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नन्ही दुनियाः प्रतियोगिता

मटिया, यह भी कोई नाम हुआ ? मगर हां, पूरे गांव के लोग उसे इसी नाम से पुकारते हैं।

Author April 2, 2017 2:24 AM
मटिया, यह भी कोई नाम हुआ ? मगर हां, पूरे गांव के लोग उसे इसी नाम से पुकारते हैं।

प्रेरणा मालवीया

मटिया, यह भी कोई नाम हुआ ? मगर हां, पूरे गांव के लोग उसे इसी नाम से पुकारते हैं। और कारण भी इसका बहुत साफ है क्योंकि उसका रंग एकदम मिट्टी की तरह है। शायद यही वजह रही हो उसके इस नाम की। स्कूल में भी उसका यही नाम है । इस कारण बच्चे अक्सर उसके नाम की मजाक भी उड़ाते हैं। मगर मटिया इन बातों का जरा भी बुरा नहीं मानता क्योंकि उसका पूरा विश्वास है कि व्यक्ति की पहचान उसके गुणों से होती है उसके बाहरी रूप-रंग से नहीं। और भगवान कृष्ण भी तो काले ही थे। मटिया अपने स्कूल का बहुत होनहार छात्र है। हर वर्ष वह अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करता । गांव के सरपंच का बेटा जगमोहन भी मटिया के साथ पढ़ता है । हर बार उसका यह प्रयास रहता कि कक्षा में वही प्रथम आए, इसके लिए वह भरसक मेहनत भी करता। और मटिया को परेशान करने के लिए कई तरह के प्रपंच भी करता।
जैसे कक्षा में उसकी कॉपी चुरा लेना या परीक्षा वाले दिन मटिया की साइकिल पंचर कर देना। एक बार तो उसने मटिया पर खुजली वाली दवाई भी फेंक दी। बेचारे मटिया ने पूरा पेपर खुजाते-खुजाते दिया। मगर फिर भी मटिया ने ही कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उसे पता था कि यह सब सरपंच के बेटे जगमोहन की ही करतूत है मगर उनके खिलाफ तो मुंह खोलना भी पाप है। इस डर से मटिया चुप रह जाता। यहां तक की अपने घर वालों को भी जगमोहन की इन हरकतों के बारे में कुछ नहीं बताता।
आज गांव में सुबह से ही काफी चहल-पहल दिखाई दे रही है। कई सारी गाड़ियां और उसके पास सूट-बूट पहने लोग दिखाई दे रहे है। बात करने से पता चला कि शहर से कोई टीम आई है, पानी बचाओ पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित करवाने। आज नामांकन करवाने आई है। आज से ठीक एक सप्ताह बाद यह प्रतियोगिता है। इसमें भाग लेने के लिए बहुत सारे बच्चों ने अपना नाम लिखवाया। उन बच्चों में जगमोहन और मटिया ने भी अपना नाम लिखवाया।
जगमोहन इस बार कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता था प्रथम आने के लिए। इसके लिए वह पहले से ही खूब तैयारी करने लगा था। इस विषय से संबंधित जानकारी जुटाई । वाचनालय में बैठकर किताबों के पन्ने पलटने शुरू कर दिए और रात-रात भर जाग कर लिखने का अभ्यास करने लगा। प्रतियोगिता वाले दिन सभी बच्चे नियत समय पर प्रतियोगिता स्थल पहुंचे, मगर जगमोहन ने देखा की मटिया कहीं दिखाई नहीं दे रहा है । उसे लगा विषय की पढ़ाई अलग है मगर किसी विषय पर अपने स्वतंत्र विचार लिखना कोई बच्चों का काम नहीं है, हो सकता है वह डर गया हो। जगमोहन को यह यकीन हो गया कि अब तो बाजी उसी के हाथ में है। मगर काफी देर बाद मटिया आ गया। लेकिन देरी से आने के कारण वह निबंध पूरा नहीं लिख पाया। और इस बात से वह काफी दुखी हो गया।
प्रतियोगिता समाप्ति के दो घंटे बाद परिणाम की घोषणा हो गई। और इस प्रतियोगिता में जगमोहन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था, मटिया दूसरे नंबर पर था। मटिया उदास मन से अपने घर वापस लौटा।
प्रतियोगिता खत्म होने के बाद शाम को जब टीम वापस शहर रवाना हुई तो रास्ते में एक जगह काफी कीचड़ होने से गाड़ी धंस गई। लोगों से बातचीत के दौरान यह पता चलता है कि बड़ी पाइप लाइन फूट गई और उसी का काम चल रहा है, इसी कारण इतना कीचड़ है। वह तो अच्छा हुआ कि एक मटिया नाम के लड़के ने समय रहते इसकी सूचना दे दी नहीं तो काफी सारा पानी फिजूल में बर्बाद हो जाता। यह बात सुनकर वहां खड़े सभी लोगों ने मटिया की समझदारी की भूरि-भूरि प्रसंशा की। उन्हीं में से किसी ने बताया कि यह तो वही बालक है, जिसको आज पानी बचाओ निबंध प्रतियोगिता में दूसरा स्थाना मिला है। और उसके देर से आने की वजह भी पता चल गई। फिर प्रतियोगिता में वास्तविक इनाम का हकदार तो मटिया है। और सच्ची शिक्षा भी वही है जो व्यवहार में उपयोग की जाए।
टीम ने गाड़ी वापस गांव की और मोड़ ली। गांव पहुंचकर मटिया और जगमोहन को बुलाने का आदेश भेजा गया। मटिया को फिर से प्रथम घोषित किया गया। साथ ही मटिया ने यह संदेश भी दिया की असल शिक्षा वही है जो हम वास्विक जीवन में अमल कर पाए। बाकी तो सब किताबी ज्ञान है। १

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