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वक्त की नब्ज: नए देशभक्त

मैं उन लोगों से माफी मांगती हूं, जिनकी धार्मिक भावनाओं को मैंने गलती से आहत किया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नकली तस्वीर ट्वीट करके।

Author June 18, 2017 05:22 am
पीएम मोदी से मिलने पहुंचे योगी आदित्‍यनाथ। (Source: PTI)

शुरू में स्पष्ट कर दूं कि हिंदुओं को नाराज करने का इरादा नहीं था मेरा और न ही योगी आदित्यनाथ का अपमान करना। मगर दोनों चीजें कर बैठी पिछले हफ्ते उस तस्वीर को ट्वीट करके, जिसे मैंने असली समझा और निकली झूठी। अपने पक्ष में इतना ही कहूंगी कि गोरखनाथ मठ का दौरा मैंने पहली बार पिछले महीने किया और योगी आदित्यनाथ के गोशाले को देख कर ऐसा लगा कि योगीजी की गायों का खास सम्मान करते हैं, वे लोग जो मंदिर में दर्शन करने जाते हैं। इसलिए चूंकि गोशाले से लोग गोबर लेकर जा रहे थे अपने हाथों में उठा कर। मैंने जब पूछा किसी से कि ऐसा क्यों कर रहे हैं तो बताया गया कि गोबर से गौरी-गणेश की मूर्तियां बनती हैं पूजा के लिए।  सो, जब मुझे किसी ने वह तस्वीर भेजी, जिसमें योगीजी को गोमूत्र पीते दिखाया गया है अपने गोशाला में, मैंने उसको असली समझा। हिंदू नहीं हूं, लेकिन जानती हूं कि गोमूत्र को पवित्र मानते हैं हिंदू और उसको कई बीमारियों की दवा भी मानते हैं। मेरे अपने दोस्त हैं, जो गोमूत्र का व्यापार करते हैं। मेरा जरा भी इरादा नहीं था किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का, सो मैं उन लोगों से माफी मांगती हूं, जिनकी धार्मिक भावनाओं को मैंने गलती से आहत किया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की नकली तस्वीर ट्वीट करके।  उस तस्वीर का लेकिन अजीब परिणाम निकला है, जिसके बारे में मैं आपको बताना चाहती हूं। पिछले दो वर्षों में देश भर में आक्रोशित हिंदू युवक नजर आने लगे हैं। कुछ गोरक्षक के भेस में तो कुछ टीवी, सोशल मीडिया और अन्य मीडिया में अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए। एक राजनीतिक पंडित होने के नाते मैंने बहुत कोशिश की इस आक्रोश को समझने की, लेकिन इसके बावजूद मुझे कारण मालूम नहीं हुए हैं। आखिरकार यह वह समय है, जब हिंदुओं का देश भर में बोलबाला है। सो, इतना आक्रोश क्यों दिख रहा है उन लोगों में, जो अपने आप को नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ का भक्त मानते हैं?

उस नकली तस्वीर की प्रतिक्रिया से मुझे थोड़ा-बहुत इस सवाल का जवाब मिला है। जिन लोगों ने मुझे ट्विटर पर गालियां दीं और मेरी नीयत पर सवाल उठाए, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनको इस्लाम और मुसलमानों से सख्त नफरत है। कइयों ने आरोप लगाया कि मेरी हिम्मत नहीं है इस्लाम की आलोचना करने की। ऊंट का पेशाब पीते हुए अरब की एक तस्वीर कुछ लोगों ने ट्वीट की, यह कहते हुए कि मुझे ऊंट का पेशाब पवित्र लगता है, क्योंकि मैं मुसलिम हूं। कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने मुझ पर आरोप लगाया कि मैं ईसाइयों की आलोचना करने की हिम्मत नहीं रखती हूं, बावजूद इसके कि गिरजाघरों में वाइन पिलाई जाती है ईसाइयों को ईश्वर का रक्त मान कर। सो, असली आक्रोश का कारण यह है कि हिंदुओं को लगता है कि भारत में हर धर्म-मजहब की इज्जत होती है सिवाय हिंदू धर्म की। आक्रोश का दूसरा कारण, जो मुझे अब मालूम हुआ है, वह यह कि देशभक्ति को कई हिंदू हिंदुत्व से जोड़ने लगे हैं। उनकी दृष्टि में हिंदू धर्म की आलोचना करना देश का अपमान करने के बराबर है। यह भी मानते हैं इस सोच के लोग कि मुसलिम और ईसाई किसी हाल में देशभक्त नहीं हो सकते, क्योंकि देशभक्त सिर्फ हिंदू हो सकते हैं। मेरे खिलाफ ट्वीट करने वालों में ऐसे भी कई लोग थे, जिन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी नजरों में भारत के मुसलमान असल में पाकिस्तान के वफादार हैं। कई ऐसे भी भक्त हैं प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के, जो चाहते हैं कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने का समय आ गया है। ऐसा हिंदू राष्ट्र, जिसमें उन लोगों की कोई जगह नहीं होगी, जो गोश्त खाते हैं, शराब पीते हैं और गोमाता की इज्जत नहीं करते। इन चीजों को अधर्म का प्रतीक मानते हैं ये लोग।

सच पूछिए तो इनकी बातें ट्विटर पर पढ़ने के बाद मेरे दिल में एक गहरी मायूसी बैठ गई है, क्योंकि मुझे यकीन होने लगा है कि हिंदुत्व सोच के समर्थक अब बहुमत में आने लगे हैं और इनका बस चले तो भारत से उन सब लोगों को भगाने की कोशिश की जाएगी, जो इस सोच को मानते नहीं हैं। मोदी और योगी बार-बार कह चुके हैं कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ ही उनका मकसद है, लेकिन शायद जानते नहीं हैं कि यह संदेश उनके समर्थकों तक नहीं पहुंचा है। इस बात को अगर सुना भी है इन लोगों ने तो इसको सिर्फ चुनावी जुमला समझ कर कूड़ेदान में फेंक दिया है, क्योंकि उनके सपनों के भारत में सबका साथ सबका विकास कोई मतलब नहीं रखता है।उनके सपनों के भारत में जगह है सिर्फ उन लोगों के लिए, जो घर वापसी आंदोलन में शामिल होने को तैयार हैं, जो लव जिहाद जैसे आंदोलन में शामिल होना चाहते हैं और जो गोरक्षा को इतना नेक काम मानते हैं कि उनकी नजरों में पहलू खान और मोहम्मद अखलाक जैसे लोगों की हत्या करने वाले भी देशभक्त हैं, हत्यारे नहीं। सच पूछिए तो पिछले हफ्ते ट्विटर ने मुझे नए भारतवासियों की ऐसी तस्वीर दिखाई, जिसे देख कर भारत के भविष्य को लेकर चिंता होने लगी है।  जब भी किसी देश में ऐसे लोग हावी हो जाते हैं, जो अपनी देशभक्ति को जोड़ लेते हैं किसी मजहब से, उस देश में असली राजनेता बन जाते हैं महंत और मौलवी। पाकिस्तान में जो पिछले तीस वर्षों में परिवर्तन आया है, उसका विश्लेषण करते भारत के नए देशभक्त, तो शायद आगे बढ़ते समय फूंक-फंूक कर कदम रखते।

 

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