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सेहतः मोटापे का शिकार बचपन

फास्ट फूड की बढ़ती संस्कृति के कारण आज बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। बच्चे पौष्टिक आहार पसंद नहीं करते। मोटापा बढ़ने के पीछे कई कारण हैं।

Author October 14, 2018 7:08 AM
आज जिस तरह से जीवनशैली बदल रही है उसके साथ-साथ खानपान भी बदल रहा है। इस बदलाव से अच्छे परिणाम कम और नकारात्मक परिणाम ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।

आजकल जगह-जगह फास्ट फूड की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की दुकानें, रेहड़ी-ठेले पर बर्गर जैसे खाद्य खूब बिकते मिल जाते हैं। इन दुकानों पर स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएं अधिक दिखाई देते हैं। दरअसल, उन्हें भूख लगती है तो सीधे चाऊमीन, बर्गर, पिज्जा जैसी चीजें ही याद आती हैं। आज जिस तरह से जीवनशैली बदल रही है उसके साथ-साथ खानपान भी बदल रहा है। इस बदलाव से अच्छे परिणाम कम और नकारात्मक परिणाम ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। फास्ट फूड की बढ़ती संस्कृति के कारण आज बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। बच्चे पौष्टिक आहार पसंद नहीं करते। मोटापा बढ़ने के पीछे कई कारण हैं।

शारीरिक गतिविधियों की कमी

बढ़ती फ्लैट संस्कृति में बच्चे घरों में अधिक रहते हैं। बाहर खेलने-कूदने कम निकलते हैं। कम शारीरिक गतिविधि के कारण बच्चों मे मोटापा बढ़ता चला जाता है। इस तरह वे आलसी भी होते जाते हैं। अगर बच्चों को कुछ खेलना भी हो तो घर में ही खेलते हैं या उनका बहुत सारा समय गृहकार्य पूरा करने में ही निकल जाता है। इन वजहों से बच्चों का बहुत सारा समय घर पर ही निकल जाता है और शारीरिक गतिविधि न के बराबर होती है।

जंक फूड

आजकल अधिक कैलोरी युक्त पेय और खाद्य पदार्थ बच्चों को आसानी से मिल जाते हैं। स्नैक्स और फास्ट फूड रेस्तरां में बच्चों की पहुंच तेजी से बढ़ी है। इस तरह के जंक फूड खाने से बच्चों में मोटापा भी तेजी से बढ़ रहा है।

आनुवांशिक कारण

अगर परिवार में माता-पिता मोटे हैं या दोनों में से कोई एक मोटा है, तब बच्चे में भी मोटापा बढ़ने की आशंका रहती है। आनुवांशिक कारणों से भी बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है।

बच्चों की मनमानी

अक्सर मां-बाप बच्चों की मनमानी के आगे झुक जाते हैं। घरों में देखा गया है कि खानपान के मामले में बच्चों की ही सुनी जाती है। बच्चे जो कहते हैं मां को वही बनाना पड़ता है। कुछ सर्वेक्षणों में देखा गया है कि घरों में भोजन के फैसले बच्चों पर छोड़ दिए जाते हैं। इन आदतों की वजह से भी बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है।

तनाव

बदलती जीवन-शैली में जिस तरह से तनाव बढ़ रहा है, उससे भी बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। चिकित्सकों ने पाया है कि आत्मविश्वास की कमी से बच्चा अवसाद में चला जाता है। वह खुद को उबाऊ महसूस करने लगता है। अवसाद से पीड़ित बच्चा जरूरत से ज्यादा खाने लगता है और उसका मोटापा बढ़ने लगता है।

बीमारियां

मोटापा किसी भी हाल में शरीर के लिए सही नहीं होता। अधिक मोटे लोगों को काम करना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही कई बीमारियों से भी जूझना पड़ता है। मोटापे से होती हैं ये बीमारियां।

दिल का दौरा

मोटापा बढ़ने से हृदय शरीर के अन्य हिस्सों में ठीक से रक्त नहीं भेज पाता, जिससे दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

मधुमेह

ज्यादा खाने से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे बच्चों में कम उम्र में ही मधुमेह होने लगता है।

जोड़ों में दर्द

बदलते खानपान और जीवन-शैली के कारण बच्चों में बहुत-सी बीमारियां बढ़ रही हैं। जिनमें से एक मोटापे की वजह से जोड़ो में दर्द की समस्या है। शरीर में वजन बढ़ने से चलना मुश्किल होता है और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है।

कैंसर

गर्भाशय, स्तन, कमर और आंतों में कैंसर की प्रमुख वजह मोटापा है। यही वजह है कि बच्चों में आजकल कम उम्र में ही गंभीर बीमारियां देखने को मिल रही हैं।

सांस लेने में तकलीफ

मोटापे के कारण चलना मुश्किल होता है। साथ ही सांस लेने में भी मुश्किल होने लगती है। अक्सर आपने देखा होगा कि बच्चे थोड़े से काम से जल्दी थक जाते हैं और हांफने लगते हैं। उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होती है।

बचाव

खानपान में बदलाव

बच्चों के खानपान में बदलाव से मोटापा कम किया जा सकता है। मसलन, जंक फूड के बजाय उन्हें पौष्टिक खाना दें। इसके अलावा सुबह चाय के बजाय गरम दूध या गुनगुना पानी पीने को दें। इससे बच्चे का मेटाबॉलिक सिस्टम ठीक बना रहता है।

व्यायाम करें

बच्चों की शारीरिक गतिविधियां कम होने और व्यायाम न करने से मोटापा बढ़ता है। इसलिए माता-पिता को बच्चों को लेकर और अधिक सजग होना पड़ेगा। ताकि उनके स्कूली गृहकार्य के अलावा शारीरिक गतिविधि भी बढ़े और वे व्यायाम कर फिट भी रहें।

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