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कविताएं: तरीका, करीब

पंकज चतुर्वेदी की कविताएं।

कविताएं: तरीका, करीब

तरीका

लोकतंत्र में
शासन करने का
यह भी एक तरीका है
कि उसमें और
शिकार करने में
कोई फर्क न रह जाय

यानी तीर चलाओ
और फिर छिप जाओ
इससे बाद में जो होगा
उसके तुम जिम्मेदार
नहीं रहोगे

यहां तीर चलाना
पराक्रम है
और छिप जाना
कला

करीब

रेलगाड़ी जब किसी शहर के
नजदीक पहुंचती है
तो उसके हॉर्न को
ध्यान से सुनो

उसमें एक हिदायत है
कि ‘देखो, मैं आ रही हूं
सावधान!’

और शायद इसी
प्यार के चलते
उस आवाज में
मनुष्यता के करीब आने का
उत्साह छलकता है

पार

जिंदगी में
दो ही चीजें हैं-
प्यार और मार

और इनसे भी
बड़ी चीज है
वह जगह
जहां पहुंच कर
तुम्हें लगे
कि तुम कर आए हो
इन दोनों को
पार

बदलाव

निराश तो देखा था
अपने समाज को
पर भयभीत इतना
नहीं देखा कभी

पीड़ा जो कहते हैं
उन्हें वे डांट कर
चुप कर देते हैं
जो समर्थ हैं

डर

यह आयी है नयी व्यवस्था
कि ट्रेनों में सफर के दौरान
स्त्रियां आत्मरक्षा के लिए
चार इंच तक का चाकू
रख सकती हैं

डर चाकू से नहीं
इस सभ्यता से लगता है
जिसमें सुरक्षित रहने के लिए
स्त्रियों को चाकू लेकर
चलना पड़ेगा!

कोशिश

कविता एक अच्छा जीवन
जीने की कोशिश है
और अगर वह कामयाब हुई
तो उससे यह नहीं साबित होता
कि जीवन अच्छा था
बल्कि यह होता है
कि कोशिश अच्छी थी

कविताएं

 

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