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शख्सियत: नूतन

चेहरे पर सादगी, अभिनय में सहजता और कैमरे के सामने हमेशा ईमानदार रहने वाली नूतन हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं।

Author June 3, 2018 6:44 AM
जन्म : 4 जून, 1936 निधन : 21 फरवरी, 1991

चेहरे पर सादगी, अभिनय में सहजता और कैमरे के सामने हमेशा ईमानदार रहने वाली नूतन हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। मराठी परिवार में जन्मी नूतन को बचपन से ही फिल्मी माहौल मिला। अपने समय की मशहूर अभिनेत्री शोभना समर्थ और निर्देशक कुमारसेन समर्थ की बड़ी बेटी थीं नूतन।

मां की हसरत

नूतन की मां शोभना समर्थ उन्हें अभिनेत्री ही बनाना चाहती थीं। पर नूतन अपने जन्म के समय इतनी पतली-दुबली थीं कि उनकी मां उन्हें ‘अगली बेबी’ और ‘अगली डक’ बुलाती थीं। मगर किसे पता था कि बचपन में कुरूप कही जाने वाली नूतन मिस इंडिया का खिताब लेकर सबको चौंका देंगीं। यही नहीं, उन्होंने अपने फिल्मी करिअर में छह फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते और 1974 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से भी नवाजा।

फिल्मी करिअर

यों तो नूतन को बचपन से ही फिल्मी माहौल मिला था। ऐसे में यह तय था कि उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका जल्द ही मिल जाएगा। नूतन ने महज नौ साल की उम्र में ‘नल दमयंती’ फिल्म में बतौर बाल कलाकार काम किया। इस फिल्म के बाद नूतन की काम की कई निर्देशकों ने सराहना की। मात्र चौदह की उम्र में ‘हमारी बेटी’ में उन्हें बतौर हिरोइन उतारा गया। यह समय था साल 1950 का। लेकिन यह फिल्म चल न सकी। उनकी अगली फिल्म 1955 में ‘सीमा’ आई। इसने उन्हें कामयाबी दिलाई। इस फिल्म में उन्होंने बलराज साहनी के साथ काम किया। फिल्म में नूतन ने अपराधी की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के लिए उन्हें पहली बार श्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद ‘पेइंग गेस्ट’ और ‘दिल्ली का ठग’ जैसी फिल्में आर्इं। इन फिल्मों में भी उन्होंने कमाल का काम किया।

संगीत का शौक

नूतन बचपन में ही संगीत की शिक्षा ली थी। उनका संगीत सीखना फिल्मों में बहुत काम आया। नूतन ने फिल्म हमारी बेटी में ‘तुझे कैसा दूल्हा भाय री बांकी दुल्हनिया’ गीत गाया था। इसके बाद 1960 में आई फिल्म छबीली में उन्होंने छह गाने गाए।

भावाभिनय

नूतन के अभिनय में एक खास बात थी- उनके चेहरे के भाव। फिल्म ‘सुजाता’ में उन्होंने अछूत लड़की की भूमिका निभाई थी। इसमें उनके संवाद कम थे, लेकिन उन्होंने चेहरे के भाव और आंखों से ही अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने कई फिल्मों में चुलबुली लड़की का किरदार भी निभाया। तो ‘बंदिनी’ में एक ऐसी औरत की भूमिका निभाई जो ईर्ष्या में अंधी हो जाती है और अपने प्यार की पत्नी की हत्या कर देती है। उन्होंने कन्हैया, तेरे घर के सामने, बारिश, मंजिल, सौदागर जैसी फिल्मों में भी बेहतरीन काम किया।

कठिन वक्त

नूतन की जिंदगी में एक समय ऐसा आया जब उन्होंने अपनी मां पर अपनी कमाई के पैसों का हेर-फेर करने का आरोप लगाया। इस मामले में उन्होंने मुकदमा भी लड़ा। मां-बेटी के बीच खाई बन गई। लेकिन जब शोभना बीमार पड़ी तो मां-बेटी के बीच रिश्ता फिर ठीक हो गया।

– नूतन एक अच्छी अभिनेत्री तो थी हीं, एक अच्छी पत्नी और बहू भी बनीं। उन्होंने नेवी अफसर रजनीश बहल से शादी की। शादी के बाद परिवार को संभालने के लिए उन्होंने फिल्मों से संन्यास ले लिया। लेकिन फिर उन्होंने ‘बंदिनी’ के साथ वापसी की। वे घर और अपने फिल्मी करिअर के बीच संतुलन बनाना जानती थीं।

निधन

1989 में उन्हें कैंसर हो गया। तमाम इलाज के बावजूद वे ठीक नहीं हुर्इं और 21 फरवरी 1991 को उनका निधन हो गया।

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