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वक्त की नब्ज: इस हिंसक दौर में

जिस देश में पुलिस अफसरों को बर्बरता से मारा जाता है सरेआम, उस देश में कौन आएगा निवेश करने? खासकर वे लोग क्यों आएंगे, जिनके यहां बीफ खाना उतना ही आम है जितना योगी आदित्यनाथ के लिए दाल-चावल खाना?

Author December 9, 2018 2:24 AM
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो सोर्स : PTI)

एक सवर्ण हिंदू पुलिस अफसर की हत्या पिछले हफ्ते हिंदू गोरक्षकों ने बर्बरता और बेरहमी से की। सुबोध कुमार सिंह दलित या मुसलिम होते तो कोई बात न होती। लिंचिंग के इस दौर में हमने आदत डाल ली है इस किस्म की घटनाओं को नजरंदाज करने की, क्योंकि पिछले चार वर्षों में इतनी हुई हैं हत्याएं गोरक्षा के नाम पर कि हम समझ गए हैं कि गोरक्षकों के रक्षक सत्ता में बैठे हैं, सो ऐसा होगा ही। लेकिन अब तक उन्होंने न किसी पुलिस अधिकारी की हत्या करने की हिम्मत दिखाई है और न ही किसी सवर्ण हिंदू को मारने की। तो अब क्या सत्ता में बैठे भारतीय जनता पार्टी के आला राजनेता समझेंगे कि जिस हिंसा को उन्होंने अपने शासनकाल में फैलने की इजाजत दी, वह अब उनके अपनों को खाने लग गई है?

क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अब समझेंगे कि हिंसा को जब ऊपर से छूट मिलती है, तो उसका बेकाबू होना स्वाभाविक है? जबसे योगी आदित्यनाथ बने हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, तभी से उन्होंने इशारे किए हैं हर तरह से कि वे सिर्फ हिंदुओं के मुख्यमंत्री हैं। मुसलमानों के नहीं। सो, सत्ता में आते ही उन्होंने रोमियो स्क्वाड बनाए इस बहाने कि उनके राज्य में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। क्या इत्तेफाक है कि यह रोमियो स्क्वाड सिर्फ मुसलिम नौजवानों को पकड़ते दिखे हैं? क्या इत्तेफाक है कि इनको उन्हीं महिलाओं की सुरक्षा करने की जरूरत महसूस हुई, जिनके साथ कोई मुसलिम लड़का दिखा? लव जिहाद के नाम पर सिर्फ मुसलिम मर्द मारे गए हैं, क्या यह भी इत्तेफाक है?

योगी आदित्यनाथ ने कभी छिपाने की कोशिश नहीं की कि उनको मुसलिम पसंद नहीं हैं। नरेंद्र मोदी के दौर में जब पहली लिंचिंग हुई मोहम्मद अखलाक की, तो योगी आदित्यनाथ ने ऊंची आवाज में कहा कि अखलाक के परिवार को हिरासत में लिया जाना चाहिए, क्योंकि उन पर गोहत्या का शक है। मैंने उस समय भी योगी की आलोचना की थी और जब उनको उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया, तो मैंने एक बार फिर स्पष्ट किया अपने लेखों में कि मोदी बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं एक कट्टरपंथी हिंदू को ऐसे राज्य का मुख्यमंत्री बना कर, जिसमें मुसलमानों की आबादी बीस फीसद के करीब है। यानी मुझे योगी आदित्यनाथ जैसे कट्टरपंथी लोग बिलकुल पसंद नहीं हैं, चाहे वे हिंदू हों, मुसलिम, सिख या इसाई। ऐसा कहने के बाद लेकिन यह भी कहना जरूरी है कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी कट्टरपंथ की सारी हदें पार कर जाएंगे। उनके दौर में उनकी तकरीबन हर नीति बनी है मुसलमानों को इस बात का अहसास दिलाने के लिए कि वे उत्तर प्रदेश में अब दूसरे दर्जे के नागरिक हैं और रहेंगे। सो, रोमियो स्क्वाड बनाने के बाद उन्होंने अवैध बूचड़खाने बंद कराने की मुहिम चलाई, जिसके तहत बंद हुए कई जायज बूचड़खाने भी और जिसकी वजह से अति-गरीब मुसलिम और दलित लोग बेरोजगार हो गए। मांस उद्योग के जो सबसे गंदे काम हैं, जैसे जानवर की हत्या करना और उसकी खाल उतारना, वे अक्सर करते हैं सबसे गरीब तबके के मुसलिम और दलित।

इस मुहिम के बाद योगी ने मुसलिम नाम हटाने की मुहिम छेड़ी, सो इलाहाबद अब इलाहाबाद नहीं रहा और मुगलसराय मिट गया है जहां से। इस ऐतिहासिक जंक्शन का नाम ऐसे व्यक्ति के नाम पर रखा गया है, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी के अलावा बहुत कम लोग जानते हैं। योगी शायद साबित करना चाहते हैं कि वे हिंदू हृदय सम्राट बन कर रहेंगे। सो, हैदराबाद पहुंच कर उन्होंने भाषण दिया कि तेलंगाना के लोग भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाते हैं, तो हैदराबाद का नाम बदला जाएगा और ओवैसी बंधु भागने पर मजबूर हो जाएंगे, जैसे निजाम भागे थे कभी। योगी इतिहास में कमजोर हैं, सो जानते नहीं हैं कि निजाम कहीं नहीं भागे। उनका परिवार आज भी हैदराबाद में रहता है। हां यह बात जरूर हुई उनके इस भाषण से कि अकबर ओवैसी ने जवाब इतना भद्दा दिया कि यहां उसका वर्णन करना बेमतलब है।

अब योगी को समझना चाहिए कि उनकी नीतियों से नुकसान मुसलमानों का कम और भारत का ज्यादा हो रहा है। एक तरफ हैं प्रधानमंत्री, जो विदेशों में घूम कर लोगों से कहते हैं कि ‘मेक इन इंडिया’ करने भारत आएं। दूसरी तरफ हैं उनके चुनिंदा मुख्यमंत्री, जो साबित करने में लगे हुए हैं कि भारत में परिवर्तन सिर्फ यही आया है कि कानून-व्यवस्था को ताक पर रख दिया गया है और कानून को ऐसे लोगों के हवाले कर दिया गया है, जिनकी नजरों में गाय की रक्षा इंसानों की रक्षा से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। जिस देश में पुलिस अफसरों को बर्बरता से मारा जाता है सरेआम, उस देश में कौन आएगा निवेश करने? खासकर वे लोग क्यों आएंगे, जिनके यहां बीफ खाना उतना ही आम है जितना योगी आदित्यनाथ के लिए दाल-चावल खाना? रहम आती है तो उत्तर प्रदेश के लोगों पर, जिन्होंने परिवर्तन और विकास के नाम पर डट कर वोट दिया था भारतीय जनता पार्टी को पिछले साल। तंग आए हुए थे जातिवाद के आधार पर राजनीति करने वालों से, सो यह सोच कर कि वास्तव में विकास और परिवर्तन का दौर चलने वाला है, प्रचंड बहुमत से जिताया भारतीय जनता पार्टी को, जैसा कभी पहले किसी दूसरे राजनीतिक दल को नहीं मिला था। अब योगी आदित्यनाथ ने साबित कर दिया है कि उनसे अच्छे दिन तो उत्तर प्रदेश में वे राजनेता दिखा गए, जिनकी राजनीति का आधार जातिवाद है। क्या अब भी प्रधानमंत्री मौन रहेंगे?

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