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आस्था और अमन का गलियारा

करतारपुर साहिब गलियारा खोलने को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बनी सहमति से एक बार फिर दोनों देशों के बीच अमन की उम्मीद जगी है। यों इस गलियारे को खोलने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी, पर दोनों मुल्कों के बीच तनाव भरे रिश्तों में इस पर सहमति नहीं बन पा रही है। अब बनी है, तो इससे न सिर्फ सिख धर्म की आस्था का गलियारा खुलेगा, बल्कि लंबे समय से शांति बहाली और व्यापार आदि संबंधी रुकी बातचीत के आगे बढ़ने की भी सूरत बनेगी। पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद वहां आर्थिक मोर्चे पर नए सिरे से काम करने की पहल दिखाई दे रही है। इसलिए कई देशों के साथ वह अपने रिश्ते सुधारने की भी कोशिश करेगा। करतारपुर साहिब गलियारा खुलने के निहितार्थ क्या हैं और इससे क्या लाभ होने वाले हैं, बता रहे हैं संजीव पांडेय।

Author December 2, 2018 4:48 AM
भारतीय और पाकिस्तानी सीमा में गलियारे का शिलान्यास हो चुका है।

धर्म अक्सर तनाव को खत्म कर शांति की दिशा में पथ-प्रदर्शक बनता है। इस बार भारत-पाकिस्तान सीमा पर शांति बहाली की दिशा में करतारपुर साहिब गलियारा एक माध्यम बना है। कई दशकों से दुश्मनी झेल रहे दोनों मुल्कों के बीच करतारपुर साहिब गलियारे को लेकर सहमति बन गई। भारतीय और पाकिस्तानी सीमा में गलियारे का शिलान्यास हो चुका है। सदियों पहले गुरु नानक देव ने तमाम सीमाओं को लांघते हुए कई मुल्कों में शांति का संदेश दिया था। आज गुरु नानक देव भारत और पाकिस्तान के बीच शांति का माध्यम बन बन रहे हैं।

पाकिस्तान और भारत के बीच करतारपुर साहिब गलियारे को लेकर सहमति एक अच्छा संदेश है। यह फैसला चंद दिनों में नहीं लिया गया। दोनों मुल्कों के बीच पिछले दरवाजे से बातचीत चल रही थी। लेकिन करतापुर साहिब गलियारे को लेकर खुलासा तब हुआ था जब पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने भारतीय पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को इसकी जानकारी दी। करतारपुर साहिब गलियारा भारत की पश्चिमी सीमा पर अच्छे संकेत लेकर आएगा, क्योंकि इसका संदेश यह है भी है कि दोनों मुल्क लंबे समय तक सीमा पर तनाव झेलने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए सीमा पर झड़प के साथ-साथ बातचीत भी जारी है। करतारपुर गलियारे के शिलान्यास ने संकेत दिया है कि भविष्य में भारत-पाकिस्तान के बीच अफगानिस्तान तक जाने वाले आर्थिक गलियारे को लेकर भी सहमति बन सकती है। यह आर्थिक गलियारा अमृतसर से लाहौर-इस्लामाबाद होकर अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों तक जाएगा। दरअसल, करतारपुर साहिब गलियारे को शुरू करने का फैसला इमरान खान ने नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना ने ही किया है। क्योंकि सच्चाई तो यही है कि पाकिस्तान की विदेश नीति चुनी हुई सरकार नहीं, बल्कि सेना नियंत्रित करती है। राय यही है कि अगर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने करतारपुर गलियारे का दुरुपयोग नहीं किया, तो यह धार्मिक गलियारे भविष्य में भारत-पाकिस्तान शांति का आधार बनेगा।

दक्षिण एशिया में स्थिति बदलती नजर आ रही है। रूस अफगान शांति वार्ता में मध्यस्थ बन चुका है। हाल ही में मास्को में रूस प्रायोजित बातचीत में तालिबान के लीडर शामिल हुए। इस बैठक में अफगानिस्तान के हाई पीस काउंसिल के सदस्य भी पहुंचे। रूस ने कई देशों को आमंत्रित किया था। बैठक में भारत सरकार के दो सेवानिवृत्त अधिकारी भी गए। रूस ने इस बैठक में ग्यारह देशों को आमंत्रित किया था, जिसमें भारत, पाकिस्तान और ईरान भी शामिल थे। इस बैठक का एक संदेश यह भी था कि रूस दक्षिण एशिया में शांति प्रयासों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है। बैठक का एक संदेश यह भी था कि रूस भारत-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर करने के पक्ष में है। क्योंकि रूस को पता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव का मुख्य कारण कश्मीर नहीं, बल्कि अफगानिस्तान है। अफगानिस्तान में रूसी दखल खासा बढ़ा है। पाकिस्तान इस सच्चाई को समझ चुका है। यही कारण है कि वह रूस से अपने संबंधों को काफी हद तक ठीक कर चुका है। भारत भी अफगानिस्तान की जमीनी सच्चाई को समझ रहा है। रूस मध्य एशिया के रास्ते दक्षिण एशिया के बाजार में तेल और गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है। यह तभी संभव है जब भारत-पाक सीमा पर शांति बहाली हो। भारत और पाकिस्तान सीमा पर शांति का लाभ इस समय चीन और रूस दोनों को है।

