सजावट में बांस की बुनावट

घर की सजावट के लिए लोग तरह-तरह की चीजें आजमाते रहते हैं। खासकर बैठक की सजावट के लिए लकड़ी और बेंत से बनी वस्तुएं आमतौर पर इस्तेमाल होती हैं। पर बदलते समय के मुताबिक अब लोग घरों में महंगी सजावटी वस्तुओं के बजाय साधारण दिखने वाली वस्तुओं को सजावट और रोजमर्रा इस्तेमाल के लिए उपयोग करना पसंद करते हैं। इसलिए दफ्तरों और रेस्तरां के अलावा अब घरों में भी बांस से बने सोफे, कुर्सियां, सजावटी चीजें रखना नया चलन बन चुका है। बांस से बनी वस्तुओं के उपयोग के बारे में चर्चा कर रही हैं अनीता सहरावत।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

घर की साज-सज्जा आपकी पंसद-नापसंद के बारे में ही नहीं, आपके रहन-सहन, सामाजिक स्तर और रुतबे का भी आईना होती है। अब लोग शाही अंदाज की सजावट के बजाय सहज और साधारण सुंदरता को प्राथमिकता देने लगे हैं। घर की सजावट और रख-रखाव में चकाचौंध भरे सामान और भारी-भरकम कला के नमूने और चीजें रखने का चलन अब नहीं रहा। वजह, कि एक तो ये महंगे होते हैं और दूसरा, ज्यादा लंबे समय तक एक जैसी साज-सज्जा उबाऊ भी हो जाती है। साथ ही इन्हें संभालना काफी मशक्कत का काम है। ऐसे में आजकल घर के आंतरिक और बाहरी रूप में बदलाव जल्दी होने लगे हैं। पर अब लोग किफायती सामान ढूंढ़ते हैं, जिसे बदलना आसान हो और जो जेब भी ज्यादा हल्की न करें। साथ ही जिसे एक जगह से दूसरी जगह खिसकाना, हटाना भी आसान हो। ऐसे में बांस लोगों की ही नहीं, आज बाजार की भी नई पंसद है।

बांस धरती पर उगने वाली सबसे सस्ती और पुरानी घास है। गरीब-निवाज कही जाने वाली यह घास अब तेजी से बाजार में अपना मुकाम तलाश रही है। रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें हों, घर की सजावट का सामान या फिर फर्नीचर, हर तरह से बांस के उत्पाद लकड़ी के मुकाबले सस्ता, बेहतर और टिकाऊ विकल्प हैं। ए समाज के हर तबके को लुभा रहे हैं। साजो-सामान पर नजर डालें तो जग, टोकरी, कटोरे, फूलदान, लैंपशेड, चटाइयां, चटाई-पर्दे, बेड, सोफा-सेट, मोमबती-स्टैंड, दीवार-लटकनें, कलमदान, बच्चों के खिलौने वगैरह सभी कुछ तो ए खोखली घास खुद में समेटे है।

बांस के अलग अंदाज
घर, ऑफिस, रेस्तंरा, होटल हर जगह आजकल लकड़ी के फर्श का खूब चलन है। इसकी खासियत इसका साधारण दिखना है। घर को यह एक शाही अंदाज देता है, वहीं दफ्तर को उत्कृष्ट बनाता है। होटल, रेस्तंरा की भीतरी-बाहरी सजावट और लाइटिंग के साथ बड़ी आसानी से वुडन फलोरिंग संतुलित हो जाती है। लकड़ी के मुकाबले बांस की लकड़-फलोरिंग न केवल सस्ती, बल्कि दिखावट के नजरिए से बेहतरीन भी है। इसके रखरखाव में ज्यादा झंझट भी नहीं है। एक से बढ़ कर एक उम्दा डिजाइन, बेहतरीन चमकदार फिनिशिंग, वजन में हल्का होना और सबसे खास बात इसका दूसरी लकड़ियों के मुकाबले सस्ता और टिकाऊ होना आपको लुभाने के लिए काफी है। आपको नजदीकी बाजार में बांस-फलोरिंग के हुनरबाज और डीलर आसानी से मिल जाएंगे। ऑनलाइन कंपनियों के पास भी बांस की वुडन फलोरिंग के ढेरों विकल्प मौजूद हैं। बांस फलोरिंग की शुरुआती दर सौ-दो सौ रुपए वर्ग फुट के हिसाब से बाजार में उपलब्ध है। बाकी कीमत आपकी जेब और बांस की गुणवत्ता तय करेगी।

बांस के फर्नीचर
लकड़ी के फर्नीचर की भीड़ में बांस धीरे-धीरे सरक कर काफी आगे आ चुका है। हाल के कुछ सालों में पर्यावरण बचाने और सहेजने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा है, जैविक चीजों को अपनाने और फिर इस्तेमाल की सोच लोगों में घर कर रही है। सामाजिक सरोकार के मुद्दों और समस्याओं को बाजार सबसे पहले भुनाता है। इंटरनेट की ऑनलाइन तकनीक ने इसे और आसान कर दिया है। लेकिन मजे की बात यह है कि बांस के फर्नीचर के मामले में बाजार के नफे के साथ ग्राहक नुकसान में कतई नहीं है। बांस से बने बेड, सोफासेट, डाइनिंग-टेबल, आरामदेह कुर्सियां, अलमारियां, खिड़की, दरवाजे घर के हर कोने में जगह बना रहे हैं। अगर आप अपने घर में बदलाव की योजना बना रहे हैं, तो बांस का यह कायापलट अंदाज आपको खूब रास आएगा।

