आंगनबाड़ी में बदलाव

भारत में चल रही ‘एकीकृत बाल विकास योजना’ के तहत छह साल तक की उम्र के आठ करोड़ बच्चे आते हैं। इस हिसाब से यह दुनिया की सबसे बड़ी योजना है।

भारत में चल रही ‘एकीकृत बाल विकास योजना’ के तहत छह साल तक की उम्र के आठ करोड़ बच्चे आते हैं। इस हिसाब से यह दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। इसमें तीन साल तक के बच्चों की मांओं को और तीन से छह साल के बच्चों को आंगनबाड़ी में पौष्टिक खाना मिलता है। साथ ही बच्चों और मांओं का टीकाकरण और नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच, सफाई और स्वास्थ्य की जानकारी और स्कूल पूर्व की बुनियादी शिक्षा की दी जाती है।

मांओं और बच्चों के पोषण की यह योजना 1975 में शुरू हुई थी। 2010 के बाद से केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी इसके लिए धन देने लगी थीं। 2014 तक केंद्र और राज्य की राशन के खर्च में हिस्सेदारी आधी-आधी थी और नब्बे प्रतिशत प्रशासनिक खर्च केंद्र सकरार वहन करती थी। अब नई व्यवस्था के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का पारिश्रमिक और पूरा प्रशासनिक खर्च राज्य सरकार को देना होगा। इसके अलावा राशन के खर्च में भी उनकी भागीदारी बढ़ाई गई है।

पिछले वित्तीय वर्ष तक इस बाल विकास योजना का बजट 18,681 करोड़ रुपए था। इस वित्तीय वर्ष में इस योजना के बजट को घटाकर 8,335 करोड़ रुपए कर दिया गया है। फिलहाल केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस नई व्यवस्था को लेकर कोई भी साफ तस्वीर नहीं है। न ही राज्य सरकारों ने इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए खुद को तैयार किया है। इसका सीधा असर आंगनबाड़ियों पर पड़ना शुरू हो गया है। न आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को महीने का वेतन समय पर मिल रहा है। न बच्चों के खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में राशन ही आ पा रहा है। इस सब सरकारी अनियमितताओं का हर्जाना सीधे-सीधे कुपोषित बच्चों और मांओं को भरना पड़ेगा!

चालीस साल पुरानी योजना में अचानक से ऐसे बिना किसी व्यवस्थित कार्ययोजना के इतना बड़ा परिवर्तन आंगनबाड़ी के पूरे ढांचे को तहस-नहस कर सकता है। जिसे फिर से जमाने में कहीं ज्यादा समय, ऊर्जा, लागत लगेगी लेकिन फिर भी जिसकी भरपाई नहीं हो सकेगी। इतनी बड़ी और अहम योजना पर बेहद समझदारी और जिम्मेदारी से निर्णय लिए जाने की जरूरत थी। आखिर ‘मेक इन इंडिया’ के सपने में इन बच्चों और महिलाओं की भूमिका और भागीदारी तय करना किसकी जिम्मेदारी है? सवाल तो यह भी है कि दुनिया के सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चों और मांओं के साथ यह सपना कैसे सच हो सकता है? दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस देश के बच्चे पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भूख से मर रहे हों, उस देश की सरकार उन बच्चों से ऐसे पल्ला झाड़ ले जैसे कि वे कहीं हैं ही नहीं!

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