इस साल की शुरुआत में जनरल कमर जावेद बाजवा का ‘बाजवा डॉक्ट्राइन’ लोगों के सामने आया था। इस सिद्धांत में कुछ संकेत मिले थे कि बाजवा भारत से आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के इच्छुक हैं। कुछ पाकिस्तानी पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाजवा ने कहा था कि पाकिस्तान भारत से आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए खासा इच्छुक है। बाजवा के अनुसार भारत और पाकिस्तान अमेरिका-कनाडा के मॉडल पर आपस में व्यापार कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान से संबंधों को बेहतर बना कर क्षेत्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को ठीक करने की बात की थी। बाजवा के इस खुलासे के बाद संकेत यही थे कि भारत से शांति की कोशिश सेना शायद गंभीरता से करे। जब इमरान खान के शपथग्रहण के वक्त नवजोत सिंह सिद्धू को करतारपुर धार्मिक गलियारे से संबंधित प्रस्ताव की जानकारी जनरल बाजवा ने दी, तो यह स्पष्ट हो गया था कि पंजाब सीमा पर शांति को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले दरवाजे से बातचीत हो रही है। यह तय है कि करतारपुर गलियारे को लेकर पाकिस्तानी सेना ने अपनी सहमति दी और इमरान खान को आगे किया। कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी के बीच शांति वार्ता की पहल के कुछ और संकेत भी बीच-बीच में आते रहे। बाजवा डॉक्ट्राइन की खासी चर्चा के बीच इसी साल मार्च में पाकिस्तान दिवस पर आयोजित मिलिट्री डे परेड में इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में पदास्थापित डिफेंस अटैची को आमंत्रित किया। डिफेंस अटैची मिलिट्री परेड में बतौर अतिथि पहुंचे। इसे पाकिस्तानी सेना की तरफ से भारत को भेजा गया एक शांति संदेश बताया गया था।

पाकिस्तान की खराब होती अर्थव्यवस्था का असर पाकिस्तानी सेना पर भी पड़ रहा है। पाकिस्तानी सेना का सलाना बजट दस अरब डॉलर के करीब पहुंच गया है। यही नहीं, पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था भारी कर्ज में है। खराब होती अर्थव्यवस्था भविष्य में सैन्य बजट पर असर डालेगा। सलाना पंद्रह से बीस प्रतिशत सैन्य बजट में इजाफा वक्त की मांग है। अगर भारत और अफगानिस्तान सीमा पर शांति रहेगी, तो सैन्य बजट में जहां बढ़ोतरी की जरूरत नहीं पड़ेगी, वहीं पाकिस्तान का आर्थिक विकास तेजी से होगा। भविष्य में पाकिस्तानी सेना के सैन्य बजट के लिए मुश्किलें इसलिए भी बढ़ेंगी कि अब अमेरिका पाकिस्तान को मिलने वाले सैन्य सहायता को रोकने में लगा है। वैसे में पाकिस्तानी अवाम ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना की जरूरत भी भारतीय सीमा पर शांति है। दूसरी तरफ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब है। स्टेट बैंक आॅफ पाकिस्तान के अनुसार पाकिस्तान पर कुल बाहरी कर्ज इक्यानबे अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया है। पिछले चार सालों में कर्ज में भारी बढ़ोतरी हो गई है। इसी दौरान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खासी गिरी। क्योंकि अफगानिस्तान सीमा पर जहां सेना को जर्ब-ए-अज्ब अभियान चलाना पड़ा, वहीं भारतीय सीमा पर भी लगातार तनाव रहा। इससे पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा। पाकिस्तान ने जो कर्ज लिए हैं, उसके भुगतान के लिए पैसे नहीं हैं। पाकिस्तान कर्ज वापसी के लिए कभी अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष से पैसे मांगता है, तो कभी चीन से, तो कभी सऊदी अरब से। पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा रिजर्व आठ अरब डॉलर के आसपास रह गया है। वैसे में पड़ोसी मुल्क भारत से शांति पाकिस्तान के लिए लाभदायक है।

