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वक्त की नब्ज- बढ़ती मुश्किलें

संसद सत्र जब शुरू हुआ और मोदी अपने सांसदों को संबोधित करने गए, तो भावुक होकर उन्होंने स्वीकार किया कि गुजरात की लड़ाई बहुत कठिन थी।

Author December 24, 2017 05:10 am
पीएम मोदी

नरेंद्र मोदी के लिए बीता सप्ताह अच्छे दिनों से नहीं, बहुत बुरे दिनों से भरा रहा। पहले तो गुजरात को हारते-हारते जीते, इस तरह कि ऊपर से बेशक खुश दिखे होंगे प्रधानमंत्री, लेकिन अंदर से खुश होना शायद मुश्किल हुआ होगा। सारे परिणाम आने के बाद जब भारतीय जनता पार्टी निन्यानबे सीटों पर रुक गई, तो भाजपा प्रवक्ताओं ने बार-बार कहा- ‘जो जीता वही सिकंदर’। लेकिन जिस सुबह नतीजे आ रहे थे और कुछ घंटों के लिए लगा कि कांग्रेस आगे दौड़ रही है, तो उन्होंने हार के कई कारण बताए। जातिवाद के बल पर चुनाव लड़ा कांग्रेस ने, झूठी बातें प्रधानमंत्री के बारे में कही गर्इं, आदि। और हम जो चैनलों में दिन भर बैठ कर विश्लेषण कर रहे थे नतीजों का, हमको साफ दिखा कि मोदी हारते-हारते गुजरात जीते हैं। यह उनके लिए खुशखबरी नहीं है, क्योंकि गुजरात के इस चुनाव ने निर्जीव कांग्रेस में जान फूंक दी है। राहुल गांधी शायद पहली बार ऐसे पेश आए चुनाव प्रचार के दौरान कि उनके आलोचक भी मानते हैं अब कि उनको पप्पू कहना मुश्किल हो गया है। गंभीरता से लेना पड़ेगा उन्हें।

इस बात को प्रधानमंत्री भी समझ गए हैं। संसद सत्र जब शुरू हुआ और मोदी अपने सांसदों को संबोधित करने गए, तो भावुक होकर उन्होंने स्वीकार किया कि गुजरात की लड़ाई बहुत कठिन थी। जाहिर है कि मोदी जानते हैं कि अगले साल मध्यप्रदेश और राजस्थान में आने वाले चुनाव भी कठिन होंगे। विनम्रता से अर्ज करना चाहती हूं कि अगर जीतना चाहते हैं इन दोनों राज्यों को तो उनको फुर्सत से उन बातों को सुनना चाहिए, जो गुजरात के नौजवान मतदाताओं ने पत्रकारों से कही। सबने बार-बार कहा, हमको रोजगार चाहिए। बेरोजगारी की समस्या 2014 के आम चुनाव में भी सबसे बड़ा मुद्दा थी और आज भी है, क्योंकि मोदी के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था में वह ऊर्जा अभी तक नहीं दिखी है, जिससे बेरोजगारी की समस्या हल हो सके। यह समस्या तब हल होगी, जब निजी निवेशक फिर से निवेश करना शुरू करेंगे। नई सरकारी नौकरियों की गुंजाइश अब बहुत कम रह गई है, क्योंकि जितनी नौकरियां पैदा हो सकती थीं हो चुकी हैं, सो रोजगार अब पैदा होगा तो सिर्फ निजी क्षेत्र में।

जब तक भारत के बड़े, छोटे और मझोले निवेशक अपना पैसा नई सेवाओं और कारखानों में लगाना नहीं शुरू करेंगे तब तक नई नौकरियों का पैदा होना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। ऐसा अभी तक हुआ नहीं तो इसलिए कि मोदी का ध्यान काले धन की खोज में ज्यादा रहा है पिछले तीन सालों में। इस कोशिश में उन्होंने नोटबंदी की और हर दूसरे-तीसरे दिन आयकर विभाग की तरफ से कोई नई धमकी सुनने को मिलती है। ऐसे माहौल में कोई बेवकूफ ही होगा जो निवेश करने निकलेगा। गुजरात के नतीजों के बाद दूसरा झटका तब लगा होगा मोदी को जब 2-जी का फैसला सुनाया विशेष अदालत ने और फैसला यही हुआ कि सब आरोपी निर्दोष थे। इसलिए सबको बाइज्जत बरी किया गया। जज साहब ने ऊपर से यह भी कहा कि पिछले सात वर्षों से अदालत में वे रोज बैठे हैं, एक भी दिन की छुट्टी लिए बिना, इस उम्मीद में कि एक न एक दिन कोई ठोस सबूत उनके सामने पेश किया जाएगा, जिसकी बुनियाद पर कानूनी कार्यवाही संभव हो सकेगी। ऐसा जब नहीं हुआ तो उनको इसी नतीजे पर पहुंचना पड़ा कि 2-जी में कोई घोटाला ही नहीं था।

मोदी के लिए यह खबर निजी तौर पर बुरी थी, क्योंकि 2014 वाले चुनाव अभियान में उनका शायद ही कोई भाषण रहा होगा, जिसमें उन्होंने 2-जी का जिक्र न किया हो। इस घोटाले का जिक्र इसलिए ज्यादा किया उन्होंने, क्योंकि पूर्व सीएजी विनोद राय के गणित के मुताबिक देश को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था इस घोटाले की वजह से। उस समय भी कई अर्थशास्त्रियों ने कहने की कोशिश की कि इतना बड़ा घोटाला हो ही नहीं सकता था। लेकिन 2012 में माहौल ही कुछ ऐसा था देश में कि आम भारतवासी कुछ भी मानने को तैयार था। याद रहे कि यह वह दौर था जब अण्णा हजारे ने दिल्ली पहुंच कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना आंदोलन शुरू किया था और देश के दूरदराज कोनों से नौजवान आए थे उनका साथ देने।

पिछले तीन वर्षों में मोदी ने अपनी सरकार पर किसी भी घोटाले का साया नहीं पड़ने दिया है अभी तक। लेकिन नीचे अगर झांक कर देखेंगे प्रधानमंत्री तो उनको दिखेगा कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं वहां आज भी भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है। इस बात को आम देशवासी अच्छी तरह जानते हैं। लेकिन हो सकता यह खबर प्रधानमंत्री तक न पहुंची हो, क्योंकि उनके आसपास जो आला अधिकारी हैं वे उन तक बुरी खबरें पहुंचने नहीं देते हैं, न ही उनको अपने साथियों से कोई बुरी खबरें मिलने की संभावना है, क्योंकि किसकी हिम्मत है उनसे सच बोलने की?

सो, प्रधानमंत्री जी अगर आप 2019 में दोबारा जीतना चाहते हैं, तो बहुत जरूरी है कि आप देश के आम लोगों से मिलने की कोशिश करें आने वाले साल में। आम आदमी से मिलना तो दूर की बात, प्रधानमंत्री हम पत्रकारों से भी इतना कम मिलते हैं कि उन तक जमीनी हालात की खबर कैसे पहुंच सकेगी। जब भी अर्थव्यवस्था पर बोलते हैं प्रधानमंत्री तो कहते हैं कि उनके आने के बाद भारत समृद्धि की दिशा में दौड़ रहा है इतनी तेजी से कि कुछ ही वर्षों में हम चीन का मुकाबला कर सकेंगे। उम्मीद है कि अगले महीनों में प्रधानमंत्री हकीकत को जानने की पूरी कोशिश करेंगे।

 

 

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