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जनसत्ता रविवारी में फिरोज बख़्त अहमद का लेख : निरे मुक्केबाज नहीं थे अली

जिस अमेरिकी सरकार ने आगे चलकर अली को आंखों का तारा बनाया, उसी ने सत्तर के दशक में अली को ‘वियतनाम की लड़ाई से भागने’ के जुर्म में उन्हें तीन साल तक जेल में बंद रखा था। पिछले तीन जून को उनका निधन हो गया। उनकी खेल-यात्रा के बारे में बता रहे हैं-फिरोज बख़्त अहमद।

Author नई दिल्ली | June 12, 2016 3:17 AM
महान बॉक्सर मोहम्मद अली की अंतिम यात्रा लुइवे में गुरुवार को निकाली गई। (Photo: AP)

खेलों की दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी मुहम्मद अली क्ले के इस नश्वर संसार से चले जाने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि एक भारी-भरकम हस्ती हमारे बीच से उठ गई है। अली की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि जानकार कहते हैं कि अगर वे कुछ सालों और जिंदा रहते तो अमेरिका के राष्ट्रपति भी हो सकते थे। उसका कारण यह था कि वह अपने दिनों में विश्व का सबसे लोकप्रिय खिलाड़ी ही नहीं बल्कि ऐसा व्यक्ति था जिसने रंग-भेद को मिटाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी थी।

अपनी श्रद्धांजलि में, ट्विटर के द्वारा भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मुहम्मद अली के चले जाने से एक बड़े युग की समाप्ति हुई। वह हिम्मत, पौरुष और मनुष्यता का प्रतीक था। वास्तव में जिस समय मुहम्मद अली क्ले कई मोर्चों पर लड़ रहा था तब सोशल मीडिया नाम की कोई भी चीज नहीं थी। उस समय मात्र अखबार और रेडियो के माध्यम से लोगों को खबरें मिला करती थीं और टीवी बहुत कम लोगों के पास हुआ करता था। अली की अप्रत्याशित लोकप्रियता का कारण था कि एक मोर्चे पर तो वह गोरे लोगों के विरुद्ध इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा था तो दूसरे मोर्चे पर वह बॉक्सिंग के पाले में था। तीसरे मोर्चे पर वह अमेरिकी कट्टरपंथियों से लड़ रहा था जिन्होंने उसके इस्लाम कुबूल करने पर उसका जीना हराम कर रखा था।

वास्तव में मुहम्मद अली का पूरा जीवन एक संघर्ष की दास्तान है। यह संघर्ष उसके बचपन से ही प्रारंभ हो गया था। एक बार की बात है कि अली लुई विला की मार्केट में एक कपड़े की दुकान में था तो प्यास लगी और उसने पानी मांगा। दुकानदार गोरा था और उसने काले अली को पानी देने से इनकार कर दिया। हालांकि उसकी मां ओडैसा क्ले ने इस बात पर कोई विरोध नहीं किया मगर इस घटना की बड़ी गहरी चोट अली को लगी। इसी प्रकार 1954 में उसके बचपन की एक और घटना है जब वह बारह साल का था और एक जिम के निकट अपनी साइकिल लगा कर गया तो उसे पता चला कि उसकी साइकिल चोरी हो गई। उसने जिम मास्टर जो मार्टिन से पूछा कि उसकी साइकिल चोरी हो गई है और वह उसको कैसे प्राप्त करे? इस पर जो मार्टिन जो स्वयं भी अश्वेत था, अमेरिकन था, बोला, ‘इसके लिए तुम्हेंअपने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई करनी होगी और शक्तिशाली बनना होगा। अगर तुम ठीक समझते हो तो कल से मेरे जिम में बाक्सिंग का अभ्यास शुरू कर दो।’

