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नन्ही दुनिया- जन्मदिन का तोहफा

स्कूल की घंटी बज चुकी थी। सभी बच्चे जल्दी-जल्दी घर जाने के लिए बस्ता संभाल कर गेट की ओर लपके।

Author March 19, 2017 5:50 AM
प्रतीकात्मक फोटो

पारुल शर्मा

स्कूल की घंटी बज चुकी थी। सभी बच्चे जल्दी-जल्दी घर जाने के लिए बस्ता संभाल कर गेट की ओर लपके। बच्चों में जो उत्साह घर जाने का होता है वह स्कूल आने का कभी नहीं हो सकता। सभी बच्चे अपनी-अपनी बसों में बैठ गए थे। कुछ को खिड़की की सीट मिल गई थी। राजेश की सीट तो तय थी। उसे खिड़की से बाहर के नजारे देखना बहुत पसंद था। उस की आंखें अपने साथ जाने वाले दोस्तों को खोज रही थीं। अचानक उसे संदीप दिखाई पड़ा। वह उसे आवाज देकर बुलाने ही वाला था कि उसकी निगाह रजनी पर पड़ी। बैसाखी का सहारा लिए वह बस की ओर टकटकी लगाए देख रही थी। कंधों पर बस्ते का बोझ संभाले वह अपनी बस की ओर बढ़ रही थी। जब वह चार साल की थी तब एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी। गंभीर चोट आने के कारण इलाज के दौरान उसका एक पांव काटना पड़ा था। स्कूल में आने के बाद से ही वह बैसाखी के सहारे किसी तरह चल लेती थी।
राजेश के पास उसका परम मित्र संदीप पहुंच चुका था। रजनी को भी इसी बस में चढ़ना था। हर रोज की तरह जब वह बस के करीब पहुंची तो कंडक्टर ने उसे झिड़कते हुए कहा,‘ चल अब जल्दी चढ़, ला बस्ता दे।’ रजनी ने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो उसे भीतर खींच कंडक्टर ने ड्राइवर को बस चलाने का इशारा कर दिया। रजनी अभी सीट पर बैठ भी नहीं पाई थी कि झटके से बस चल पड़ी। रजनी किसी तरह गिरती संभलती सीट पर बैठ गई। उस के साथ रोज ऐसे ही होता था। उसकी इस स्थिति को देख कुछ बच्चे तो हंस देते। वह भी खिसियाई-सी घर पहुंचने का इंतजार करती रहती।

रजनी पढ़ने में होशियार थी। इसलिए क्लास के कुछ बच्चे गणित के सवाल पूछने के लिए उस के पास आते। ऐसे ही एक दिन टीचर के आने में देर थी तो निखिल और राजेश उस के पास आए। उन्होंने उसे कुछ सवाल हल करने को कहा। रजनी को भी पढ़ाई में मदद करने में मजा आता। सो वह लग गई सवाल सुलझाने में। इतने में पास रखी उसकी बैसाखी को उठा कर निखिल घुमाने लगा। तेज घूमती बैसाखी निखिल के हाथ से छूट गई और क्लास के दरवाजे से टकरा कर नीचे गिर गई। गिरते ही तेज आवाज से सब बच्चे चौंके। संदीप ने दौड़ कर बैसाखी उठाई। इसी बीच टीचर भी आ चुकी थीं।कक्षा में सन्नाटा छा गया। रजनी की आंखों में आंसू थे। वह अपनी टूटी बैसाखी को वापस पाना चाहती थी। निखिल और राजेश उसकी सीट के पास किसी अपराधी की तरह ठिठके खड़े थे। टीचर ने दोनों को बुलाया और पूछा, ‘बैसाखी किस ने फेंकी।’ दोनों सहमे खड़े थे। निखिल ने कहा,‘मैंने।’ टीचर ने संदीप के हाथ से टूटी बैसाखी ली और कहा,‘यह रजनी के पैरों कासहारा है। इस की मदद से वह चलती है और हिम्मत के बल पर पढ़ाई कर रही है।’ टीचर ने निखिल को रजनी से माफी मांगने को कहा। तभी अंतिम पीरियड खत्म हुआ और छुट्टी की घंटी बज उठी। सभी अपना बस्ता ले कर रोज की तरह बस की ओर लपके। टीचर ने स्कूल की आया को साथ भेज कर किसी तरह रजनी को भी बस तक पहुंचाया। बस चल दी थी। निखिल और राजेश आज की घटना से कभी सहमे हुए थे। निखिल, राजेश से बोला, ‘यार, बैसाखी को मैंने जान कर नहीं तोड़ा।’ इस पर राजेश ने कहा, ‘मैं रोज देखता हूं वह बेचारी बस्ते का बोझ लादे बैसाखी के सहारे बहुत मुश्किल से चलती है।’ फिर बोला, ‘क्यों न हम मिल कर उस की मदद करें।’ निखिल और पास बैठा संदीप भी उसकी बात सुन रहा था। संदीप झट से बोला,‘हां,उस का जन्मदिन भी आने वाला है। कुछ ऐसा तोहफा दें जिससे वह खुश भी हो जाए और उसकी मदद भी हो सके।’

