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दाना-पानीः सदाबहार स्वादिष्ट सुपाच्य – कढ़ी

कुछ व्यंजन ऐसे होते हैं, जिन्हें हर मौसम में खाया जा सकता है। वे पौष्टिक, स्वादिष्ट और सुपाच्य भी होते हैं। गरमी में ज्यादा तेल-मसाले वाली चीजें खाने का मन नहीं होता। इसलिए ऐसे व्यंजन आजमाए जा सकते हैं, जो पेट के लिए मुफीद हों। कढ़ी ऐसा ही व्यंजन है, जिसे किसी भी मौसम में खाना अच्छा लगता है। इस बार कढ़ी के बारे में ही बात करते हैं।

Author May 20, 2018 6:07 AM
कढ़ी में बेसन और दही मुख्य तत्त्व हैं, जिन्हें खाने से पेट संबंधी गड़बड़ी की आशंका नहीं रहती।

कुछ व्यंजन ऐसे होते हैं, जिन्हें हर मौसम में खाया जा सकता है। वे पौष्टिक, स्वादिष्ट और सुपाच्य भी होते हैं। गरमी में ज्यादा तेल-मसाले वाली चीजें खाने का मन नहीं होता। इसलिए ऐसे व्यंजन आजमाए जा सकते हैं, जो पेट के लिए मुफीद हों। कढ़ी ऐसा ही व्यंजन है, जिसे किसी भी मौसम में खाना अच्छा लगता है। इस बार कढ़ी के बारे में ही बात करते हैं।

कढ़ी में बेसन और दही मुख्य तत्त्व हैं, जिन्हें खाने से पेट संबंधी गड़बड़ी की आशंका नहीं रहती। कढ़ी को बासी भी खाया जा सकता है। इसे चावल और रोटी दोनों के साथ खाया जा सकता है। यह सब्जी और दाल दोनों का विकल्प है। कढ़ी अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरीके से बनती है। पंजाब में यह गाढ़ी और मसालेदार बनती है, जिसमें प्याज, पालक आदि के पकौड़े डाले जाते हैं। गुजरात में कढ़ी थोड़ी मीठी और पतली बनती है, जिसे पीया भी जाता है। राजस्थान की कढ़ी भी पतली होती है, पर उसमें लाल मिर्च का उपयोग अधिक होता है। कढ़ी बनाने के लिए दही के बजाय छाछ का उपयोग करना चाहिए। मदर डेरी, अमूल आदि किसी का भी छाछ खरीद लें।

अब अगर कढ़ी में पकौड़ा डालना चाहते हैं, तो पकौड़ा सिर्फ बेसन का बनाएं, उसमें प्याज, पालक आदि न डालें। बिना पकौड़े की कढ़ी बना रहे हैं तो उसमें मेथी या पालक के पत्ते काट कर डाल सकते हैं। पकौड़ा बनाने के लिए बेसन में आधा छोटा चम्मच अजवाइन के दाने, नमक, हल्दी पाउडर, थोड़ा-सा लाल मिर्च और हींग डाल कर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए गाढ़ा फेंट लें। एक कटोरी में पानी लें और उसमें एक बूंद मिश्रण डाल कर देखें, अगर वह तैरने लगता है, तो बेसन ठीक से फेंटा जा चुका है।

अब एक कड़ाही में तेल गरम करें और उसमें चम्मच की मदद से थोड़ा-थोड़ा बेसन का घोल डालें और छोटे-छोटे पकौड़े तल लें। इसके साथ ही पाना यानी छनौटा (जिससे कड़ाही से पकौड़े या पूड़ी वगैरह निकालते हैं) पर बेसन का घोल डालें और चम्मच से दबाते हुए थोड़े-से मोटे सेव भी तल लें। कढ़ी में पकौड़े कम रखें, सेव की मात्रा बढ़ा दें।

जिस बर्तन में बेसन फेंटा था उसमें बेसन चिपका रह गया होगा। उसी में छाछ डाल कर बेसन को घोल लें। अलग से बेसन डालने की जरूरत नहीं। कढ़ी में बहुत कम बेसन की जरूरत होती है। जैसे एक लीटर छाछ में आधे से एक चम्मच बेसन काफी होता है। इतना बेसन प्राय: घोल वाले बर्तन में चिपका रहता है। अब छाछ में नमक, थोड़ा-सा हल्दी पाइडर, एक चम्मच चीनी और आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालें। अगर आपको पसंद हो तो आधा छोटा चम्मच सिर्फ धनिया पाउडर भी डाल सकते हैं। इन सारी चीजों को ठीक से मिला लें।

अब एक कड़ाही में दो चम्मच खाने का तेल गरम करें। उसमें साबुत धनिया, जीरा, सौंफ, राई और मेथी दाने का तड़का लगाएं। सब्जी के लिए जितना तड़का लगाते हैं, कढ़ी के लिए तड़के की सामग्री उससे दोगुना रखें। कढ़ी काते समय उसमें मेथी दाना, धनिया, सौंफ आदि का स्वाद बहुत अच्छा लगता है। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें हींग भी डाल दें। अगर आपको कढ़ी में प्याज पसंद हो तो छोटे आकार का एक प्याज लंबा-लंबा काट कर तड़के में डाल दें और जब वह आधा पक जाए तो छाछ का मिश्रण कड़ाही में डालें और आंच धीमी कर दें।

मिश्रण को लगातार चलाते हुए पकाएं। जब कढ़ी में उबाल उठने लगे तो आंच मद्धिम कर दें और पांच मिनट और पका लें। कढ़ी तैयार है। इसे अलग बर्तन में निकालें और उसमें पकौड़े और सेब डाल कर रख दें। इसमें ऊपर से चुटकी भर कसूरी मेथी भी डाल दें। खाने से पहले एक पैन में दो चम्मच देसी घी गरम करें और उसमें कढ़ी पत्ता, सरसों के दाने, जीरा, थोड़ी-सी हींग और साबुत लाल मिर्च का तड़का लगाएं और कढ़ी के ऊपर डाल दें।

नोट : कढ़ी में हींग जरूर डालें। जब घोल बनाएं तब भी थोड़ा हींग डालें और फिर तड़के में भी। इसके लिए बांधनी हींग उत्तम रहता है।

कुछ नुस्खे

1. आटा गूंथते समय आधा कप दूध भी डालें और उसे गुनगुने पानी से गूंथें, तो रोटी, परांठा और पूड़ी नरम बनेगी।
2. आटा न तो अधिक कड़ा रखें और न पतला।
3. गूंथने के बाद आटे को कम से कम पंद्रह मिनट के लिए ढंक कर अवश्य रखें। इससे आटा ठीक से पानी को जज्ब कर लेगा।
4. आटा गूंथ कर फ्रिज में न रखें। आटा उतना ही गूंथें, जितने की जरूरत हो। फ्रिज में रखे आटे की रोटियां भी स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छी नहीं मानी जातीं।

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