देसी अनाज है। जिन इलाकों में पानी कम बरसता है, उन इलाकों में इसकी फसल खूब होती है। इस मौसम में बाजरे की फसल कट रही है। ताजा बाजरा बाजार में आने लगा है। पोषण से भरपूर बाजरे की तासीर थोड़ी गरम होती है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे सर्दी में खाते हैं। पर इस मौसम में थोड़ा-थोड़ा खाने में कोई हर्ज नहीं।

आमतौर पर बाजरे की रोटी, खिचड़ी और भात बनाया जाता है, मगर इससे कुछ नाश्ते की चीजें बना कर रख लें और बिस्कुट की जगह चाय वगैरह के साथ उसे खाएं, तो ज्यादा बेहतर है। कई बड़ी कंपनियां बाजरा, रागी, मड़ुआ, जई यानी ओट्स के बिस्कुट और नमकीन बना कर बेचने लगी हैं। वह सब घर में ही बना कर खाएं, तो क्या बुरा है।

बाजरे का खस्ता एक प्रकार का देसी बिस्कुट है। इसे घर में बनाना बहुत आसान है। पहले थोड़ी मात्रा में बनाएं, फिर जब स्वाद और बनाने का ढंग सध जाए, तो ज्यादा मात्रा में बना कर पंद्रह-बीस दिनों के लिए रख लें और चाय के साथ इसे खाते रहें। खस्ता बनाने के लिए सबसे पहले डेढ़ कप दूध में करीब आधा कप गुड़ डाल कर अच्छी तरह पिघलने तक उबालें और फिर दूध को गुनगुना होने दें।

अब दो कप बाजरे का आटा लें। बाजरे का आटा हर जगह चक्की पर ताजा पिसा मिल जाता है। आटे में एक चम्मच सौंफ को दरदरा कूट कर डालें और आधा चम्मच नमक भी डाल दें। बाजरे के साथ देसी घी का मेल बहुत जबर्दस्त होता है। उसके बिना मजा नहीं आता। करीब एक कप पिघला हुआ देसी घी आटे में डालें और दोनों हथेलियों से अच्छी तरह रगड़ कर मिलाएं। बाजरा सारे घी को जज्ब कर लेगा। फिर थोड़ा-थोड़ा करके गुड़ मिला गुनगुना दूध डालते हुए आटे को कड़ा गूंथ लें।

गूंथे हुए आटे को देर तक न रखें, नहीं तो भुसभुसा होकर बंधेगा नहीं। गूंथने के साथ ही जल्दी से इसकी बिस्कुट के आकार में गोलाकार चपटी टिक्कियां बना लें। ऊपर से सफेद तिल के कुछ दाने डाल कर दबा दें। ध्यान रखें कि टिक्कियों की मोटाई अधिक न हो। इन में फोर्क, टुथपिक या माचिस की तीली से दो-तीन जगह छेद कर दें।
अब एक कड़ाही में घी गरम करें।

घी अच्छी तरह गरम हो जाए, तो आंच को मध्यम कर दें और फिर उसमें बाजरे की टिक्कियों को डाल कर खस्ता होने तक तल लें। ध्यान रखें कि आंच तेज होगी, तो खस्ते ऊपर से जल जाएंगे और भीतर से नरम रहेंगे। इसलिए इन्हें धीमी आंच पर देर तक तलें। बाजरे का खस्ता तैयार है। इन्हें डिब्बे में भर कर रख लें और चाय के साथ आनंद लें।

नोट : अगर आप घी में न तल कर इसे ओवन या गैस तंदूर में बनाना चाहें, तो वह भी कर सकते हैं। ओवन में एक सौ अस्सी डिग्री पर पंद्रह से बीस मिनट के लिए पकाएं।

मूंगलेट
जो लोग शुद्ध शाकाहारी हैं और अंडा नहीं खाते, उनके लिए आमलेट की तरह मूंगलेट बनाया जाता है। यह एक प्रकार का चीला ही है, पर चीले से थोड़ा भिन्न होता है। बनाने में भी और स्वाद में भी। मूंगलेट बनाने के लिए थोड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। मगर अच्छा खाना है, तो थोड़ी मेहनत करने में हर्ज नहीं।

मूंगलेट मूंग दाल से बनता है। मूंग भी हमारी देसी उपज है। यह हर किसी के लिए मुफीद दाल है- सुपाच्य और गुणकारी। धुली मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर कम से कम चार-पांच घंटे या फिर रात भर के लिए भिगो दें। फिर पानी निथार कर ग्राइंडर में अच्छी तरह पीस लें। बिल्कुल बारीक पेस्ट बनाएं। अब करीब आधे घंटे के लिए इसे ढंक कर रख दें।

इस बीच में शिमला मिर्च, प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया बारीक-बारीक काट लें। दाल और सब्जियों की मात्रा आप अपने हिसाब से तय कर सकते हैं कि कितने लोगों के लिए मूंगलेट बनाना है, उसी हिसाब से सारी चीजें लें।
अब मूंगदाल के पेस्ट को एक बार अच्छी तरह फेंट लें। उसमें से एक कटोरी पेस्ट निकालें, जरूरत भर का नमक डालें, ऊपर से आधी कटोरी के बराबर सारी कटी हुई सब्जियों में से डालें और अच्छी तरह मिला लें। फिर आधा चम्मच ईनो पाउडर डालें और उस पर एक चम्मच पानी डाल कर हल्के हाथों से दो तीन बार उलट-पलट कर घोल में मिला दें। ज्यादा न फेंटें, नहीं तो ईनो का असर चला जाएगा।

एक नॉन स्टिक पैन गरम होने रखें। आंच को मध्यम रखें। मूंगलेट को बटर में बनाएं, तो स्वाद अच्छा आता है। बटर न हो, तो देसी घी का इस्तेमाल करें। पैन जैसे ही हल्का गरम हो, उसमें एक से डेढ़ चम्मच के बराबर बटर डालें और फिर सावधानी से सब्जी मिला हुआ घोल डालें। घोल को पैन के चारों तरफ बराबर मोटाई में फैला लें। हल्की आंच पर सिंकने दें। जब ऊपर का हिस्सा सख्त नजर आने लगे, तो मूंगलेट को पलट दें और उधर वाले हिस्से में भी बटर डालें। धीमी आंच पर पकने दें।

जब दूसरी तरफ का हिस्सा भी हल्का सुनहरा हो जाए, तो पलट कर एक बार फिर दोनों तरफ से पका लें, ताकि ऊपर की सतह थोड़ी कुकुरी हो जाए। मूंगलेट तैयार है। इसे हरी या लाल चटनी के साथ खाएं, स्वाद लाजवाब होता है। सुबह के नाश्ते में खाना चाहें या रात को भोजन के तौर पर खाना चाहें, यह संपूर्ण आहार है।

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