अगले दिन क्लास में निखिल ,राजेश और संदीप ने अपनी योजना साथियों को बताई। सभी बच्चों से अपने पॉकेट मनी में से चंदा देने को भी कहा। इस पर स्वाति ने पूछा कि हम देंगे क्या। यह सुन कर सब सोच में डूब गए।’ मिनी क्लास में रजनी के साथ ही बैठती है। सब की बात सुन कर मिनी ने कहा, ‘हम मिल कर ह्वील चेयर खरीद सकते हैं।’ सभी बच्चे उसके इस सुझाव से खुश हो गए। दो दिन में रजनी का जन्मदिन आने वाला था। चंदा इकट्ठा किया गया। सभी ने अपने घरों में भी अपनी योजना बता दी थी। इस लिए माता-पिता से भी पूरा सहयोग मिला। जब पैसे इकट्ठे हो गए तो राजेश ने क्लास टीचर को योजना बताई। वह बेहद खुश हुई और बच्चों के साथ ह्वील चेयर खरीदने भी गर्इं।
आज रजनी का जन्मदिन था। सभी साथियों ने ह्वील चेयर को फूलों से सजाया और उसी पर बर्थडे कार्ड भी लगा दिया। रजनी के पास नई बैसाखी तो आ गई थी। उसके क्लास में आने से पहले ही सभी अपनी सीट पर बैठ गए थे। रजनी जब अंदर आई तो क्लास में सब को चुपचाप बैठे देख थोड़ी हैरान हुई। वह धीरे -धीरे अपनी सीट की ओर बढ़ रही ती कि राजेश उस के सामने आ गया। क्लास टीचर भी आ चुकी थी। राजेश ने निखिल को भी बुलाया और क्लास टीचर की अनुमति ले कर रजनी को ह्वील चेयर पर बैठा दिया। रजनी कुछ समझ पाती, सभी ने ‘हैपी बर्थडे टू यू,लॉग लाइफ टू यू’ कह कर उसका अभिनंदन किया। रजनी कभी कुर्सी को देखती कभी क्लास के बच्चों को। उस ने उठने की कोशिश की तो निखिल ने उसका बस्ता ले कर ह्वील चेयर के पीछे टांग दिया। क्लास टीचर ने उसे सहारा दे सीने से लगा लिया और जन्मदिन का कार्ड थमा दिया। रजनी की आंख से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उसने धीरे-धीरे ह्वील चेयर के पहिए को चलाना शुरू किया। क्लास बच्चों की तालियों की आवाज से गूंजने लगी।१
जन्मदिन का तोहफा

 

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