कृत्रिम ढांचों का नया चलन
लकड़ी के घरों में रहने का चलन नया नहीं है। दूर-दराज के इलाकों और गांवों में यह आज भी आम बात है। लेकिन गांवों की यह जरूरत, शहरों का शौक है और चलन और रूतबे में गिनी जाती है। आजकल यह विचार भी खूब बिक रहा है। लोग घरों में कृत्रिम घरौंदे के कोने सजाने लगे हैं। लिविंग, डाइनिंग, ड्राइंग रूम के आकार के मुताबिक कंपनियां बांस के बने ढांचों का मेकओवर कर रही हैं। हां, यह शौक सस्ता बिल्कुल नहीं है। इसके अलावा शॉपिंग मॉल्स में, रेस्तरां और दुकानों में भी इस वुडन लुक का खूब इस्तेमाल हो रहा है। बंबू वाल आर्ट भी आजकल नया चलन है। होटल, रेस्तरां के कारोबार में अनूठापन और नयापन बनाए रखने के लिहाज से खूबसूरती में बदलाव जल्दी करना जरूरी हैं। रेस्तरां मालिकों के लिए तो ये प्राकृतिक ढांचे और फायदे का सौदा हैं, क्योंकि इसमें इंटीरियर पर निवेश का बार-बार खर्चा नहीं है, और लोगों को भी यह अंदाज लुभा रहा है। साथ ही इसे बदलना काफी आसान है।

खूबसूरती और बांस
खूबसूरती और सज्जा का जिक्र लैंपशेड, फूलदान, पर्दों, रोशनी के साजो-सामान के बिना पूरा कैसे हो सकता है। बाजार में एक से बढ़ कर एक रंग, डिजाइन में ये सामान उपलब्ध हैं। आप आनलॉइन खरीदारी भी कर सकते हैं। आपके शौक और पंसद के मुताबिक ही सामान की कीमत होगी। सस्ते से लेकर हजारों की लागत तक के बांस उत्पाद बाजार में मौजूद हैं। लकड़ी के ये कला नमूने आपके घर की रौनक को एक अलग ही अंदाज में बयां करते हैं। सजावट ही नहीं, उपहार देने के नजरिए से भी बांस कला के नमूने और दूसरी चीजें एक उम्दा विकल्प हैं। पर बांस की खूबसूरती यहीं नहीं सिमटती। जिन लोगों के पास जगह की किल्लत नहीं है, वे बांस के पौधों की सजावट को तवज्जो देते हैं। इसके अलावा बांस की काफी नस्लें बाजार में उपल्बध हैं, जिनसे आप अपनी बालकनी को भी सजा सकते हैं।

बांस के परदे
दरवाजों की रौनक परदों से है, परदे साधारण-सी सज्जा को भी बेहद आकर्षक बना देते हैं। लेकिन कपड़ों के परदों का आर्कषण अब कम हो रहा है। बांस-कला का इसमें में भी जम कर इस्तेमाल हो रहा है। बांस से बुने चटाई-परदे विभिन्न रंगों और डिजाइन में बाजारों मे छाए हुए हैं। हालांकि पहले इनका इस्तेमाल व्यावसायिक जगहों पर ही होता था, पर आजकल घर, होटल, रेस्तरां में भी ये चटाइयां पहली पसंद बनी हुई हैं। डिजाइन और कीमत दोनों ही विकल्पों की बाजार में अनगिनत रेंज मौजूद है।

बांस से बच्चों की दोस्ती
इतना ही बच्चों के खिलौने और स्टेशनरी सामान, ब्लॉक पहेलियां, कैलकुलेटर, कंप्यूटर माउस, की-बोर्ड, ब्लैक-बोर्ड आदि सामान में भी बांस के चमकदार और आकर्षक सामान प्लास्टिक उत्पादों को चुनौती दे रहे हैं। हालांकि प्लास्टिक की चीजों के मुकाबले ये महंगे जरूर हैं, लेकिन बच्चों और वातावरण के स्वास्थ के लिहाज से ये सौदा मंहगा नहीं है। इको-फेंडली सामान के चाहने वाले इन्हें हाथोंहाथ ले रहे हैं। फुटकर बाजार में ये अभी इतने लोकप्रिय नहीं हैं, तो इन्हें खरीदने के लिए आपको ऑनलाइन बाजार क्लिक करना ही पड़ेगा। साधारण-सा बांस, इसके इतने खूबसूरत अंदाज और बेहतरीन विकल्प आपको लुभाने के लिए तैयार हैं। इसलिए दोस्तों अब अगली बार जब आप खरीदारी करने बाजार जाएं या ऑनलाइन क्लिक करें तो अपने घर, दफ्तर के कोने को दुनिया के इस हरे सोने से एक बार सजाना तो जरूर बनता है।

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