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शख्सियत: एनी बेसेंट

लंदन में पैदा होने, अंग्रेज से विवाह करने के बावजूद भारत को अपना लेने वाली एनी बेसेंट उन महिलाओं में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलाया।

Author September 30, 2018 5:03 AM
एनी बेसेंट (1 अक्टूबर 1847 – 20 सितंबर 1933)

लंदन में पैदा होने, अंग्रेज से विवाह करने के बावजूद भारत को अपना लेने वाली एनी बेसेंट उन महिलाओं में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलाया। स्वतंत्रता आंदोलन में एनी बेसेंट ने महती भूमिका निभाई थी। उन्होंने बाल विवाह, जाति व्यवस्था और विधवा विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करने का काम किया।

प्रारंभिक शिक्षा

एनी बेसेंट पर माता-पिता के धार्मिक विचारों का प्रभाव अधिक पड़ा। एनी के पिता की मृत्यु के बाद मां और बेटी हैरो चले गए। हैरो में उनकी मुलाकात मिस मेरियट से हुई। मेरियट के संरक्षण में ही एनी बेसेंट ने शिक्षा प्राप्त की। मिस मेरियट के साथ एनी ने फ्रांसीसी और जर्मन भाषा सीखी।

शादी की उम्र

युवावस्था में एनी बेसेंट का विवाह रेवरेंड फ्रैंक से हुआ था, लेकिन दोनों के विचार अलग थे, इसलिए यह रिश्ता लंबा नहीं चला। विवाह को लेकर एनी का मानना था कि अठारह साल से कम उम्र के पुरुष और सोलह साल से कम उम्र की लड़की का विवाह नहीं होना चाहिए। वे अपने अनुयायियों को उम्र के इस नियम का ध्यान रखने के लिए हमेशा प्रेरित करती थीं।

भारत आगमन

एनी बेसेंट 1893 में भारत आर्इं। उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण कर ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता को देखा। बेसेंट ने देखा कि भारतीयों को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों से भी दूर रखा जा रहा है। वे भारतीयों को उनके अधिकार दिलाने के लिए हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं।

समाजवाद की ओर झुकाव

एनी भारत आकर समाजवादी विचारधारा से अधिक प्रभावित हुर्इं। उन्होंने ‘सोशलिस्ट डिफेंस संगठन’ नाम की संस्था बनाई। यह संस्था मजदूर वर्ग के लिए काम करती थी। जो मजदूर लंदन की सड़कों पर निकलने वाले जुलूस में हिस्सा लेते थे उन्हें दंड मिलता था। एनी बेसेंट की संस्था ने उन मजदूरों को दंड मिलने से सुरक्षा दिलाई।

थियोसोफिकल सोसायटी

एनी 1882 में ‘थियोसोफिकल सोसायटी’ की संस्थापिका ‘मैडम ब्लावत्सकी’ से मिलीं। इसके बाद उन्होंने स्वयं को ‘थियोसोफिस्ट’ घोषित कर दिया। उन्होंने भारत को थियोसोफी की गतिविधियों का केंद्र बना कर पूरे विश्व को एकता के सूत्र में पिरोने की कोशिश की। एनी थियोसोफिकल सोसायटी की अध्यक्षा भी निर्वाचित की गर्इं।

कांग्रेस अध्यक्ष बनीं

अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में भारतीयों के अलावा एनी बेसेंट का नाम भी बड़े सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने ‘होम रूल लीग’ में शामिल होकर भारतीयों द्वारा स्वशासन की मांग का भी समर्थन किया। होम रूल आंदोलन में उन्होंने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। एनी 1917 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गर्इं। वे पहली महिला थीं, जिन्होंने यह पद ग्रहण किया था।

अखबार का सहारा

एनी बेसेंट ने ब्रिटिश सरकार की आलोचना करने के लिए अखबार का सहारा लिया। उन्होंने ‘न्यू इंडिया’ नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश शासन की नीतियों का विरोध किया। सरकार की आलोचना और विरोध के कारण उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने ‘लूसिफेर’ और ‘द कामनवील’ जैसे अखबारों का संपादन भी किया।

बेहतरीन लेखिका

बेसेंट एक समाज सुधारक होने के अलावा एक बेहतरीन लेखिका भी थीं। स्वतंत्र विचारक होने के नाते बेसेंट ने थियोसोफी पर करीब दो सौ बीस पुस्तकें और लेख लिखे। उन्हें भारतीय संस्कृति से भी बहुत प्यार था। उन्होंने भगवद्गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया। उन्होंने भारतीय राजनीति पर लगभग सतहत्तर पुस्तकें लिखीं।

निधन : एनी बेसेंट को बनारस से विशेष प्रेम था। उन्होंने बनारस को अपना घर बना लिया था। चेन्नई में 20 सितंबर को उनका निधन हुआ।

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