इस प्रकार से मुक्केबाजी क्रीड़ा के इतिहास का सबसे चमकदार और स्वर्णिम अध्याय शुरू हुआ। अली ने अगले दिन ही सवेरे चार बजे अभ्यास शुरू कर दिया। अब वह शौकिया मुक्केबाजी प्रतियोगिता में भाग लेना लगा। 1956 में उसके स्कूल के प्राचार्य एटवुड विल्सन ने भविष्यवाणी की कि कैशियस क्ले आगे जा कर हैवीवेट मुक्केबाजी का चैंपियन बनेगा। अली का सौभाग्य था कि उसे ऐंजलो डंडी जैसे प्रशिक्षक का साथ मिल गया था जिसके कारण, 1960, रोम ओलंपिक में उसे स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। उसने रोम में स्वर्ण पदक से पूर्व कई बड़े नामचीन मुक्केबाजों को मात दी जिनमें सोवियत रूस के गेनेडी शातको और पोलैंड के जिब्गन्यू पेत्रजयकोसकी आदि जैसे नाम थे।

यह स्वर्ण पदक अली के विचार में एक ऐसा वीजा था जिसके कारण उसे सभी जगह मान-सम्मान मिलने लगा। एक दिन जब वह एक रेस्तरां में चीज बर्गर और चॉकलेट मिल्क शेक के लिए अपने एक मित्र के साथ बैठा तो वेटर्स ने कहा कि वह उसका आर्डर नहीं ले सकती क्योंकि उसके होटल में कालों को खाने की इजाजत नहीं। इस पर अली ने अपना स्वर्ण पदक उसे दिखाया जो उसको बड़ा प्यारा था और जिसे वह गले में डाले फिरता था मगर उसकी एक भी न चली। इस घटना का भी अली के ऊपर गहरा प्रभाव पड़ा। उसने स्वर्ण पदक को तुरंत ओहायो नदी के पुल पर जा कर इसे नीचे फेंक दिया। उसका विचार था कि ऐसे पदक का क्या लाभ कि जिससे कोई सम्मान प्राप्ति न हो।

उधर क्ले अपने मैच जीतता रहा और उसने 29 अक्तूबर 1960 को एक और बड़े बाक्सर टनी उनसेकर को पराजित किया। ऐसे ही उसने ला वेगा, नेवादा में 30 जून 1960 गोर्जियस जार्ज को हराया। फिर इसके बाद लॉस एंजिल्स में उसने 15 नवंबर 1962 को आर्ची मूर को हराया। मुक्केबाजी के स्वर्णिम इतिहास को जारी रखने के लिए कैशियस क्ले ने ठाना कि अब विश्व हैवीवेट बाक्सिंग के लिए यत्न करेगा। इसके लिए उसे, उस समय के विश्व चैंपियन सोनी लिस्टन से टक्कर लेनी थी।

1965 की इस अहम लड़ाई से पहले अली की मुलाकात अलीजाह मुहम्मद से हो चुकी थी जो श्वेतों के विरुद्ध कालों को इंसाफ दिलाने के मुहिम में जुटे थे। कैशियस क्ले उनके बहुत मानता था। उन्होंने कैशियस को कहा कि वह अल्लाह का नाम लेकर सोनी लिस्टन से भिड़ जाए तो उसे सफलता मिलेगी। इस मुकाबले से पूर्व अली को किसी ने मौका नहीं दिया था और सभी खेल विशेषज्ञ कह रहे थे कि लिस्टन के मुकाबले अली का बचना मुश्किल है क्योंकि लिस्टन बहुत शक्तिशाली और विशालकाय बॉक्सर था। मुकाबला हुआ और सबकी उम्मीदों के खिलाफ अली ने सोनी लिस्टन को ऐसी धूल चटाई कि उसके बाद लिस्टन का बॉक्सिंग करिअ‍ॅर ही खत्म हो गया। इसके बाद कैशियस क्ले ने इस्लाम कुबूल किया और अपना नाम मुहम्मद अली रख लिया।

अली ज्या विशालकाय और ताकतवर नहीं था मगर उसको मुक्केबाजी की कला आती थी और वह उस कला का भरपूर लाभ उठाता था। आज भी अली की बाक्सिंग कला को, ‘डांस लाइक ए बटरफ्लाई, स्टिंग लाइक ए बी’ और ‘रोप-ए-डोप’ के नाम से याद किया जाता है। यही नहीं अली जिसने अपने लिए, ‘आई एम द ग्रेटेस्ट’ का स्वयंभू खिताब दे रखा था, लड़ाई के दौरान अपने प्रतिद्वंदियों को बोल-बोल कर और ताने देकर इतना उत्तेजित कर दिया करता था कि आधे मुकाबले में वे गुस्से में आकर अली पर धुआंधार वार करते थे जिनको वह या तो हवा में खारिज कर देता था या अपने दस्तानों पर झेलता था। फिर लड़ाई के अंतिम पड़ाव में वह अपनी भरपूर शक्ति को प्रयोग करते हुए अपने प्रतिद्वंदियों को धराशायी कर दिया करता था। आजकल तो बॉक्सिंग के मुकाबले मात्र तीन राउंड के ही होते हैं और प्रत्येक राउंड तीन मिनट का होता है। यही नहीं, आजकल तो बाक्सिंग मुकाबले में बचाव के पूर्ण साधन जैसे हेड गियर, आर्न गियर आदि प्रदान किए जाते हैं। उस समय तो यह मुकाबला 15 राउंड के हुआ करते थे।

