Businesses from new experiments in fashion also depend on the style of a few films and serials - फैशन पर फिल्मों का असर - Jansatta
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फैशन पर फिल्मों का असर

फैशन में हर समय नए प्रयोग होते रहते हैं, पर इसका कारोबार काफी कुछ फिल्मों और धारावाहिकों के पहनावों पर भी निर्भर करता है। कोई फिल्म लोकप्रिय होती है तो उसमें अभिनेता और अभिनेत्री का पहनावा भी लोकप्रिय हो जाता है। जिन फिल्मों और धारावाहिकों में परिधान पर खास जोर दिया जाता है और उसके लिए नामी फैशन डिजाइनरों की मदद ली जाती है, उनके पहनावे एक तरह से युवाओं के मिजाज को भी ध्यान में रख कर तैयार किए जाते हैं। क्योंकि जब वे चलन में आते हैं तो फैशन का कारोबार भी बढ़ता है। फिल्मों की मार्फत चलन में आए नए पहनावे और आभूषणों के बारे में बात कर रही हैं अनुजा भट्ट।

Author February 18, 2018 4:53 AM
‘राजा हरीशचंद्र’ फिल्म का हार, जिसमें रूबी, मूंगा और हीरे का प्रयोग किया गया था- फैशन में आ गया था।

मौसम चाहे क्रिसमस का हो, दीपावली, होली का हो या शादी का। फैशन में जो चलन बनता है वह उस समय की चर्चित फिल्म या धारावाहिक पर टिका होता है। इस समय राजस्थानी पहनावा चलन में है। दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पद्मावत’ के झूमर नृत्य ने ही नहीं, उसमें पहने उनके आभूषणों ने भी ध्यान खींचा है। ‘बाहुबली’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘क्वीन’ तक के आभूषण छा गए हैं। यह पहली बार नहीं हो रहा है। यह सिलसिला श्वेत-श्याम फिल्मों के दौर के साथ ही शुरू हो गया था। ‘राजा हरीशचंद्र’ फिल्म का हार, जिसमें रूबी, मूंगा और हीरे का प्रयोग किया गया था- फैशन में आ गया था। इसी तरह ‘हंटरवाली’ का हार, जिसके बीचोंबीच फूल और पत्तियों की नक्काशी थी, चलन में आ गया था। विमल राय कि फिल्म ‘देवदास’ के झुमके बाजार में छा गए थे, तो संजय लीला भंसाली की ‘देवदास’ में लाल रूबी से बना हार प्रेम का प्रतीक ही बन गया।

फिलहाल तो चर्चा फिल्म ‘पद्मावत’ की है। तनिष्क ने इस फिल्म के आभूषण बनाए। कहा जा रहा है कि इसे बनाने में दो सौ कारीगरों की मेहनत लगी। चोकर, नथ, झुमका, शीश फूल, हाथ फूल, आड़, अंगूठी, बोरला सबकी निगाहों में छा गए। कभी सोने-चांदी, हीरे जवाहरात को अपनी शान और ताकत के रूप में दर्शाने वाले राजा-महाराजाओं के परिवारों में शादी-ब्याह तथा अन्य रस्मों में आभूषण को सबसे शानदार तोहफा माना जाता था। गंगा-जमुनी तहजीब वाले हमारे देश में आभूषण सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि रीति-रिवाज भावनाओं और आन-बान-शान का प्रतिबिंब हैं। इसलिए यहां आभूषण सबसे ज्यादा खरीदे जाते हैं। एक आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल आठ सौ टन सोने की खपत होती है, जिसमें से छह सौ टन सोने का इस्तेमाल आभूषण बनाने में होता है। दुनिया के कई हिस्सों में 15 फरवरी को ज्वैलरी डे मनाया जाता है, हालांकि इसके पीछे कौन-सी विशेष मान्यताएं हैं, इसका स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है। समय बदलने के साथ आभूषणों की पसंद और उनसे जुड़े तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी के साथ आभूषण निर्माता ऐसे जेवरात बनाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जो कामकाजी महिलाओं और युवतियों की पसंद की कसौटी पर खरे उतर सकें। आभूषण निर्माता कंपनियां पहनने के लिहाज से सुविधाजनक और कम कीमती, मगर ज्यादा आकर्षक आभूषण बनाने पर ध्यान दे रही हैं। गीतांजलि जेम्स तनिष्क और डी दमाज जैसी प्रमुख आभूषण निर्माता कंपनियां नए जमाने की महिलाओं की जरूरतों के हिसाब से आभूषण की नई-नई शृंखलाएं बाजार में उतार रही हैं।