अगर पाकिस्तान के रास्ते भारत से व्यापार बढ़ेगा तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। चीन की रुचि भी भारत-पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में है, क्योंकि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की सफलता भारत-पाकिस्ताना संबंधों पर ही तय होगा। पाकिस्तान के पूर्वी और पश्चिमी सीमा पर लगातार तनाव चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की सफलता पर लगातार सवाल पैदा कर रहे हैं। पर अगर भारत इस आर्थिक गलियारे का उपयोग करे, तो इसका लाभ चीन और पाकिस्तान दोनों को मिलेगा। हालांकि पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में चीन के निवेश को लेकर भारत का जबर्दस्त विरोध है।
पाकिस्तानी व्यापारी वर्ग भारत से बेहतर संबंधों की लगातार वकालत कर रहा है। बीते समय में कई बार पाकिस्तानी व्यापारी पाकिस्तान-भारत संबंध ठीक करने की मांग कर चुके हैं। अमृतसर और लाहौर के व्यापारियों को करतारपुर धार्मिक गलियारे से काफी उम्मीद है। क्योंकि यह अमृतसर-लाहौर व्यापारिक मार्ग से व्यापार को आगे बढ़ाने का आधार बनेगा। लाहौर चैंबर आॅफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री कई बार पंजाब सीमा को व्यापार के लिए खोलने की मांग कर चुका है।

2014 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर फिरोजपुर जिला स्थित हुसैनीवाला और फजिल्का जिला स्थित सुलेमानकी सीमा से व्यापार शुरू करने की मांग की थी। क्योंकि अभी पंजाब के रास्ते सिर्फ अटारी सीमा से पाकिस्तान के साथ व्यापार होता है। पाकिस्तान-भारत की द्विपक्षीय व्यापार क्षमता तीस अरब डॉलर के करीब है। लेकिन दोनों मुल्कों के बीच द्विपक्षीय व्यापार इस समय लगभग 2.5 अरब डॉलर है। पाकिस्तान के कई औद्योगिक क्षेत्रों को भारत से लाभ मिलेगा। पाकिस्तान का वाहन उद्योग भारत के गुरुग्राम और मानेसर से जरूरी वाहन पाटर््स का आयात कर सकता है। दवा उद्योग को भारी लाभ मिलेगा। क्योंकि पाकिस्तान में अब भी जरूरी कई दवाइयां काफी महंगी हैं। दोनों मुल्कों में कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। भारतीय पंजाब के आलू उत्पादकों को लाभ मिलेगा तो पाकिस्तानी पंजाब के फल उत्पादकों को भी लाभ मिल सकता है।
पाकिस्तान में नागरिक समाज के एक बड़े तबके की राय है कि पाकिस्तान को अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाना चाहिए। अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठा कर पाकिस्तान रूस को बांग्लादेश, म्यांमा और थाईलैंड तक पहुंचने का रास्ता दे सकता है, तो भारत को अफगानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक व्यापार करने का रास्ता उपलब्ध करवा सकता है। इसका सीधा लाभ पाकिस्तान की जनता को होगा। रूस वैसे भी पाकिस्तान और भारत के रास्ते एक एक आर्थिक गलियारा बनाने को इच्छुक हैं, ताकि रूसी तेल और गैस कई मुल्कों तक बेचे जा सके।