अली मुक्केबाजी के इतिहास का वह पहला बॉक्सर था कि जिसने तीन बार विश्व हैवीवेट प्रतियोगिता जीती थी। अली का प्रथम विश्व बॉक्सिंग का ताज उस समय छीन लिया गया, जब उसने 1967 में अमेरिका की सरकार की उसे वियतनाम की लड़ाई पर जाने के हुक्म को मानने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि वह निहत्थे और मासूम वियतनामियों की जान नहीं लेना चाहता। मगर अमेरिकी सरकार ने दबाव बनाए रखा और उसे फौज की कई परीक्षाओं में बैठाया। जिनमें अली जान-बूझ कर फेल होता रहा जबकि उसका आईक्यू 100/100 था। क्षुब्ध अमेरिकी सरकार ने उसे तीन साल के लिए जेल में डाल दिया। यह उसके जीवन के सबसे अहम साल थे। अली ने हिम्मत नहीं हारी और 28 जून 1971 को मुकदमा जीत लिया।

अली के जीवन के तीन सबसे महत्त्वूपर्ण मुकाबलों में दो उस समय के सबसे खतरनाक मुक्केबाज जोफ रेजर के साथ हुए और एक जार्ज फोरमैन। आठ मार्च 1971 को फे्रजियर के साथ अली को प्वाइंटस के बिना पर हारा हुआ घोषित किया गया जो कि उसके जीवन की पहली हार थी। यह मुकाबला 15 राउंड तक गया और देखने वालों में कई को झटका लगा, क्योंकि लड़ाई बराबर की थी और यह नहीं पता था कि जीत किसकी होगी। भले ही अली को हारा हुआ घोषित कर दिया गया, कई खेल विशेषज्ञों का था कि अली जीता हुआ था। अली ने फ्रेजियर को पीट-पीट कर उसका चेहरा कई स्थानों से फाड़ दिया था और उसकी आंखें भी नहीं खुल पा रही थीं, जिसके कारण उसे अस्पताल में दाखिल होना पड़ा। बॉक्सिंग के इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण लड़ाई 30 अक्तबर 1974 में अफ्रीका के जेरे में हुई, जार्ज फोरमैन से हुई। एक बार फिर खेल विशेषज्ञों का विचार था कि अली कदापि फोरमैन का मुकाबला नहीं कर पाएगा। अली ने यह मुकाबला जीत लिया।

इस प्रकार अली ने इकसठ पेशेवर लड़ाइयों में 56 जीत लीं, जिनमें 37 नॉक आउट द्वारा थीं। अली को फोरमैन से लड़ाई के बाद संन्यास ले लेना चाहिए था मगर उसने ऐसा नहीं किया और जोफ रेजियरे से हिसाब चुकाने के लिए एक मुकाबला किया जिसमें उसको हरा दिया। इसके बाद अली को तीन मुकाबलों में कैन नार्टन, लियोन स्पिंग्स और लैरी होम्स ने शिकस्त दी। उसके बाद अली ने अपने मुक्केबाजी के दस्ताने खूंटी पर लटका दिए और वह भारत भी आया जहां उसने दो सप्ताह गरीब लोगों के लिए कोष एकत्र किया। 2005 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इंसानियत के लिए गए कार्यों के लिए अली को विशेष राष्ट्रपति पदक दिया। इससे पहले, 1999 में अली को ‘स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटिव’ और ‘बीबीसी’ ने भी उसका ओहायो नदी में फेंका गया स्वर्ण पदक वापस किया।

(फिरोज बख़्त अहमद)

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