जो आज फैशन में है

चोकर्स आजकल बेहद चलन में हैं, जो लहंगा-चोली हो या पारंपरिक साड़ी, हर तरह के कपड़ों पर जंचते हैं। सफेद हीरों से जड़ा सुंदर चोकर या रूबी या नीलम जड़ा दो-तीन लड़ी वाला चोकर आपके लाइटवेट-लंहगे के साथ पहनना सही रहेगा। आप चाहें तो अनकट पोल्की और मोती वाली चांदबाली पहन सकती हैं, ये हर किसी पर अच्छे लगते हैं और पारंपरिक कपड़ों, चाहे पलाजो सूट हो या अनारकली सूट, इनके साथ पहनने से आपकी खूबसूरत निखरेगी। सफेद हीरे जड़े वाइट गोल्ड या प्लेटिनम के टेनिस ब्रेसलेट वेस्टर्न गाउन के साथ पहनने पर आपको बेहद आकर्षक लुक देंगे। पीले सोने या वाइट गोल्ड में रंग-बिरंगे रत्न जड़े कंगन या ब्रेसलेट शादी के मौके पर पारंपरिक कपड़ों के साथ पहनने पर बेहद अच्छे लगेंगे। सोने के महीन तार के काम वाले ब्रेसलेट या कंगन भी इस अवसर पर पहने जा सकते हैं। टेंपल ज्वैलरी में देवी-देवताओं की खूबसूरत आकृतियां बनी होती हैं। इस तरह के आभूषण जैसे माथा पट्टी, कमर बंद और कानफूल बेहद लोकप्रिय हैं और भारत के हर हिस्से में दुल्हनों द्वारा पसंद किए जाते हैं। पारंपरिक सिल्क साड़ी के साथ पीले सोने से बनी टेंपल ज्वैलरी पहनें। यह आपको शाही लुक देगा। हीरे के साथ मोती लगे आभूषण दुल्हन को एक अलग ही आकर्षक, खूबसूरत लुक देते हैं। मोती का जूलरी सेट चुनें या फिर हीरे, सोने के आभूषण के साथ या अन्य रत्नों के साथ मोती के काम वाले आभूषण पहनें। किसी भी तरह के ब्राइडल वियर के साथ हीरे के आभूषण अच्छे लगते हैं। हीरे के चोकर इस अवसर के लिए उपयुक्त हैं और आभूषण में ट्रेंडी लुक लाने के लिए आप चाहें तो रंगीन पत्थर जड़े आभूषण भी पहन सकती हैं।

पुरुषों को भी भाए आभूषण

बालियों की जगह लंबे-लंबे झुमके, गले में हार की जगह चेन, हाथों में कंगन की जगह ब्रेसलेट और फिर अंगुलियों में अंगूठियां, वह भी जरा मोटी-मोटी। यह है आज के आभूषणों का बदला स्वरूप। और आभूषणों के साथ बदले हैं इनके पहनने वाले भी। ये आभूषण महिलाओं की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाले नहीं हैं, बल्कि यह नया शौक है पुरुषों का, जो कि नए चलन के तौर पर उभर कर सामने आ रहा है। इस चलन को बढ़ावा देने में फिल्में और टेलीविजन धारावाहिक भी खासी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें अभिनेता जो पहनता है, उसकी नकल करने में लड़कों को बहुत मजा आता है। यही वजह है कि पिछले करीब पांच सालों में पुरुषों के आभूषण के क्षेत्र में पचास से सत्तर प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फैशन के इस नए चलन में सबसे ज्यादा प्रचलित हुए हैं गले की स्नेक चेन, हाथों में ब्रेसलेट, कानों की छोटी बालियां या स्टड और अंगुलियों में मोटी-मोटी अंगूठियां। आभूषण निर्माता और जेमोलॉजिस्ट रुबीना मेहरा का कहना है कि ‘पिछले पांच सालों में मांग बढ़ने से पुरुषों के आभूषण के निर्माताओं के कारोबार में पचास से सत्तर प्रतिशत बढ़ा है।’पुरुषों के आभूषणों के इस नए चलन में टाई पिन और कफ लिंक आज भी अपनी खास जगह बरकरार हैं और उनका भी कारोबार बढ़ रहा है। लेकिन उनके ग्राहक थोड़ी अधिक उम्र के हैं, जबकि आभूषण पहनने वाले जरा कम उम्र के हैं। ज्यादातर युवा। कहने का अर्थ यह है भारत में आभूषण में विविधता की वजह इसकी संस्कृति में व्याप्त विविधता है। फिल्मों के धारावाहिक हमें जहां हमारी सांस्कृतिक धरोहर के बारे में बताते हैं, वहीं हमें अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

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