हालात और आशंकाएं

करतारपुर कॉरिडोर को लेकर जहां एक ओर खासा उत्साह है, वहीं पाकिस्तान की पहले की हरकतों को देख कर भारतीय खुफिया एजेंसियां आशंकित हैं। खुफिया एजेंसियों ने करतारपुर कॉरिडोर को लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को दी है। बताया जाता है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा कॉरिडोर के शिलान्यास के अवसर मंच से जनरल कमर बाजवा को दी गई चेतावनी का आधार खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट ही थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक गलियारे का इस्तेमाल आईएसआई और खालिस्तान समर्थक संगठन भारत विरोधी गतिविधियों के लिए करेंगे, इसलिए विशेष सावधानी की जरूरत है। खुफिया एजेंसियों ने अपने तर्क में कुछ महत्त्वपूर्ण बातें रखी हैं। एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान स्थित गुरद्वारों पर पाकिस्तान सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के माध्यम से सरकार के इवैक्यू ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड का नियंत्रण है। इस बोर्ड में आईएसआई से जुड़े दो अधिकारियों का नियंत्रण है। गुरद्वारों की संपति की देखरेख इस बोर्ड के नियंत्रण में है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार सिख धर्म से संबंधित धर्म स्थलों का इस्तेमाल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां कर रही हैं। वे यहां से वित्तीय लाभ भी कमा रही हैं, वहीं भारत विरोधी गतिविधियों को भी हवा दे रही हैं। धार्मिक पर्यटन और कार सेवा के नाम पर पूरे विश्व भर में फैले सिखों से चंदा इकट्ठा किया जा रहा है। लेकिन इस चंदे का बड़ा हिस्सा गुरद्वारे के रखरखाव के बजाय आईएसआई अपने खाते में डाल रही है। यही नहीं, इवैक्यू ट्रस्ट प्रापटी बोर्ड के संरक्षण में गुरद्वारों के हजारों एकड़ जमीन पर पाकिस्तान के शक्तिशाली लोगों ने कब्जा कर रखा है। बोर्ड ने गैरकानूनी तरीके से गुरद्वारों की जमीनें बेची भी हैं।

सहूलियत की राह

सन उन्नीस सौ सैंतालीस में विभाजन की भारी त्रासदी पंजाब और बंगाल सीमा पर लोगों ने देखी। पंजाब का विभाजन दो भागों में भारत और पाकिस्तान के रूप में हो गया। पाकिस्तानी पंजाब में बसने वाले ज्यादातर सिख आबादी भारतीय सीमा में आ गए। लेकिन सिखों के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल पाकिस्तान सीमा में रह गए। इसमें गुरद्वारा ननकाना साहिब, करतारपुर स्थिति गुरद्वारा दरबार साहिब, हसन अब्दाल स्थित गुरद्वारा पंजा साहिब शामिल है। इसके अलावा लाहौर शहर में भी कई महत्त्वपूर्ण गुरद्वारे हैं, जिनका संबंध सिख गुरुओं के साथ रहा है। ननकाना साहिब प्रति वर्ष सिखों का जत्था भारत से जाता है।
गुरद्वारा दरबार साहिब करतारपुर का महत्त्व इसलिए है कि यहां पर गुरु नानक देव ने अपने अंतिम समय बिताए थे। यह गुरद्वारा भारतीय पंजाब के गुरदासपुर जिले की सीमा से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तानी पंजाब के नरोवाल जिले में। गुरद्वारा दरबार साहिब भारतीय सीमा से साफ-साफ दिखता है। सीमा से इतना नजदीक होने के कारण लंबे समय से भारतीय पंजाब के लोग गुरद्वारा दरबार साहिब के दर्शन के लिए गुरद्वारे तक बिना वीजा पहुंच की मांग कर रहे थे। बताया जाता है कि पिछले बीस सालों से दोनों मुल्कों के बीच करतारपुर के लिए वीजा फ्री पहुंच को लेकर बातचीत चल रही थी। लेकिन अब कहीं जाकर दोनों मुल्कों के बीच सहमति बनी है।

सिख धर्म से संबंधित धर्म स्थलों के दर्शन के लिए भारत से जाने वाला जत्था फिलहाल अटारी सीमा से पाकिस्तान जाता है। अटारी से भारतीय जत्था पहले लाहौर जाता है। इसके बाद ननकाना साहिब, करतारपुर और हसन अब्दाल जत्था जाता है। इसके अलावा लाहौर स्थित गुरद्वारों का भी दर्शन लोग करते हैं। सामान्य रूप से पाकिस्तान सरकार भारत से जाने वाले जत्थों को सिखों से संबंधित महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थलों तक जाने के लिए वीजा जारी करती है। गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच वीजा जारी करने को लेकर खासे सख्त नियम हैं। दोनों देश नागरिकों को पूरे मुल्क के बजाय चुनिंदा शहरों में जाने का वीजा जारी करते हैं। भारत से जाने वाले सिख जत्थों को लाहौर, ननकाना साहिब, करतारपुर और हसन अब्दाल का वीजा जारी किया जाता है। बैशाखी और गुरुनानक देव के प्रकाश उत्सव पर सिखों का बड़ा जत्था अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान जाता है। करतारपुर कॉरिडोर खुलने के बाद पंजाब के गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक से सीधे करतारपुर तक बिना वीजा प्रवेश मिलेगा। यह दूरी मात्र चार किलोमीटर है।

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