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शख्सियतः भूपेन हजारिका

भूपेन हजारिका को देश उनके गीत और संगीत से याद रखता है। असम के तिनसुकिया जिले के सदिया कस्बे में उनका जन्म हुआ।

Author September 9, 2018 5:11 AM
जन्म : 8 सितंबर, 1926 / निधन : 5 नवंबर, 2011

भूपेन हजारिका को देश उनके गीत और संगीत से याद रखता है। असम के तिनसुकिया जिले के सदिया कस्बे में उनका जन्म हुआ। वे प्रतिभावान गीतकार, संगीतकार और गायक थे। उनके संगीत में असमिया, बांग्ला और हिंदी की मिठास थी।

व्यक्तिगत जीवन

भूपेन हजारिका दस भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। संगीत में उनकी रुचि अपनी मां की वजह से हुई। उन्हें पारंपरिक असमिया संगीत घुट्टी के रूप में मिला था। उनके अंदर बचपन से ही रचनात्मकता कुलबुलाने लगी थी। बचपन में ही उन्होंने अपना पहला गीत लिखा और दस वर्ष की उम्र में उसे गाया। महज बारह साल की उम्र में असमिया फिल्म इंद्रमालती के लिए काम किया और अपनी आवाज का दम दिखाया।

प्रारंभिक शिक्षा

हजारिका ने तेरह साल की उम्र में तेजपुर से मैट्रिक किया। 1942 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। पढ़ाई-लिखाई में भूपेन अच्छे थे। उन्होंने 1946 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। फिर वे सरकारी स्कॉलरशिप पर अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल करने चले गए।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी

भूपेन हजारिका की पढ़ाई पूरी हो गई तो उन्हें गुवाहाटी में ऑल इंडिया रेडियो में गाने का मौका मिला। उन्हें कई भाषाएं आती थीं। यही कारण था कि उन्होंने बंगाली गानों को हिंदी में अनूदित कर उन्हें अपनी आवाज दी। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने न केवल गीत गाए, बल्कि मंच पर प्रस्तुतियां भी दीं। जब वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी गए तो वहां उनकी मुलाकात प्रियंवदा पटेल से हुई। दोनों में प्यार हुआ और अमेरिका में ही दोनों ने शादी कर ली। ’एमए की पढ़ाई करने तक उनके जेहन में संगीतकार बनना नहीं था। उनका मन पत्रकार बनने का था। कभी उनके मन में आता कि वे वकील बन जाएं। जब वे बनारस में थे तब उनकी मुलाकात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां से हुई। यही वह समय था जब भूपेन का झुकाव संगीत की ओर बढ़ा। इसके बाद वे पीएचडी के लिए अमेरिका चले गए।

अमेरिका से भूपेन अपने बेटे और पत्नी प्रियंवदा के साथ भारत वापस लौट आए। यहां आकर उन्होंने गुवाहटी यूनिवर्सिटी में शिक्षक की नौकरी की। पर लंबे समय तक वे यह नौकरी नहीं कर सके। कोई नौकरी न होने की वजह से भूपेन को पैसों की तंगी से गुजरना पड़ा। पत्नी से भी उनकी दूरी बन गई। इसके बाद हजारिका ने संगीत को ही अपना साथी बना लिया।

फिल्मों में संगीत

सन 1993 में फिल्म आई ‘रुदाली’। इस फिल्म को संगीत दिया भूपेन हजारिका ने। फिल्म में ‘दिल हूम हूम करे’ गीत उन्होंने ही गाया। इसके अलावा ‘ओ गंगा बहती हो क्यों’ भूपेन हजारिका ने कई भाषाओं में गाया था। असमिया में उन्होंने ‘एरा बातार सुर’, ‘लोतिघोती’, ‘मोन प्रजापति’ और ‘सिराज’ जैसी फिल्मों में गीत-संगीत दिया। अरुणाचल प्रदेश से आई हिंदी फिल्म ‘मेरा धरम, मेरी मां’। इस फिल्म का निर्माण, निर्देशन और गीत-संगीत भूपेन हजारिका ने ही तैयार किया। भूपेन ने ‘एक पल’, ‘रुदाली’, ‘साज’, ‘दरम्यां’, ‘गजगामिनी’, ‘दमन’, ‘पपीहा’ आदि फिल्मों में संगीत दिया।

सम्मान

भूपेन हजारिका को पद्म विभूषण से लेकर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और नेशनल अवॉर्ड तक अनेक सम्मान मिले। उन्हें 2009 में असम रत्न और उसी साल संगीत नाटक अकादेमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

निधन

लंबी बीमारी के बाद 2011 में उनका निधन हो गया।

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